Posted by: डॉ. हरदीप संधु | सितम्बर 9, 2015

कोरा कागज़


1-मंजूषा मन

मंजूषा 'मन'

मंजूषा ‘मन’

 1

यह जीवन

किस तरह बाँचूँ

कोरा कागज़।

2

मन कागज

छोड़ा दूर गगन

बना पतंग।

3

जीवन- गाथा

लिखी आँसू की स्याही

न बाँची  जाए। 3

4

है व्यर्थ कथा

उतरी कागज पे

टूटी कलम।

5

लिख दे मृत्यु

अंतिम सुनवाई

तोड़ कलम ।

.0-

नाम मंजूषा ‘मन

जन्मतिथि 9 सितम्बर 1973

जन्म स्थान सागर (म.प्र.)

पिता श्री प्रभुदयाल खरे,माता श्रीमती उषा खरे

शिक्षा समाज कार्य में स्नातकोत्तर

सम्प्रति अंबुजा सीमेंट फाउण्डेशन में कार्यक्रम अधिकारी (सामुदायिक विकास कार्यक्रम)

सम्पर्क मंजूषा दोशी,एल आईजी 63,   ए हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी

          जिला बलौदा बाजार,   छत्तीसगढ

 -0-

2-सविता अग्रवाल सवि

1

सहमे पेड़

तूफानों से कहते

हमें छोड़  दो

2

डालियाँ झुकीं

बहती धाराओं पे

पीने को पानी .

3

पीर पराई

बेदिल की  आँख में

नही समाई

4

नैनों का नीर

किसी को न दिखाना

पीते रहना

5

दुःख समझे

वही जो दुःख पाए

और क्या जाने

-0-

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Responses

  1. बहुत सुन्दर हाइकु हैं मंजूषा ‘मन’ जी ..वंदन-अभिनन्दन ! जन्मदिन की हार्दिक बधाई ,शुभकामनाएँ !
    बहुत भावपूर्ण हाइकु सविता जी ..बहुत-बहुत बधाई !

  2. मंजूषा जी का इस परिवार में हार्दिक स्वागत है ! आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ !

    सभी हाइकु सुंदर ! विशेषकर–

    मन कागज
    छोड़ा दूर गगन
    बना पतंग।

    नैनों का नीर
    किसी को न दिखाना
    पीते रहना।

    मंजूषा जी व सविता जी को बहुत बधाई!

    ~सादर
    अनिता ललित

  3. मंजूषा जी जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं | बढ़िया हाइकु की रचना पर बधाई |आपका इस परिवार में स्वागत है |
    भाई कम्बोज जी मेरे हाइकू को यहाँ स्थान देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद | इतने हाइकु कारों को पढने का अवसर मिलता है इसका श्रेय आपको और बहन हरदीप कौर जी को जाता है |

  4. जन्म दिन की बधाई
    उत्कृष्ट हाइकू

  5. सभी हाइकु सुन्दर। मंजूषा जी जन्मदिन की बहुत शुभकामनाएं।

  6. janmdin ki badhai..sabhi haiku achhe lage dono rachnakaron ko badhai…

  7. मंजूषा जी, हाइकु परिवार में आपका स्वागत है और सुंदर हाइकु सृजन के लिए बधाई |
    यह जीवन
    किस तरह बाँचूँ
    कोरा कागज़। यह हाइकु विशेष भाया |
    डालियाँ झुकीं
    बहती धाराओं पे
    पीने को पानी . , सविता जी, यह हाइकु बहुत सुन्दर है | बधाई आपको

  8. janmdivas par bahut saari shubhkaamnayen manjusha ji …sundar din par pyaari shuruvaat ……,khoobsurat haiku ke saath ,ye isi tarh bani rahe…savita ji aapko bhi haardik badhai sundar srajan ke liye !

  9. अच्छी रचना है।

  10. मंजूषा जी , हिंदी हाइकु लोक में आप का बहुत बहुत स्वागत है।
    जीवन के बारे में आप का दृष्टिकोण बढ़िया लगा। है – है व्यर्थ कथा /उतरी कागज पर /न बाँची जाये। पूरी कथा समझते समझते अंतिम सुनवाई – मृत्यु ही नजर आती है। सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई।
    सविता जी आप के हाइकु भी अच्छे लगे। जैसे , पीर पराई /बेदिल की आँख में /नही समाई। और यह भी अच्छा लगा – दुःख समझे /वही जो दुःख पाये /और क्या जाने। बधाई।

  11. आप सभी का बहुत बहुत आभार। आपने इस परिवार का हिस्सा बनाया। हमारे प्रयास को सराहा। आपके साथ और शुभ कामनाओं ने जन्मदिन और साहित्य रचना को और भी उत्साहपूर्ण कर दिया है। आशा है की ये साथ सदैव बना रहेगा।

    एक बार पुनः बहुत बहुत आभार

    मञ्जूषा “मन”

  12. बहुत सुन्दर हाइकु…हार्दिक बधाई…|


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