Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अगस्त 4, 2015

मेरा आकाश ।


1- डॉ सुधा गुप्ता

1

किया ग़ुनाह

तुमने चुरा लिया

मेरा आकाश ।

2

सपने छीने

मंजूर कर लिया,

क्यों छीनी दृष्टि?

3

अंधी आँखों में

अतल अन्धकार

काली घुमस

4

बोल तो छीने

क्यों छीने अहसास?

बचा खोखल।

5

छीने थे खेल

क्यों छीना कौतूहल ?

पड़ा है ठूँठ ।

6

सुख न दु:ख

कुछ नहीं व्यापता

निर्जीव माटी

-0-

(31 जुलाई , गुरु पूर्णिमा)

 -0-

2-सुरेश जादव

1

सावन झूले

गौरी के गीत सुन

धरती भूले

2

भीगा जो तन

जलने लगा मन

आया सावन

3

पिया न आए

बैरी सावन आया

बिन बताए

-0-

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Responses

  1. सभी हाइकु बेहतरीन हैं और बहुत अच्छे लगे । डॉ सुधा गुप्ता जी और -सुरेश जादव जी को बधाई और शुभकामनाएं !

  2. बेहद भाव पूर्ण ,मन को छू लेने वाले हाइकु ..सभी एक से बढ़कर एक ..
    किया गुनाह , सपने छीने ,छीने थे खेल ,सावन झूले ..बेहतरीन !
    आदरणीया सुधा दीदी एवं सुरेश जादव जी के प्रति सादर वंदन अभिनन्दन !

  3. डॉ सुधा गुप्तजी सुंदर हाइकु बहुत अच्छा लगा —सपने छीने /मंजूर कर लिया /क्यों छीनी दृष्टि। और सुरेश जादव जी आपका यह वाला हाइकु —पिया न आये /बैरी सावन आया /बिन बताये। अच्छा लगा। वधाई दोनों को।

  4. छीने थे खेल
    क्यों छीना कौतूहल ?
    पड़ा है ठूँठ ।

    पिया न आए
    बैरी सावन आया
    बिन बताए

    Bahut bhavpurn…bahut bahut badhai…

  5. vridhavastha ki antarvedana ko mukhar karate ,didi ke sabhi haiku ek se badh kar ek hain,kisako chhodun kisako na chhodun!lekhani ko naman.
    savan ki jhadii viyogani ke akelepan ko us samay badha rahi hai jab suhaginen gauri pujan kar ma se achal suhag ki kamana kar rahi hain.itane bhavpurn haiku ! jadav ji ke bhavon ko naman.
    pushpa mehra.

  6. मन को छूने वाले हाइकु ! विशेषकर–
    सपने छीने
    मंजूर कर लिया,
    क्यों छीनी दृष्टि?

    बोल तो छीने
    क्यों छीने अहसास?
    बचा खोखल।– अतिसुन्दर!
    सुधा दीदी जी… आपको एवं आपकी लेखनी को नमन!

    सुंदर हाइकु सुरेश जादव जी !
    हार्दिक बधाई

    ~सादर
    अनिता ललित

  7. उत्साह वर्धन के लिए
    सभी का आभार
    नमन

  8. सुधा जी इतने खूबसूरत भावुक हाइकू लिखे हैं | आपको और सुरेश जादव जी को सादर और बधाई |

  9. बोल तो छीने
    क्यों छीने अहसास?
    बचा खोखल।

    छीने थे खेल
    क्यों छीना कोतुहल?
    पड़ा है ठूठ।

    पिया ना आए
    आया बैरी सावन
    बिन बताए।

    बहुत भावपूर्ण…..आप दोनों को हार्दिक बधाई।

  10. किया ग़ुनाह
    तुमने चुरा लिया
    मेरा आकाश ।

    बोल तो छीने
    क्यों छीने अहसास?
    बचा खोखल।
    कितने मर्मस्पर्शी…| आदरणीया सुधा जी को नमन और बधाई…|

    सुरेश जी के हाइकु भी बहुत अच्छे हैं…| बधाई…|

  11. सभी हाइकु अच्छे लगे, विशेषकर-
    छीने थे खेल
    क्यों छीना कौतूहल
    पड़ा है ठूँठ
    और-
    ०सावन झूले
    गौरी के गीत सुन
    धरती भूले


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