Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अक्टूबर 2, 2015

जुगलबन्दी-घर


 डॉ भावना कुँअर और डॉ ज्योत्स्ना शर्मा

 1

नींव में दबे

छोटे हाथों के बल

तो बना घर।

 0

नींव मुस्काई

उसने जो घर की

देखी ऊँचाई ।

2

सलौना लगा

सपने ओढ़े बैठा

मिला जो घर।

0

सजाये सदा

हिल-मिल सपने

प्यारा वो घर ।

3

खिची दीवारें

बिलख-बिलख रोया

मासूम घर।

0

गाँव,शहर

टुकड़ों में बँटता

रोया है घर ।

4

छूटा है घर

उड़ते थे जिसमें

फैलाए पर।

0

नेह की डोर

खींच लिये जाए है

छूटे न घर ।

5

कैसे अटकी

सपनो की चूनर

पूछे है घर?

0

देखे,सँजोए

तार-तार सपने

बेचैन घर ।

6

सीली दीवारें

अपना पल्लू झारें

चुप है घर।

0

रिसते जख्म

पर्त-पर्त उघड़े

सिसका घर ।

7

वो जब आए

खुशबू नहाया सा

खिला था घर।

0

महका घर

आने की आहट से,

तेरे इधर !

8

 

अभी रँगा था

बरखा ने धो डाला

उदास घर।

0

बैरन वर्षा

ले गई सारे रंग

बेरंग घर ।

9

करे प्रतीक्षा

लौटा न कभी कोई

बुढ़ाया घर।

0

थके नयन

जोहे बाट किसकी

ये खण्डहर ।

10

बोलियाँ लगी

पल में छिन गया

मेरा वो घर।

0

होने न दूँगी

नीलाम , सपनों का-

ये प्यारा घर !

-0-

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Responses

  1. मर्म को छूते बहुत ही सुंदर हाइकु ! मन को बाँध लिया इस जुगलबंदी ने !
    डॉ भावना कुँअर और डॉ ज्योत्स्ना शर्मा को हार्दिक बधाई और साधुवाद !

  2. ज्योत्सनाजी लाज़वाब जुगलबंदी।बधाई

  3. BAHUT ACHHI JUGALBANDI HAIKU LIKHE HAIN JYTSANA JI AAPNE MERI BADHAI..

  4. घर के प्रति अपनत्व भावनाओं को प्रकट करती बहुत उम्दा जुगलबंदी ।
    सार्थक स्नेहपूरित मर्मस्पर्शी!!!

  5. ghar hi ghar anek roopon , anek bhavon men hansata-muskarata -rota dhahata ,jharata ,berang, prateexa karata ghar aur pyari anubhutiyan jagati
    jugalabandi bhawana kunwar ji va jyotsna ji badhai.
    pushpa mehra.

  6. हृदय से आभार संपादक द्वय ,सुशीला जी , अनिता जी, डॉ.भावना कुँअर जी ,डॉ.पूर्णिमा जी एवम् पुष्पा दीदी !
    इस स्नेह ,सम्मान हेतु आप सभी का दिल से शुक्रिया !!

  7. घर की अवधारणा को उत्तम हाइकुओं ने साकार कर दिया ……खिची दीवारें
    बिलख-बिलख रोया
    मासूम घर।…..
    और
    …….सीली दीवारें
    अपना पल्लू झारें
    चुप है घर। पढ़कर पलकें नम हो गईं …
    ढेरों बधाई

  8. बोलियाँ लगी
    पल में छिन गया
    मेरा वो घर।
    0
    होने न दूँगी
    नीलाम , सपनों का-
    ये प्यारा घर !
    manmohak utkrisht prastuti .

    डॉ भावना कुँअर और डॉ ज्योत्स्ना शर्मा ji badhaai .

  9. घर के गुमान की बेहद खूबसूरत प्रस्तुति। जुगलबंदी का एक-एक हाइकु मर्मस्पर्शी।
    भावना कुँवर जी, ज्योत्स्ना शर्मा जी….हार्दिक बधाई।

  10. ज्योत्सना जी बहुत सधी हुई जुगलबंदी की है |भावना जी और ज्योत्सना जी हार्दिक बधाई |
    वो जब आये/ खुशबू नहाया सा / खिला था घर |
    महका घर /आने की आहटसे/तेरे इधर|
    बहुत सुन्दर है |

  11. kya baat hai bahut satik jugalbandi hai badhai aapko
    rachana

  12. हार्दिक धन्यवाद रचना जी , सविता जी ,कृष्णा जी ,मंजु गुप्ता जी एवम् कमला जी …. आपकी उपस्थिति अनमोल है मेरे लिए 😊

  13. वाह वाह आनन्द आ गया कमाल की जुगलबंदी ज्योत्स्ना और भावना जी मन मोह लिया। बधाई आप दोनों को।

    मंजूषा “मन”

  14. बेहतरीन जुगलबन्दी !
    मैंने ये सोचने की गुस्ताखी ही नहीं की कि किसकी रचनाएँ ज़्यादा सुन्दर हैं. … क्योंकि दोनों एक-दूसरे की पूरक हैं!
    अब रोटी और सब्ज़ी में से एक को तो चुना नहीं जा सकता न ?
    दोनों महान कवियत्रिओं को भावपूर्ण शुभकामनायें!!

  15. donon kavyitriyon ke haikuo ne man moh liya … bahut badiya jugalbandi bani hai …bhawna ji evam jyotsna jo ko bahut -bahut shubhkaamnayen .

  16. इस स्नेह सम्मान हेतु हृदय से आभार मंजूषा “मन” जी , अमित जी एवं ज्योत्स्ना प्रदीप जी ..बहुत बहुत शुक्रिया !

  17. क्या बात है ! कितनी प्यारी जुगलबंदी…आनंद आ गया|
    आप दोनों को हार्दिक बधाई…|


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