Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 18, 2015

पूजे है मन


[डॉ भावना कुँअर किसी परिचय की मोहताज़ नहीं हैं। डॉ सुधा गुप्ता जी की परम्परा में यह युवा रचनाकार 2007 में अपने हाइकु-संग्रह ‘तारों की चूनर’से चर्चा में आई। इनके इस हाइकु-संग्रह पर केन्द्रीय विद्यालय संगठन ( मानव संसाधन मन्त्रालय के अधीन) के हिन्दी -प्रवक्ता  ( देहरादून,दिल्ली, जम्मू, कोलकाता एवं लखनऊ सम्भाग)  के सेमिनार में  केन्द्रीय विद्यालय नं 2 आगरा में इस संग्रह पर चर्चा हुई। इस पुस्तक की समीक्षा ( 09 जून-20जून, 2008) में प्रकाशित हुई। संगठन ने उसी समीक्षा को अपनी पत्रिका संगम में प्रकाशित किया। बाद में अभिव्यक्ति ने भी इस पुस्तक की समीक्षा प्रकाशित की। आपका दूसरा हाइकु-संग्रह 2012 में तथा प्रथम सेदोका संग्रह मार्च ,2015 में प्रकाशित हुआ।आपने पूर्व प्रकाशित 8 रचनाकारों के 29 हाइकु की जुगलबन्दी रची है। यह भावना कुँअर की हम सबके प्रति गहन आत्मीयता  है। हिन्दी में हाइकु की जुगलबन्दी को शुरू करने का श्रेय डॉ भावना कुँअर और डॉ हरदीप सन्धु को जाता है। मुझे हाइकु के मैदान में उतारने का प्रमुख काम भी इन्हीं दोनों का है। इस कार्य के लिए मेरा विनम्र अभिवादन एवं स्नेह-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ ]

21-जुलाई 11-30-0-

1-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

1

फासले रहे

कुछ मन ने कहा

मिटी दूरियाँ।

2

ऊँची उड़ान

छू आई आसमान

भावों की डार।

*

1-भावना कुँअर

1

प्रेम सघन

तो क्या पास,क्या दूर

पूजे है मन।

2         

दोस्ती की चाह

बढ़ाए जो कदम

पा गए राह।

-0-

2-हरकीरत हीर

1

ढूँढ़ते हम

आशियाँ कोई नया

दे दे जगह।

2

बड़े सुंदर

गुटर –गूँगुटर

तेरे दो पर।

*

2-भावना कुँअर

1

मिले हैं आज

बनेगा आशियाँ भी

झूमेगा प्यार।

2

प्रेम संदेशे

ले के जायेंगे हम

हवा के संग।

*

3-भावना सक्सैना

1

सदा दुलार

जहाँ पायें, ठहरे

पंछी युगल।

2

मीठी मुस्कान

ममता –अपनत्व

बाँधे सभी को।

3

दूरी नापो

दूर होते हुए भी

साथ हैं हम 

4

तेरा आशियाँ

भोलेपन से सजा

लगता भला।

5

आस का पंछी

बसे सदा मन में

पर फैलाए।

6

मित्र पखेरू !

मुँह फेर बैठे क्यों?

क्या अनबन!

7

मन पखेरू

हर कण में बस

श्याम को टोहे।

*

3-भावना कुँअर

1

प्यार की भाषा

बिना कहे समझें

कैसे तराशा?

2

प्रेम का नाता

बड़ा ही अनमोल

सबको भाता।

3

मन जो उड़ा

ठहरा तेरे पास

कैसा प्रवास।

4

महक गया

मेरा ये आशियाना

तुझे जो पाया।

5

आस पे टिके

सपनों के घरौंदे

कोई रौंदे।

6

पास तो आएँ

कुछ कहें,सुनें भी

ख़्वाब सजाएँ।

7

पा लिया मन

पूरी हुई तलाश

नव जीवन।

*

4-सुदर्शन रत्नाकर

1

निरीह प्राणी

मूक हैं निहारते

प्यार के भूखे 

*

4-भावना कुँअर

1

प्यार पाकर

अपना बन जाते

रिश्ता निभाते।

*

5-सुशीला शिवराण

1

पंछी प्यारे

ला प्रेम संदेसवा

हमरे द्वारे

2

हरकारे

ला नेह की चिठिया

बाँचे नैना रे    

*

5-भावना कुँअर

1

पंछी जो आया

पाकर प्रेम वो भी

लौट पाया।

2

स्नेह पगी वो

चिट्ठी जब मिली थी

बाँछे खिली थी।

*

6-अनिता मण्डा

1

सुनाये गीत

कबूतरों का जोड़ा

गुटरगूँ के।

2

निश्छल आँखें

पाने को तेरा प्यार

समेटी पाँखें।

3

तोड़ा गया

पिंजरा प्यार वाला

मोह के बंदी।

4

तुम्हीं आकाश

तुम्हीं मेरी उड़ान

जाऊँ भी कहाँ?

5

कौनसी बोली

रस भर के बोली

पंछी बता रे!

6

बनाने नीड़

पंछी ढूँढते ठौर

लगाओ पेड़।

7

पंछी ठगोरे

प्रीत का चुग्गा चुग

उड़ें निगोड़े।

8

महक उड़ी

हाइकु बगिया से

रसभीनीसी।

9

फैला उजाला

हाइकु किरणों से

हुआ सवेरा।

10

हाइकु पंछी

चहके एक साथ

टूटा सन्नाटा।

*

6-भावना कुँअर

1

गीत मिठास

है बसी मन ऐसे

मिटी है प्यास।

2

आँखों अंदर

हिलौरे मारे प्रेम

ज्यूँ समंदर।

3

प्रेम के पाश

लगते बड़े प्यारे

होते हैं खास।

4

प्रेम का घन

बना मेरा जीवन

गहन वन।

5

छू गई मन

प्रेम भरी ये बोली

पंछी ने बोली।

6

लगेगा फिर

पेड़ों की डालों पर

सुरों का मेला।

7

ले गए मन

अँधेरी गलियों में

भटके तन।

8

हाइकु कली

नन्हीं थी कभी,अब

फूल सी खिली।

9

हाइकु बैठा

साहित्य  की अटारी

खोले पिटारी।

10

भावों का  मेला

रहेगा हाइकु

अब अकेला।

*

7-कमल कपूर

1

लागे मोल

सुनते तेरे बोल

ये अनमोल

2

मैं पाखी होती

ले परों पे डोलती

तीनों जहान।

3

नभ ये सारा

नाप डाला पंछियो !

नन्हे परों से

4

हो जा  स्वतंत्र

तोड़ पिंजरे सारे

  पंछी प्यारे।

*

7-भावना कुँअर

1

मीठे ये बोल

है वादियों में कौन

रहा जो घोल?

2

अगले जन्म

पाखी बन डोलूँगी

मुँह खोलूँगी।

3

डट के खड़े

मजबूत इरादे

आगे ही बढ़े।

4

तोड़ पाए

मजबूत दीवारें

फिर भी गाए।

*

8-कोमल सेमड़वाल

1

अजर मोह

पिरोए संग रहूँ

बन्ध तुझसे 

*

8-भावना कुँअर

1

मोह का धागा

खूब कस के बाँधा

आत्मा के संग।

-0-

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Responses

  1. लाज़वाब भावना जी

  2. बहुत सुन्दर जुगबन्दी!

  3. बेहतरीन जुगलबंदी। तारीफ़ किसकी करूँ, सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे । सभी रचनाकारों को बधाई और शुभकामनाएं !

  4. नि:शब्द कर दिया इस जुगलबंदी ने | नये हाइकुकारों के लिए एक नया पृष्ठ खुला | बधाई भावना जी |

    सस्नेह,
    शशि पाधा

  5. बेहतरीन जुगलबंदी। सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे। बधाई भावना जी!!!!

  6. वाह भावना जी ,बहुत सुन्दर .

  7. पूज्या बहिन जी,
    आपको हार्दिक बधाई |
    विनम्र प्रणाम |

  8. लाजवाब जुगलबंदी डॉ. भावना।

  9. बहुत श्रम व धैर्य से की गयी जुगलबन्दी डॉ. भावना। भाव व रस से परिपूर्ण।

  10. कमाल की जुगलबंदी भावना जी…. हार्दिक बधाई!

  11. aap sabka tahe dil se aabhar…aapka sneh hi to meri lekhni ki takat hai,kamboj ji jaise sachhe ,achhe insaan saath hon to hamesha hi kuchh naya karne ka man karta hai,kamboj ji hi aise vaykti hain jo logon ki kamyabi se khush hote or unko aage badhne ki prerna dete hain varna aajkal to apne hi apnon ko kaatte hain, kamboj ji ka bhi tahe dil se aabhar unka sb par yun hi sneh bana rahe yahi dua hai…

  12. kamaal ki jugalbndi jivn ke aayaamon ko chuti hui .
    sabhi ko badhaai

  13. Bahut sunder likha hai aapko Bahut Bahut badhai aap sads hi sunder likhti hai
    Punah badhai
    Rachana

  14. bahut sunder jugalbandi bhawna ji badhai.
    pushpa mehra

  15. बहुत सुंदर जुगलबंदी !
    हार्दिक बधाई डॉ. भावना कुँवर जी!

    निश्चित रूप से सभी हाइकुकारों के हाइकु भी बहुत अच्छे हैं, तभी तो भावना जी ने उन्हें चुनकर जुगलबंदी की है!

    आप सभी को ढेरों बधाई!!!

    ~सादर
    अनिता ललित

  16. अनुपम प्रस्तुति !
    समर्थ हाइकुकारों के सुन्दर ,सारगर्भित हाइकुओं पर भावना जी की बहुत प्रभावी जुगलबंदी !
    आपकी रचनाएँ हमें नित नया सीखने का मार्ग प्रशस्त करती हैं हृदय से धन्यवाद एवं बधाई !

  17. मनभावन…अत्युत्तम…मेरी हार्दिक बधाई…

  18. bhawna ji kamaal kar diya aapne !….utkrisht haikuo par utkrisht jugalbandi……badhai dil se .


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