Posted by: डॉ. हरदीप संधु | सितम्बर 24, 2015

उदास घर।


1–डॉ•भावना कुँअर

बी-11

नींव में दबे

छोटे हाथों के बल

तो बना घर।

2

सलौना लगा

सपने ओढ़े बैठा

मिला जो घर।

3

खिची दीवारें

बिलख कर रोया

मासूम घर।

4

छूटा है घर

उड़ते थे जिसमें

फैलाए पर।

5

कैसे अटकी

सपनो की चूनर?

पूछे है घर

6

सीली दीवारें

अपना पल्लू झारें

चुप है घर।

7

वो जब आए

खुशबू नहाया -सा

खिला था घर।

8

रँगा पुता था

बरखा ने धो डाला

उदास घर।

9

करे प्रतीक्षा

लौटा न कभी कोई

बुढ़ाया घर।

10

बोलियाँ लगीं

पल में छिन गया

मेरा वो घर।

-0-

2-प्रियंका गुप्ता

1

ओक में भोर

पी लूँ तो जाग जाऊँ

फिर नींद से ।

2

बहती रही

आकाश से चाँदनी

प्यासी है धरा ।

3

हारता क्यों है?

जीतेगा हर जंग

लड़ तो ज़रा ।

4

मुट्ठी में क़ैद

तक़दीर हमारी

लिखी खुद ही ।

5

थाम ले हाथ

पर्वत औ‘ खाइयाँ

चल लाँघ लें

6

गुनगुना लूँ

किसी भूले गीत-सा

लौट आ कभी ।

-0-

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Responses

  1. करे प्रतीक्षा
    लौटा न कभी कोई
    बुढ़ाया घर। भावना जी, बहुत मर्म दिया इस हाइकु ने | सभी हाइकु में एक दर्द छिपा है | बधाई आपको |

    ओक में भोर
    पी लूँ तो जाग जाऊँ
    फिर नींद से ।
    2
    बहती रही
    आकाश से चाँदनी
    प्यासी है धरा ।

    प्रियंका जी, सुंदर शब्दों में सुंदर दृश्य चित्र | बधाई आपको |

  2. सभी हाइकु बहुत सुन्दर।बधाई!

  3. भावना जी बहुत अच्छे हाइकु आपके। बधाई
    कैसे अटकी
    सपनो की चूनर?
    पूछे है घर।

    प्रियंका जी बहुत अच्छे बिम्ब व भाव आपके हाइकु में।बधाई।

    ओक में भोर
    पी लूँ तो जाग जाऊँ
    फिर नींद से ।

  4. Hridaysparshi!
    खिची दीवारें
    बिलख कर रोया
    मासूम घर।

  5. सभी हाइकु बेहतरीन हैं / बहुत अच्छे लगे । भावना जी और प्रियंका जी को बधाई और शुभकामनाएं !

  6. सुन्दर हाइकू….. भावना जी एवं प्रियंका जी…..

    गहरे भाव मन को छू गए।

    बधाई

  7. सभी दिल को छु देने वाली रचनाएं .
    सभी को बधाई

  8. बहुत सुन्दर हाइकु | हार्दिक बधाई …

  9. छूटा है घर,खिंची दीवार ,ओक में भोर बाकि भी सभी मन को छूने वाले हाइकु बधाई भावना जी प्रियंका जी 🙂


  10. छूटा है घर
    उड़ते थे जिसमें
    फैलाए पर।

    गुनगुना लूँ
    किसी भूले गीत सा
    लौट आ कभी।
    बहुत सुंदर हाइकु …. आप दोनो रचनाकारों को बधाई।

  11. सुन्दर हाइकु सभी …

    छूटा है घर ,सीली दीवारें ,ओक में भोर बहुत अच्छे लगे !
    दोनों हाइकुकारों को बहुत बधाई !

  12. बरखा ने धो डाला
    उदास घर … bahut sundar kalpana

    ओक में भोर
    पी लूँ तो जाग जाऊँ
    फिर नींद से .. adbhut

  13. bahut bahut aabhar aap sabhi ka mere hav aap tak pahuche…

  14. सीली दीवारें
    अपना पल्लू झारें
    चुप है घर।

    ओक में भोर
    पी लूँ तो जाग जाऊँ
    फिर नींद से ।
    sundar bimb evam bhaavo ko sanjoye manmohak haiku bhawna ji evam priyanka ji ko bahut -bahut badhai !


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