Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 30, 2015

तेरी आँखें पाकीज़ा


1-ज्योत्स्ना प्रदीप

प्रदीप ज्योत्स्ना1

बरसा रहीं

तेरी आँखें पाकीज़ा

मय अनोखी  ।

2

मय खराब

पर जो आँखों में है

वो लाजवाब !

3

समेटी मैंने

हया भरी आँखों से

गिरती बूँदे ।

4

था चाँद पूरा

जब ख़्वाब अधूरा

प्याले में भरा।

-0-

2-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

1

दर्द हमारे

जब बँट जाएँगे,

घट जाएँगे।

2

दुआ में हाथ

जबजब उठाए

तुम ही दिखे

3

विधि ने लिखे

हम सब के भाग

आँसू गीत।

4

भीगें पलकें

अँजुरी भरे आँसू

जब छलके।

5

चाँद उदास

लगा तुम रोए हो

जीभर आज।

6

पावन मन

ख़ुशबू से महके

पूत वचन।

( 29 सितम्बर,2015)

2

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Responses

  1. ज्योत्स्ना जी हाइगा व हाइकु दोनों सुंदर।बधाई।
    अंकलजी बेहद खूबसूरत हाइकु।
    आपने लिखे
    हाइकु लाज़वाब
    हो मुबारक।

    चाँद उदास
    लगा तुम रोए हो
    जीभर आज।

    दुआ में हाथ
    जब–जब उठाए
    तुम ही दिखे ।

  2. aadarniya himanshu ji evam hardeep ji ka hridy se abhaar mere haiku ke saath -saath meri mummy ki bhi painting ko sthaan dene ke liye.
    bhaiya ji bahut sundar v sateek haiku hain.!………..is haiku mein gahan sandesh chipa hai ..hum jab logon ko apna maante hain tabhi to dukhon ko unse baante hain …nisandeh vo kam ho jaata hain.bahut pyaari baat kahi hai …aapki lekhni ko hridy se naman!

    !दर्द हमारे
    जब बँट जाएँगे,
    घट जाएँगे।
    anita manda ji hridy se abhaar !

  3. दर्द हमारे
    जब बँट जाएँगे,
    घट जाएँगे।

    बरसा रहीं
    तेरी आँखें पाकीज़ा
    मय अनोखी ।
    भइया एवं ज्‍योत्‍सना जी हार्दिक बधाई।

  4. sabhi haiku behad sundar…
    चाँद उदास
    लगा तुम रोए हो
    जीभर आज
    aur
    था चाँद पूरा
    जब ख़्वाब अधूरा
    प्याले में भरा……………….bahut vishesh lage!
    shubhkaamnayen!

  5. सुन्दर रचनाएँ

    कम्बोज सर एवं ज्योत्स्ना मैम को बधाई एवं शुभकामनायें

  6. वाह! चाँद पूरा, ख़्वाब अधूरा-क्या कहने! अतिसुन्दर ज्योत्स्ना जी ! हाइगा भी बहुत सुंदर!

    भैया जी आपके हाइकु तो मन को पूरा भिगो गए। एक से बढ़कर एक सभी !

    आपको दोनों को हार्दिक बधाई !

    ~सादर
    अनिता ललित

  7. donon ke haiku bahut marmik lage, hardik badhai.

  8. ज्योत्सना जी सुन्दर हाइकू। बहुत बहुत बधाई।

    रामेश्वर जी बहुत बहुत सुन्दर हाइकू।

    दर्द हमारे
    जब बंट जायेंगे
    घट जायेंगे।
    एकदम सही कहा है।

    बधाई स्वीकार करें।

  9. खूबसूरत हाइगा ज्योत्स्ना प्रदीप जी।

    दर्द हमारे
    जब बंट जायेंगे
    घट जायेंगे।……बहुत बढ़िया हाइकु!
    आप दोनों को हार्दिक बधाई।

  10. हाइगा , हाइकु लाजवाब
    बधाई .

  11. दर्द हमारे
    जब बँट जाएँगे,
    घट जाएँगे।
    2
    दुआ में हाथ
    जब–जब उठाए
    तुम ही दिखे । बहुत गहरी बात है इन हाइकु में | बधाई आपको |

    ज्योत्स्ना जी प्यारा सा हाइगा | बधाई |

  12. बेहद ख़ूबसूरत प्रस्तुति !
    एक-एक हाइकु लाजवाब ….लेकिन …

    दर्द हमारे ,दुआ में हाथ ,चाँद उदास ,पाकीज़ा आँखे …बेहतरीन !!
    हाइगा भी बहुत सुन्दर बना है ….

    आदरणीय काम्बोज भैया जी एवं ज्योत्स्ना जी को बहुत-बहुत बधाई …सादर नमन !!

  13. dard hamare,…, bheegen palaken adi sabhi haiku bahuthi sunder hain.thaa chand pura….., barasa rahin \teri ankhen pakeeza\ maya anokhi.bahut sunder haiku. kamboj bhai ji va jyotsna ji ko badhai.
    pushpa mehra

  14. दुआ में हाथ
    जब–जब उठाए
    तुम ही दिखे ।
    bahuut pavitr haiku shayad hi kabhi aesa padha ho bahut bahut badhai bhaiya

    बरसा रहीं
    तेरी आँखें पाकीज़ा
    मय अनोखी ।
    aankhe pakiza bahut khoob badhai
    rachana

  15. ज्योत्सनाजी ,इतने सुन्दर हाईगा और हाइकु रचने के लिए हार्दिक बधाई |बरसा रहीं /तेरी आँखें पाकीज़ा /मय अनोखी |खूबसूरत है |भाई कम्बोज जी ,बहुत सुन्दर और गहरी बात आपने अपने इस हाइकु में कह डाली |दुआ में हाथ /जब जब उठाये /तुम ही दिखे|और दर्द हमारे/जब बंट जायेंगे /घट जायेंगे | हार्दिक बधाई |


  16. समेटी मैंने
    हया भरी आँखों से
    गिरती बूँदे । —जयोत्सना जी

    दर्द हमारे
    जब बँट जायेंगे
    घट जायेंगे।—कांबोज जी
    बहुत बहुत बधाई …..मनभावन हाइकु पढ़े आप दोनों के ,पूरी कविता का मनोरम चित्र खींचते हुवे ।

  17. आज के सभी हाइकु सुंदर भाव ले कर आये। हाइगा तो कमाल का है।
    दर्द हमारे /जब बँट जाएँगे /घट जाएँगे। बहुत सही बात कही। और यह भी बहुत खूब है … पावन मन /खशबू से महके/ पूत वचन। भावों की इतनी सुंदर अभिव्यक्ति गुणी साधक ही कर सकता है। हार्दिक बधाई आप दोनों को।

  18. दर्द हमारे
    जब बँट जाएँगे,
    घट जाएँगे।

    चाँद उदास
    लगा तुम रोए हो
    जीभर आज।

    Kamboj ji maa sarsvati ka aabhar prkat kijiye aapki lekhni par khud aakar virajman jo ho gayi hain ye 2 haiku unki badi krpa hai bahut alag jite jagate kya shbad nahi hain bas dil se badhai…

    बरसा रहीं
    तेरी आँखें पाकीज़ा
    मय अनोखी ।
    jyotsna ji aapka ye haiga bahut payara hai painting bhi bahut payari aapko bhi aneko badhai..

  19. jyotsana jee bahut sundar haiga,haiku bhee bahut achche lage .badhai.
    aadarneey kamboj bhai ke haiku bahut sanjeeda v khoobsoorat hai .aapko bahut badhai bhai.

  20. आपने मेरे हाइकु को इतना मान दिया, प्यार दिया : इसके लिए धन्यवाद बहुत छोटा शब्द है। हौसला बढ़ाने के लिए आप सबका कृतज्ञ हूँ

  21. बहुत सुन्दर हाइकु | हार्दिक बधाई ज्योत्सना जी, काम्बोज जी |

  22. aap sabka hridy tal se abhaar! abhaar ! abhaar !

  23. bade hi sarvottam haiku rache hai kamboj ji aur jyotsana ji ne…..iss haige ne to chaar chaand laga diye hai….mataji ki painting kala ka saajeev pranaam….ek ek shabd bohot hi sundar….sabhi ko badhai…

  24. bade hi sarvottam haiku rache hai kamboj ji aur jyotsana ji ne…..iss haige ne to chaar chaand laga diye hai….mataji ki painting kala ka saajeev pramaan ….sabhi ko meri or se pranaam….ek ek shabd bohot hi sundar….sabhi ko badhai…

  25. बहुत सुन्दर हाइगा और इस मनमोहक हाइकु के लिए बधाई…
    था चाँद पूरा
    जब ख़्वाब अधूरा
    प्याले में भरा।

    आदरणीय काम्बोज जी की सशक्त कलम के तो क्या कहने…| सभी बेहतरीन हाइकु पर इस की तो बात ही निराली है…
    चाँद उदास
    लगा तुम रोए हो
    जीभर आज।
    हार्दिक बधाई…|


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