Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 23, 2015

लो ! जागे हम ।


1-पुष्पा मेहरा

1

आया सावन

धरा की सूनी गोद

भरने लगी।

2

उड़ी जा रहीं

बादलों सी उमंगें

ओर न छोर ।

3

घटा श्रावणी

नभ में पड़े झूले

पेंग बढ़ाते ।

4

धीरे-धीरे से

खोलने लगा नल

नीला गगन ।

5

सोये अंकुर

मुँह उठा के बोले-

लो ! जागे हम ।

6

उजली भोर

बाल रवि चमका

नहाया – धोया ।

7

छलक पड़े

सतरंगी सपने

नन्ही बूँदों के ।

8

आवारा घन

मौक़े-बेमौक़े छाते

हैं मनमौजी ।

9

ओ रे ! बादल

तूने तो छीना सुख

बचा – जो शेष ।

-0-

2-कमला घटाऔरा

1

ठूँठ हूँ तो क्या

जो झरा होगा हरा

विश्वास घना।

2

लेती आसरा

पतझड़ -बहार

मेरे अँगना।

3

यादों की थाती

काम न होगी कभी

स्नेह लुटाती।

-0-

3-अमन चाँदपुरी

1

है काली रात

लगा रहा है प्रेमी

चाँद को हाथ।

2

चिटकी धरा

बरसती किरन

सूर्य का मन।

Advertisements

Responses

  1. पुष्पा जी सभी हाइकु बहुत अच्छे लिखे हैं विशेषकर धीरे धीरे से /खोलने लगा नल /नीला गगन |कमला जी आपको भी और अमन जी को भी इतने भाव पूर्ण हाइकु रचने पर बधाई |

  2. पुष्पा जी सभी हाइकु अच्छे लगे। विशेष
    उजली भोर
    बाल रवि चमका
    नहाया – धोया ।

    कमला जी अच्छे हाइकु।

    ठूँठ हूँ तो क्या
    जो झरा होगा हरा
    विश्वास घना।
    बहुत अच्छा लगा।

    अमन जी आपके हाइकु भी अच्छे लगे
    सभी को बधाई।

  3. आया सावन/ धरा की सूनी गोद/
    भरने लगी
    अच्छे हाइकु हाइकुकारों को बधाई

  4. पुष्पा मेहरा जी सभी हाइकु सुन्दर लगे ।बहुत भाया … सोये अंकुर / मुँह उठा के बोले / लो जागे हम तथा … बाल रवि चमका नहाया धोया ।हार्दिक वधाई । चाँद पुरी जी आप के हाइकु भी अच्छे लगे ।सम्पादक द्वय का बहुत बहुत आभार मुझे हिन्दी हाइकु में स्थान देने के लिये।
    कृपया पाठकगण मेरे हाइकु मे एक शब्द गल्त लिखा गया है वह कम की जगह काम लिखा गया है टाइप की वजह से क्षमा चाहती हूँ ।

  5. सभी हाइकु बेहतरीन हैं / बहुत अच्छे लगे । पुष्पा मेहरा जी, कमला घटाऔरा जी और अमन चाँदपुरी जी को बधाई और शुभकामनाएं !

  6. utkrisht sbhi haaiku
    sbhi ko badhai

  7. सोए अंकुर , बाल रवि , ठूँठ हूँ तो क्या …बहुत सुन्दर हाइकु !
    पुष्पा जी , कमला जी एवं अमन जी को हार्दिक बधाई !

  8. sabhi haiuku bahut pasand aaye meri hardik badhai…

  9. leti asara \ patajhad- bahar\ mere angan.sunder haikui.aman ji apke haiku bhi achhe lage kamla va aman ji ap dono ko badhai .
    pushpa mehra.

  10. सभी हाइकु बेहतरीन….सभी रचनाकारों को बहुत बधाई!

  11. सोये अंकुर
    मुँह उठा के बोले-
    लो ! जागे हम ।
    बहुत सुन्दर…|

    ठूँठ हूँ तो क्या
    जो झरा होगा हरा
    विश्वास घना।
    प्रेरक…|

    आप दोनों को हार्दिक बधाई…|
    अमन जी…आपके दोनों हाइकु भी बहुत अच्छे लगे…बधाई…|

  12. आया सावन
    धरा की सूनी गोद
    भरने लगी।
    ठूँठ हूँ तो क्या
    जो झरा होगा हरा
    विश्वास घना।bahut pyare haiku hai …pushpa ji ,kamla ji evam aman ji ko haardik badhai .

  13. सभी हाइकु बहुत सुंदर! विशेषकर-
    सोये अंकुर
    मुँह उठा के बोले-
    लो ! जागे हम ।

    उजली भोर
    बाल रवि चमका
    नहाया – धोया ।

    ठूँठ हूँ तो क्या
    जो झरा होगा हरा
    विश्वास घना।

    सभी हाइकुकारों को बहुत बधाई !

    ~सादर
    अनिता ललित


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: