Posted by: डॉ. हरदीप संधु | सितम्बर 7, 2015

शैतान उलझनें


1-साहनी जी - Copy1-कमला निखुर्पा

 1

सखियाँ बनी

शैतान उलझनें

साथ ना छोड़ें ।

2

रोएँ- रुलाएँ

चिढ़ाके भाग जाएँ

यूँ उलझाएँ ।

3

बहुत हुई

अब कशमक

छोड़ो भी बस ।

4

कभी सुलझी

कभी उलझी रही

जीवन-डोर ।

-0-

2-डॉ ज्योत्स्ना शर्मा

1

रस्मों के गाँव

उलझ गए मेरे

भावों के पाँव ।

2

उलझे मिले-

लालच की चादर

रिश्तों के तार ।

3

किरन सखी

खोले है उलझन

नन्ही कली की ।

4

प्रेम की डोर

उलझा मन ,जाए-

तेरी ही ओर !

-0-

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Responses

  1. जीवन में उलझने ही उलझनें हैं ।इन के बिना जीवन का मज़ा ही किरकिरा हो जाये गा तभी तो हर रूप में हमारेसाथ जुड़ी हुई हैं कमला निखुर्पा जी ने खूब कहा …सखियाँ बनी/शैतान उलझने/साथ न छोड़ें।और ज्योत्सना जी को तो रस्मों के गाँव ने ही उलझा लिया … बहुत अच्छे लगे आज के हाइकु यह और भी अच्छा लगा… किरण सखि/खोलती उलझन नन्ही कली की बहुत बहुत बधाई।आप दोनों रचनाकारों को।

  2. सुकेश साहनी की फोटो और उस पर लिखा हाइकु भी बहुत अच्छा लगा ।हाइकुयों की सुन्दरता बड़ गई इस से ।

  3. रस्मों के गाँव
    उलझ गए मेरे
    भावों के पाँव ।

    कभी सुलझी
    कभी उलझी रही
    जीवन-डोर ।

    bahut khub kha bahut bahut badhai…haiga bhi bahut achha hai chtr sahit bahut bahut badhai sabhi ko…

  4. कभी सुलझी
    कभी उलझी रही
    जीवन-डोर ।
    रस्मों के गाँव
    उलझ गए मेरे
    भावों के पाँव । bahut khoob ! “chumen ambar” ne bhaav -vibhor kar diya ..photo bhi shaandaar !aap sabhi ko hridy -tal se badhai !

  5. रस्मों के गाँव
    उलझ गए मेरे
    भावों के पाँव ।

    कभी सुलझी
    कभी उलझी रही
    जीवन-डोर ।

    बहुत ही सुन्दर हाइकु और हाइगा…आप सबको हार्दिक बधाई।

  6. उलझने तो जैसे ज़िंदगी का एक अभिन्न हिस्सा होती हैं…| बहुत सार्थक हाइकु हैं सभी…हार्दिक बधाई…|

  7. सुंदर भाव पूर्ण हाइगा और शैतान उलझने ,जीवन डोर ..अनुपम हाइकु कमला जी , भैया जी हार्दिक बधाई

    सादर नमन !

    मुझे यहाँ स्थान देकर एवं प्रेरक कमेन्टस कर मेरा उत्साह वर्धन करने हेतु भी बहुत आभार !

  8. बहुत सुंदर हाइगा। कमला जी, ज्योत्स्ना जी भावपूर्ण हाइकु।

    किरन सखी
    खोले है उलझन
    नन्ही कली की ।
    बहुत अच्छा लगा,सुरज की किरणों का संग पाकर
    कलियों के उलझन छोड़कर खिलने का बिम्ब आँखों के
    सामने उभर रहा है। बहुत सकारात्मक और उम्दा कल्पना
    के लिए हार्दिक बधाई।

  9. kamboj bhai ji ka haiga jeevant jeevan ke utkrishhT manobhavon ka chitrankan karata hua hridaygrahi hai.sunder ! janm se her pag par uljhane sulajhate haiku bimb pradhan man ko kahin prerana de rahe hain to kahin m
    an ko ulajha rahe hain . sabhi haiku bahut sunder hain. sabhi ko badhai.
    pushpa mehra.

  10. सखियाँ बनी
    शैतान उलझनें
    साथ ना छोड़ें ।

    रस्मों के गाँव
    उलझ गए मेरे
    भावों के पाँव ।

    vaah sbhi sundr mnobhaav lge .
    aap donon ko badhai .

  11. भाई काम्बोज जी सुन्दर हाइगा रचा है |कमला जी जीवन एक उलझन ही तो है हर रोज़ एक एक कर सुलझाते रहना पड़ता है |बहुत खूब लिखा है हार्दिक बधाई |ज्योत्सना जी आपको भी हार्दिक बधाई इसी तरह लिखती रहें आप यही कामना है |

  12. बहुत ख़ूबसूरत हाइगा !
    हार्दिक बधाई… आदरणीय हिमांशु भैया जी एवं सुकेश साहनी सर !!!

    अतिसुन्दर, भावपूर्ण हाइकु- सखियाँ बनीं…, रोएँ रुलाएँ…, भावों के पाँव…, रिश्तों के तार…, प्रेम की डोर… सभी ही बहुत-बहुत प्यारे!
    हार्दिक बधाई… कमला जी एवं ज्योत्स्ना जी !!!

    ~सादर
    अनिता ललित

  13. सुन्दर भावपूर्ण हाइगा ने पैतृक गाँव की याद दिला दी |

    किरन सखी
    खोले है उलझन
    नन्ही कली की । हाइकु ने दिल जीत लिया |

  14. सुंदर हाइगा भाई जी! ऐसा प्रतीत हो रहा है कि शब्द तस्वीर के भीतर से ही गूँजायमान हो रहे हैं।


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