Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 10, 2015

लजाई धरा


1-कमला निखुर्पा
1
है सद्यस्नाता
भीगी -सी चुनरिया
लजाई धरा ।
2
फुलसुँघनी
नाचे फूलों के संग
भँवरा दंग ।
3
मेघ गरजा
डरा छुपके बैठा
सूरज बाबा।
4
बैरी बदरा
करे चन्दा को ओट
रोई चकोर।
5
जुड़वाँ नैन
ले सपनों के पंख
उड़ने चले।
-0-
2-अनिता मंडा-
1
प्रवासी पंछी
ले गए नीली झील
बस आँखों में।
2
दर्द जमा है
खामोश-सी झील में
गुम लहरें।
3
ठहरी झील
तोड़कर किनारे
बहना चाहे।
4
नभ क्यों छीना
उड़नें के सपनें
देखे थे मैंने।
5
तनी भृकुटी
दायरों से बाहर
रखे जो पग।
-0-

3-गुंजन अग्रवाल
1
शिल्पी सावन
मन में उकेरता
मिलन- चित्र ।
2
बरखा बूँद
खेतों में रचे छंद
बाली में गूँथ ।
3
पगली हवा
ढो लाती काँधे पर
गंध तुम्हारी ।
4
कोई न सानी
तुम से तुम तक
मेरी कहानी ।
5
तम से जूझा
रात भर जुगनू
ले आया भोर
6
कौंधी बिजली
सहम गई सभी
अट्टालिकाएँ ।
-0-

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Responses

  1. बहुत खूब।

  2. Sabhi haiku bhavpurn bahut bahut badhai…

  3. कमला जी, अनिता जी और गुंजन जी आप तीनों को बधाई |सभी हाइकू की सुन्दर रचना है |विशेषकर फूल सुंघनी /नाचे फूलों के संग / भंवरा दंग |
    दर्द जमा है/ खामोश सी झील में/ दर्द लहरें |
    बरखा बूँद /खेतों में रचे छंद /बाली में गूंथ |

  4. बैरी बदरा
    करे चन्दा को ओट
    रोई चकोर।

    तनी भृकुटी
    दायरों से बाहर
    रखे जो पग।

    शिल्पी सावन
    मन में उकेरता
    मिलन- चित्र ।

    sbhi utkrisht , lekin ye vishesh haen .
    badhai

  5. फुलसुंघनी
    नाचे फूलों के संग
    भंवरा दंग

    ठहरी झील
    तोड़कर किनारे
    बहना चाहे

    तम से जूझा
    रात भर जुगुनूं
    लेआया भोर
    सभी हाईकु अच्छे हैं.

  6. बैरी बदरा
    करे चन्दा को ओट
    रोई चकोर।

    प्रवासी पंछी
    ले गए नीली झील
    बस आँखों में।

    बरखा बूँद
    खेतों में रचे छंद
    बाली में गूँथ ।……..बहुत सुन्दर….बधाई आप सबको!

  7. बहुत सुन्दर हाइकु हैं सभी …
    बैरी बदरा …,ठहरी झील और शिल्पी सावन ..बेहद ख़ूबसूरत !

    हार्दिक बधाई कमला जी , अनिता जी एवं गुंजन जी !

  8. कमला जी आप के सभी हाइकु आपकी रचना कला के बेहतरीन नमूने हैं। किसी एक हाइकु की तारीफ कारण जँचता नहीं। फिर भी — है सद्यस्नाता /भीगी सी चुनरिया /लजाई धरा। अति सुंदर है। अनीता जी आप का यह वाला —तनी भृकुटि /दायरों से बाहर /रखे जो पग/ और यह भी — मन को भा गया —ठहरी झील /तोड़कर किनारे /बहना चाहे।
    गुंजन जी बरखा बूंदे /खेतों में रचे छंद /बाली में गूँथ। बहुत अच्छा लगा । सभी को वधाई।

  9. सभी सुंदर
    अतुलनीय ।

  10. कमला जी ,गुंजन जी बहुत सुंदर हाइकु।

    आप सभी का हृदय से आभार कि आपने उत्साह बढ़ाया।

  11. बहुत सुंदर हाइकु ! जुड़वाँ नैन…, दर्द जमा है…, मेरी कहानी… बहुत प्यारे!
    हार्दिक बधाई … कमला जी, अनीता मंडा जी, गुंजन जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  12. जुड़वाँ नैन
    ले सपनों के पंख
    उड़ने चले।
    बहुत बढ़िया…|

    नभ क्यों छीना
    उड़नें के सपनें
    देखे थे मैंने।
    मर्मस्पर्शी…|

    कोई न सानी
    तुम से तुम तक
    मेरी कहानी ।
    प्रीत की भावुक अभिव्यक्ति…|
    सबको हार्दिक बधाई…|


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