Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 26, 2015

नदी से हारे


सन्तोष कुमार सिंह

Santosh Photo 2 1

मेरी थकान

दूर करे पत्नी की

एक मुस्कान।

2

हे! मेघ भाई

भू की फटी बिवाई

लगा दवाई।

3

बाँटती फिरे

सुमनों की सुगंध

हवा निर्द्वन्द्व।

4

प्रेम के धागे

टूटते चटचट

स्वार्थ के आगे।

5

जलते नहीं,

दहकते बहुत

लू में पलाश।

6

नदी से हारे

मिलने नहीं दिए

दोनों किनारे।

7

सड़कें चौड़ीं

दिल हुए हैं तंग

ईश्वर दंग।

8

दो दिन रोया

जब मरा था बाप,

कुत्ते को बरसों।

9

मूँछों को ऐंठे

मेघ पी रहे हुक्का

नभ में बैठे।

10

खूब नहाया

मन हुआ न साफ

भरे हैं पाप।

11

पेट हो भरा

फिर भी रहे प्राणी

प्यार का भूखा।

12

सपना हुआ

किवाडें खुलवाना

साँकल बजा।

13

नदी की धार

चुपचाप सहती

चप्पू की मार।

14

बड़ा शहर

Haiku Sugandhaमकान तो बहुत

घर हैं थोड़े।

15

उतर आए

कपास के खेत में

लाखों सितारे।

-0- (हाइकु सुगन्धा से )

-0-

परिचय

सन्तोष कुमार सिंह

जन्म तिथि- 80 जून 1951

सेवा निवृत्त अभियन्ता,इण्डियन ऑयल कार्पोरेशन, लि मथुरा रिफ़ाइनरी

प्रकाशन –अभी तक 20 पुस्तकें छपीं । ‘हाइकु सुगन्धा’( 2015) हाइकु की दूसरी पुस्तक।

-0-

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Responses

  1. बड़ा शहर
    मकान तो बहुत
    घर हैं थोड़े … वाह क्या बात है , बहुत सुन्दर

  2. बहुत सुन्दर हाइकु | हार्दिक बधाई |

  3. बड़ा शहर
    मकान तो बहुत
    घर हैं थोड़े ……..बहुत सही कहा, बहुत बढ़िया हाइकु!

  4. सभी हाइकु सुन्दर हैं, बधाई!!!

  5. बहुत बहुत सुन्दर संतोष जी हर हाइकू गहरे भावों को संजोये हुए।

    बहुत बहुत बधाई

    स्वागत

  6. swaagat!

  7. sabhi haiku bahut hi sunder hain, alag -alag bhavon se bhare hain . singh ji
    ko badhai.
    pushpa mehra.

  8. सभी हाइकू बेहतरीन मानवीय संवेदना और प्रकृति से जुड़े हुए ..विशेष कर जलते नही ,घर है थोड़े ,उतर आये

  9. बड़ा शहर
    मकान तो बहुत
    घर हैं थोड़े।
    साज की हकीकत है यह .
    सभी मार्मिक हैं

  10. बहुत सुन्दर हाइकु सभी …

    वंदन-अभिनन्दन !

  11. सपना हुआ किवाडें खुलवाना….वाह बहुत मार्मिक ह्रदयस्पर्शी अभिव्यक्ति !!
    बधाई स्वीकारें आ०संतोश जी!!!

  12. बधाई …कुछ अलग से अनूठे से हाइकुओं से परिचय कराने के लिए …
    1
    मेरी थकान
    दूर करे पत्नी की
    एक मुस्कान।
    2
    हे! मेघ भाई
    भू की फटी बिवाई
    लगा दवाई।

  13. नदी की धार
    चुपचाप सहती
    चप्पू की मार।
    Aapke sabhi haiku bahut pasand aaye par ye khaskar aapko hardik badhai…..

  14. मेरी थकान / दूर करे पत्नी की / एक मुस्कान नदी की धार / चुपचाप सहती / चपपू की मार . सभी हाइकु बहुत सुन्दर और विचारोत्तेजक हैं .संतोष कुमार जी को उनकी प्रथम पुस्तक हाइकु सुगंधा के प्रकाशन पर बहुत बहुत बधाई और शुभ कामनाएं. – सुरेन्द्र वर्मा

  15. अच्छे हाइकू
    बधाई एवं शुभकामना

  16. सन्तोष कुमार सिंह जी सभी हाइकू उम्दा और भावपूर्ण। बहुत अच्छा लगा। हे मेघ भाई /भू की फटी बिवाई /लगा दवाई। बाँटती फिरे /सुमनों की सुगंध /हवा निर्द्वन्द्व। बहुत बहुत बधाई।

  17. हे! मेघ भाई
    भू की फटी बिवाई
    लगा दवाई।

    बड़ा शहर
    मकान तो बहुत
    घर हैं थोड़े।
    सभी हाइकु बहुत पसंद आए, लेकिन ये दोनों बहुत भाए…|

  18. सभी हाइकु बहुत सुन्दर और सार्थक. यह ख़ास पसंद आया…

    बड़ा शहर
    मकान तो बहुत
    घर हैं थोड़े।

    शुभकामनाएँ.


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