Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 17, 2015

1472-मन सीपियाँ खुलीं


1-अनिता मंडा

1

हरित दूर्वा

पैरों के नीचे रही

हर्ष से भरी।

2

पिता का साया

पाकर बचपन

खिलखिलाया।

3

दिखी सदियाँ

चाँद के आईने में

खोले अखियाँ

4

रण भी मेरा

सारथी भी मैं ही हूँ

होगा सवेरा।

5

छाई है ज्योति

मन -सीपियाँ खुलीं

बिखरे मोती।

6

समझा कौन

हिय ने हमारे क्यों?

साधा है मौन!

7

किश्ती अपनी

लहरों के हवाले

उपरवाले!

-0-

2-सौरभ चतुर्वेदी

1

उजड़े वन

उजड़ा भू-सौन्दर्य

उखड़े मन ।

2

कटी डालियाँ

हुआ सारा संसार

छाया-विहीन ।

3

दीवारें-छतें

बनाती हैं मकान

घर को नहीं |

4

अकेला मन

सँजोता है सपने

जीवन भर ।

5

अकेलापन

देता है अब मुझे

अपनापन ।

6

बिखरे नीड़

ओझल हरीतिमा

फैलता धुआँ |

7

बूढ़े माँ-बाप

दूर तक खोजते

कोई सहारा ।

8

नहीं गवारा

अन्धे की लाठी होना

सब बेगाना ।

9

देखते रहो

सपने हैं अपने

बढ़ते रहो ।

10

भागता तन

खोजे सर्वत्र शान्ति

व्यथित मन ।

11

कष्टों से दूर

ख़ुशहाली से भरा

माँ का आँचल

-0-

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Responses

  1. अनिता मंडा जी के हाइकु “हरित दूर्वा… ” व “छाई है ज्योति… ” तथा सौरभ चतुर्वेदी जी के हाइकु “उजड़े वन… ” व “बिखरे नीड़… ” बहुत सुंदर! दोनों कवियों को शुभकामनाएँ!
    – डॉ. कुंँवर दिनेश, शिमला

  2. एक से एक सुन्दर हाइकु…..अनीता जी, सौरभ जी हार्दिक बधाई।

  3. sabhi haiku achhe hain dono ko hardik badhai…

  4. अति सुन्दर हाइकू अनीता जी एवम् सौरभ जी।

    बहुत बहुत बधाई

  5. ये सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे । अनीता जी एवम् सौरभ जी : बधाई और शुभकामनाएं !

  6. bahut sundar haiku ,,donon rachanaakaaron ko bahut badhaii

  7. सभी हाइकु बहुत सुंदर एवं भावपूर्ण!
    हार्दिक बधाई अनीता मण्डा जी एवं श्री सौरभ चतुर्वेदी जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  8. मेरे लेखन को सराहने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद । हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ ।
    ~ सौरभ चतुर्वेदी

  9. sabhi haiku pyare hai !donon rachnakaron ko bahut -bahut badhai !

  10. अकेला मन
    सँजोता है सपने
    जीवन भर ।

    समझा कौन
    हिय ने हमारे क्यों?
    साधा है मौन!
    bahut sunder haiku
    badhai
    rachana

  11. अनीता जी ,किश्ती अपनी /लहरों के हवाले /ऊपर वाले ,बहुत सारगर्भित हाइकू है |सौरभ जी आप को भी हार्दिक बधाई |

  12. ज़िंदगी के अलग-अलग पहलुओं को दर्शाते सार्थक और सुन्दर हाइकु के लिए आप दोनों को बहुत बधाई…|

  13. Sundar haiku! Badhaai!

  14. सभी की सुंदर प्रस्तुति .
    बधाई

  15. रण भी मेरा
    सारथी भी मैं ही हूँ
    होगा सवेरा। अनीता जी विश्वास से ओतप्रोत यह हाइकु भा गया , सभी अन्य सुन्दर | बधाई

    दीवारें-छतें
    बनाती हैं मकान
    घर को नहीं | सौरभ जी , बहुत गहरी बात | आप को बधाई

  16. भावपूर्ण हाइकु बहुत अच्छे लगे?बधाई दोनों रचनाकारों को।

  17. सौरभ जी अति सुंदर हाइकु बधाई।
    मेरे हाइकु सराहने हेतु दिल से आभार।


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