Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 6, 2015

फूटा झरना


डॉशैलजा सक्सेना, कैनेडा

1

ओढ़ लेटी हैं

कलियाँ अलसाई

धूप -रज़ाई !

2

भोर की हवा

बुहार गई नींद,

जागा सूरज!

3

सुबह घड़ी

लगाती रोज़ रेस

जीतेगा कौन?

4

सेंकता काल,

सुख-दुख की आग

उम्र की रोटी !

5

छाती का वेग,

दुख- पहाड़ तोड़

फूटा झरना।

6

दादी की बातें

मेह की फुहार -सी

भीगता घर!

7

मन में स्थिर

यादें तुम्हारी जैसे

पीपल पेड़ !

8

तुम्हारे काँधों,

झूले मन मेरा ,ज्यों

नन्ही सी बच्ची!

-0-

2-रेखा रोहतगी

1   

छुएँ लहरें

तटस्थ नहीं रहें

नदी के तट  ।

2     

कुबेर-कोष

है तेरे ही भीतर

देर न कर

-0-

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Responses

  1. बहुत बढ़िया।

  2. भोर की हवा
    बुहार गई नींद
    जागा सूरज!

    सेंकता काल
    सुख-दुख की आग
    उम्र की रोटी!

    दादी की बातें
    मेह की फुहार सी
    भीगता घर!……….विशेष…. मन को छू गए!

    कुबेर कोष
    है तेरे ही भीतर
    देर ना क………सुन्दर!

    डा० शैलजा जी, रेखा जी……हार्दिक बधाई!

  3. ओढ़ लेटी हैं
    कलियाँ अलसाई
    धूप -रज़ाई !

    छुएँ लहरें
    तटस्थ नहीं रहें
    नदी के तट ।

    sundar chitran! bahut bahut badhai…

  4. ‘धूप रजाई व बुहार गई नींद’
    वाह ! अपूर्व बिम्ब रूपक । हार्दिक बधाई ।

  5. सुंदर हाइकु।आप दोनों को बधाई।

  6. शैलजा जी क्या खूब हाइकू लिखे हैं मुझे जो बहुत अच्छे लगे वे हैं ..
    छाती का वेग
    दुःख पहाड़ तोड़
    फूटा झरना और

    सेंकता काल
    सुख दुःख की आग
    उम्र की रोटी
    रेखा जी आप को और शैलजा जी को हार्दिक बधाई |

  7. डा. शैलजा आप के सभी हाइकु अच्छे लगे ।विशेषकर दादी की बाते,… और मन में स्थिर ,यादें तुम्हारी जैसे,पीपल पेड़।रेखा रसतोगी आप के भी दोनो हाइकु अच्छे लगे ।वधाई दोनों को।

  8. सुंदर

  9. सेंकता काल , दादी की बातें ,ओढ़ लेटी हैं ..अनुपम हाइकु बहुत बधाई शैलजा जी !

    नदी के तट और कुबेर कोष बहुत गहरे हाइकु रेखा जी हार्दिक बधाई !

  10. ओढ़ लेटी हैं
    कलियाँ अलसाई
    धूप -रज़ाई !
    2कुबेर-कोष
    है तेरे ही भीतर
    देर न कर aap donon ke ye vishesh lge sbhi utkrisht .

  11. ओढ़ लेटी हैं
    कलियाँ अलसाई
    धूप -रज़ाई !…….vaah

  12. सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे । डॉ•शैलजा सक्सेना जी और रेखा रोहतगी जी को बधाई और शुभकामनाएं !

  13. भोर की हवा
    बुहार गई नींद,
    जागा सूरज!
    बहुत बढ़िया…|

    कुबेर-कोष
    है तेरे ही भीतर
    देर न कर
    सुन्दर…|

    आप दोनों को बहुत बधाई…|


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