Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अगस्त 14, 2015

उड़ान


कल सुबह अनायास एक छोटी -सी घटना -कबूतरों की भाव-भंगिमा  -हाइकु -आयोजन का निमित्त बन गई। सभी साथियों की सर्जन-धर्मिता  हाइकु की प्रगति के लिए आश्वस्त करती है।

सम्पादक द्वय

-0-

1-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

छाया: रामेश्वर काम्बोज
छाया: रामेश्वर काम्बोज

1

फासले रहे

कुछ मन ने कहा

मिटी दूरियाँ।

2

ऊँची उड़ान

छू आई आसमान

भावों की डार।

-0-

2-हरकीरत हीर

1

ढूँढ़ते हम

आशियाँ कोई नया

दे दे जगह।

2

बड़े सुंदर

गुटर -गूँ -गुटर

तेरे दो पर।

-0-

3-भावना सक्सैना

1

सदा दुलार

जहाँ पायें, ठहरे

पंछी युगल।

2

मीठी मुस्कान

ममता -अपनत्व

बाँधे सभी को।

3

दूरी न नापो

दूर होते हुए भी

साथ हैं हम

4

तेरा आशियाँ

भोलेपन से सजा

लगता भला।

5

आस का पंछी

बसे सदा मन में

पर फैलाए।

छाया: रामेश्वर काम्बोज

छाया: रामेश्वर काम्बोज

5

मित्र पखेरू !

मुँह फेर बैठे क्यों?

क्या अनबन!

7

मन पखेरू

हर कण में बस

श्याम को टोहे।

-0-

4-सुदर्शन रत्नाकर

1

निरीह प्राणी

मूक हैं निहारते

प्यार के भूखे

-0-

5-सुशीला शिवराण

1

ओ पंछी प्यारे

ला प्रेम संदेसवा

हमरे द्वारे ।

2

ओ हरकारे

ला नेह की चिठिया

बाँचे नैना रे ।   

-0-

6-अनिता मण्डा

1

सुनाये गीत

कबूतरों का जोड़ा

गुटर-गूँ के।

2

निश्छल आँखें

पाने को तेरा प्यार

समेटी पाँखें।

3

तोड़ा न गया

पिंजरा प्यार वाला

मोह के बंदी।

4

तुम्हीं आकाश

तुम्हीं मेरी उड़ान

जाऊँ भी कहाँ?

5

कौन-सी बोली

रस भर के बोली

पंछी बता रे!

6

बनाने नीड़

पंछी ढूँढते ठौर

लगाओ पेड़।

7

पंछी ठगोरे

प्रीत का चुग्गा चुग

उड़ें निगोड़े।

8

महक उड़ी

हाइकु– बगिया से

रसभीनी-सी।

9

फैला उजाला

हाइकु किरणों से

हुआ सवेरा।

10

हाइकु पंछी

चहके एक साथ

टूटा सन्नाटा।

-0-

7-कमल कपूर

1

लागे न मोल

सुनते तेरे बोल

ये अनमोल ।

2

मैं पाखी होती

ले परों पे डोलती

तीनों जहान।

3

नभ ये सारा

नाप डाला पंछियो !

नन्हे परों से ।

4

हो जा  स्वतंत्र

तोड़ पिंजरे सारे

ओ  पंछी प्यारे।

-0-

8-कोमल सेमड़वाल

1

अजर मोह

पिरोए संग रहूँ

बन्ध तुझसे

-0-

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Responses

  1. हाइकु की इस उड़ान के साथ मन भी उड़ चला। सभी हाइकु बढ़िया। बधाई!!!

  2. उड़ाने भरते हुए हाईकु हैं सभी को हार्दिक बधाई.

  3. शब्दों से चित्र उकेरना, …सभी हाइकु चित्र को बहुत अच्छी तरह से ब्याँ कर रहे हैं….दृश्य और शब्दों का अद्भुद संगम…

  4. वाह वाह …बहुत ऊँची उड़ान है ! सभी की इस सृजन धर्मिता को बहुत बधाई ..नमन !

  5. bhaavon ki udaan bharte sbhi haaiku
    badhaai

  6. मूक पक्षी एवं सुंदर हाइकु दोनों ने मन मोह लिया ।सभी को बहुत बहुत बधाई।

  7. दो मूक चित्रों का कमाल…रचनाकारों ने गढ़ दिए हाइकु लाजवाब…आप सब की लेखनी को नमन!

  8. Panchhi pyaron ki kanahiya kahte haiku kamal hain
    Sabhi ko badhai
    Rachana

  9. kabootar ke jode ki bhaav- bhangimaa ko dekh kar likhe sabhi haiku bahut sunder hain. in dono chitron ko dekh kar mere man mein bhi kuchh bhav uthe jo is prakar hain;1.socho to sakhi\kahan dalaenge dera\ghar hain band.
    2. aao to chalen\ dhoondh len vo jagah \ pyaar ho jahaan. 3.kuchh bolo to\zaraa pankhon ko tolo \baithe na raho.
    pushpa mehra.

  10. एक पंछी युगल को देख कर कवि हृदयों ने शब्द चित्रों के इतने कबूतर उड़ाये कि सिर्फ दो पंछियों से पंछियों की डार उडने लगी ।एक चित्र पर इतनी सुन्दर रचना बांध सकती है तो सारी कुदरत पर की गई रचना तो खाना सोना भुला दे।सभी को हार्दिक वधाई ।
    सब ने इतना कुछ कहा तो मेरा मन भी मचलने लगा कुछ कहने को …
    पाखी न देख / नीचे इन्सानी घर/ नेह न वहाँ ।

  11. सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे। सभी रचनाकारों को बधाई और शुभकामनाएं !

  12. सोचा आज टिप्पणी कुछ हटके हो जाए तो जरा गौर फरमाइए-

    काम्बोज जी
    1
    फासले रहे
    कुछ मन ने कहा
    मिटी दूरियाँ।
    2
    ऊँची उड़ान
    छू आई आसमान
    भावों की डार।
    भावना कुँअर
    1
    प्रेम सघन
    तो क्या पास,क्या दूर
    पूजे है मन।
    2
    दोस्ती की चाह
    बढ़ाए जो कदम
    पा गए राह।
    2-हरकीरत ‘हीर’
    1
    ढूँढ़ते हम
    आशियाँ कोई नया
    दे दे जगह।
    2
    बड़े सुंदर
    गुटर -गूँ -गुटर
    तेरे दो पर।
    भावना कुँअर
    1
    मिले हैं आज
    बनेगा आशियाँ भी
    झूमेगा प्यार।
    2
    प्रेम संदेशे
    ले के जायेंगे हम
    हवा के संग।

    3-भावना सक्सैना
    1
    सदा दुलार
    जहाँ पायें, ठहरे
    पंछी युगल।
    2
    मीठी मुस्कान
    ममता -अपनत्व
    बाँधे सभी को।
    3
    दूरी न नापो
    दूर होते हुए भी
    साथ हैं हम ।
    4
    तेरा आशियाँ
    भोलेपन से सजा
    लगता भला।
    5
    आस का पंछी
    बसे सदा मन में
    पर फैलाए।
    6
    मित्र पखेरू !
    मुँह फेर बैठे क्यों?
    क्या अनबन!
    7
    मन पखेरू
    हर कण में बस
    श्याम को टोहे।
    भावना कुँअर
    1
    प्यार की भाषा
    बिना कहे समझें
    कैसे तराशा?
    2
    प्रेम का नाता
    बड़ा ही अनमोल
    सबको भाता।
    3
    मन जो उड़ा
    ठहरा तेरे पास
    कैसा प्रवास।
    4
    महक गया
    मेरा ये आशियाना
    तुझे जो पाया।
    5
    आस पे टिके
    सपनों के घरौंदे
    कोई न रौंदे।
    6
    पास तो आएँ
    कुछ कहें,सुनें भी
    ख़्वाब सजाएँ।
    7
    पा लिया मन
    पूरी हुई तलाश
    नव जीवन।

    4-सुदर्शन रत्नाकर
    1
    निरीह प्राणी
    मूक हैं निहारते
    प्यार के भूखे ।
    भावना कुँअर
    1
    प्यार पाकर
    अपना बन जाते
    रिश्ता निभाते।

    5-सुशीला शिवराण
    1
    ओ पंछी प्यारे
    ला प्रेम संदेसवा
    हमरे द्वारे ।
    2
    ओ हरकारे
    ला नेह की चिठिया
    बाँचे नैना रे ।
    भावना कुँअर
    1
    पंछी जो आया
    पाकर प्रेम वो भी
    लौट न पाया।

    2
    स्नेह पगी वो
    चिट्ठी जब मिली थी
    बाँछे खिली थी।

    6-अनिता मण्डा
    1
    सुनाये गीत
    कबूतरों का जोड़ा
    गुटर-गूँ के।
    2
    निश्छल आँखें
    पाने को तेरा प्यार
    समेटी पाँखें।
    3
    तोड़ा न गया
    पिंजरा प्यार वाला
    मोह के बंदी।
    4
    तुम्हीं आकाश
    तुम्हीं मेरी उड़ान
    जाऊँ भी कहाँ?
    5
    कौन-सी बोली
    रस भर के बोली
    पंछी बता रे!
    6
    बनाने नीड़
    पंछी ढूँढते ठौर
    लगाओ पेड़।
    7
    पंछी ठगोरे
    प्रीत का चुग्गा चुग
    उड़ें निगोड़े।
    8
    महक उड़ी
    हाइकु– बगिया से
    रसभीनी-सी।
    9
    फैला उजाला
    हाइकु किरणों से
    हुआ सवेरा।
    10
    हाइकु पंछी
    चहके एक साथ
    टूटा सन्नाटा।

    भावना कुँअर
    1
    गीत मिठास
    है बसी मन ऐसे
    मिटी है प्यास।
    2
    आँखों अंदर
    हिलौरे मारे प्रेम
    ज्यूँ समंदर।
    3
    प्रेम के पाश
    लगते बड़े प्यारे
    होते हैं खास।
    4
    प्रेम का घन
    बना मेरा जीवन
    गहन वन।
    5
    छू गई मन
    प्रेम भरी ये बोली
    पंछी ने बोली।
    6
    लगेगा फिर
    पेड़ों की डालों पर
    सुरों का मेला।
    7
    ले गए मन
    अँधेरी गलियों में
    भटके तन।
    8
    हाइकु कली
    नन्हीं थी कभी,अब
    फूल सी खिली।
    9
    हाइकु बैठा
    साहित्य की अटारी
    खोले पिटारी।
    10
    भावों का मेला
    रहेगा न हाइकु
    अब अकेला।
    7-कमल कपूर
    1
    लागे न मोल
    सुनते तेरे बोल
    ये अनमोल ।
    2
    मैं पाखी होती
    ले परों पे डोलती
    तीनों जहान।
    3
    नभ ये सारा
    नाप डाला पंछियो !
    नन्हे परों से ।
    4
    हो जा स्वतंत्र
    तोड़ पिंजरे सारे
    ओ पंछी प्यारे।
    भावना कुँअर
    1
    मीठे ये बोल
    है वादियों में कौन
    रहा जो घोल?
    2
    अगले जन्म
    पाखी बन डोलूँगी
    मुँह खोलूँगी।
    3
    डट के खड़े
    मजबूत इरादे
    आगे ही बढ़े।
    4
    तोड़ न पाए
    मजबूत दीवारें
    फिर भी गाए।

    8-कोमल सेमड़वाल
    1
    अजर मोह
    पिरोए संग रहूँ
    बन्ध तुझसे ।

    भावना कुँअर
    1
    मोह का धागा
    आत्मा के संग,खूब
    कस के बाँधा।

  13. यहाँ तो नई ऊँचाई तक उड़ान भरते हाइकु मिले और उस पर भावना जी का ये सुन्दर सार्थक प्रयास…आप सबके साथ साथ भावना जी को भी बहुत बधाई…उनकी इस मेहनत और हाइकु के प्रति उनके इस समर्पण के लिए…|

  14. eak se badkar eak ! kalpna ki oonchaiyon ko chute haiku saath hi bhawna ji ka naya saarthak v sunder prayog..aap sabhi ko hridy tal se badhai .


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