Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 25, 2015

टूटा सितारा


1-सुनीता अग्रवाल

1

आई थी रात

यूँ ही बस मिलने

ठहर गई ।

2

दिखाई दिया

गुमनाम सितारा

टूटा  था  जब ।

3

टूटा  सितारा

फिर खो गया कहीं

किसी का  प्यारा

4

लेती आशीष

छू धरा के चरण

वट की जटा

5

हौले से ठेले

वट की छाँव डले

यादो के झूले ।

6

वर्षा के बाद

साफ़ हो गये  दिल

तने पे खुदे ।

-0-

2-कृष्णा वर्मा

1

धूप की नहीं

भावों की गर्माहट

जिलाए रिश्ते।

2

भावना– भीगा

जो हो आँखों का पानी

खिलते रिश्ते।

3

बल ना छल

समझ की आँच से

पकते रिश्ते।

4

ढेर फिज़ूल

निभाने से निभते

रिश्ते उसूल।

5

नाज़ुक कर्म

अटूट विश्वास ही

रिश्तों का मर्म।

6

टूटें जो रिश्ते

बन जुलाहा जोड़ो

धागे सायास।

7

रिश्तों के सिरे

निपुण जुलाहे– सा

जोड़ो बेगाँठ।

-0-


Responses

  1. सुनीता जी “वट की जटा” क्या बात !! बहुत खूब!!शुभकामनायें।

    कृष्णा जी ” समझ की आँच से ” वाह बेहतरीन अभिव्यक्ति! बधाई !!

  2. रिश्तों के सिरे
    निपुण जुलाहे– सा
    जोड़ो बेगाँठ।…कृष्णा वर्मा

    टूटा सितारा
    फिर खो गया कहीं
    किसी का प्यारा ।…सुनीता अग्रवाल
    बहुत अच्छे हाइकु …बधाई व शुभकामनाएँ ।

  3. आई थी रात
    यूँ ही बस मिलने
    ठहर गई …………bahut badhiya!

  4. bahut khoobasoorat haiku sabhi …donon rachanaakaaron ko haardik badhaii !

  5. रिश्तो के सिरे ,बल न छल सुन्दर हाइकु बधाई आदरणीय कृष्णा वर्मा जी
    संपादक मंडल का हार्दिक आभार मेरी रचनाओ को स्थान देने के लिए एवं आदरणीया पूर्णिमा जी ,सरस्वती माथुर दी ज्योत्स्ना जी का हार्दिक आभार उत्साह बढाने के लिए 🙂

  6. सुनिता जी बहुत अच्छे हाइकु।
    टूटा सितारा
    फिर खो गया कहीं
    किसी का प्यारा।

    कृष्णा जी भावपूर्ण हाइकु अच्छे लगे

    टूटें जो रिश्ते
    बन जुलाहा जोड़ो
    धागे सायास।

    दोनों रचनाकारों को बधाई।

  7. tuta sitara\ phir kho gaya kahin\ kisi ka pyara.bal na chhal \samajh ki anch se\ pakate rishte .sunita ji va krishna ji sunder rachnaon ke liye badhai.
    pushpa mehra.

  8. सभी हाइकु एक से बढ़कर एक हैं
    बधाई .

  9. सुनीता जी मार्मिक है सितारों की दास्ताँ ,टूटे तारे के बिछुड़ने की।यह अच्छा लगा… हौले से ठेले /वट की छाव डले /यादों के झूले। बधाई।
    कृष्णा वर्मा जी आपके हाईकु भी अच्छे लगे विशेषकर। … नाजुक कर्म /अटूट विश्वास ही /रिश्तों का मर्म। बधाई ।

  10. आई थी रात
    यूँ ही बस मिलने
    ठहर गई ।
    धूप की नहीं
    भावों की गर्माहट
    जिलाए रिश्ते।

    sunder bhav badhai aapdono ko
    rachana

  11. सुनीता जी ,
    आयी थी रात
    बस यूं ही मिलने
    ठहर गयी
    बहुत सुन्दर भाव हैं | ग़मों की रातों का दृश्य है |
    कृष्णा जी आपके भी सभी हाइकु रिश्तों को जोड़ते और उनका मर्म समझा रहें हैं | आप दोनों को बधाई |

  12. टूटा सितारा
    फिर खो गया कहीं
    किसी का प्यारा।
    bahut bhavuk kar diya is haiku ne…

    लेती आशीष
    छू धरा के चरण
    वट की जटा।
    gahan abhivaykti meri dher saari badhai..

    धूप की नहीं
    भावों की गर्माहट
    जिलाए रिश्ते।

    sundar abhivaykti…bahut bahut badhai…

  13. टूटा सितारा
    फिर खो गया कहीं
    किसी का प्यारा।

    लेती आशीष
    छू धरा के चरण
    वट की जटा।……बहुत सुन्दर हाइकु…सुनीता जी हार्दिक बधाई।

  14. सुन्दर एवं सार्थक रचनाएँ
    बधाई एवं शुभकामनायें

  15. बहुत सुन्दर हाइकु…हार्दिक बधाई…|


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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