Posted by: हरदीप कौर संधु | जुलाई 31, 2015

इतना मत हँसो !


1-शशि पाधा

शशि पाधा

2-संजीव निगम

1

लौट रहे हैं

सभी परिन्दे घर

मैं भी लौटूँ क्या?

2

बंद दीवारें ,

भीतर आँखें देखें

खुला आकाश।

3

सपना टूटा

कोई नहीं था पास

सच्चाई दिखी।

4

रात बीतती

अँधेरे से निकल

खुलती आँख।

5

एक अकेला

उजाले से लड़ता

भोर का तारा।

6

दिन है उगा,

इतना मत  हँसो,

रात आएगी।

7

बहते आँसू

समा लेगी खुद में,

रात अँधेरी।

8

दिन के घोड़े

थककर ढूँढते,

सुख की  रात।

9

रात के पाले

सुख सपने, तोड़ें

धूप के कोड़े।  

-0-

3- अमन चाँदपुरी

Aman Chandpuri1

बादल चोर

शीत में रोज-रोज

धूप चुराता।

2

नाजुक पाँव

पड़े कंकड़ पर

हुई चुभन।

3

हार पे हार

बहुत निर्लज्ज है

फिर तैयार।

4

गाँव का कुआँ

पैसे बदले पानी

ठाकुर राज।

5

धान लगाती

ढेर सारी गोपियाँ

कजरी गाती।

6

नभ में छाये

इन्द्रधनुषी रंग

बच्चे हैं दंग।

7

पर्वत थिर

बह चली नदिया

सागर ओर।

8

खुला गगन

छाया इन्द्रधनुष

हँस दी धरा।

9

नन्हीं गौरैया

कमरे में आते ही

भिड़ी पंखे से।

-0-

 परिचय- अमन सिंह

जन्मतिथि- 25 नवम्बर 1997 ,जन्म स्थान- चाँदपुर ;शिक्षा- बी. ए.

लेखन- 15 मई 2012 से

विधाएं- कविता, क्षणिका, हाइकु और दोहा आदि

प्रकाशन- अनुभूति, हस्ताक्षर और स्वर्गविभा आदि वेब पत्रिकाओं पर

सम्पर्क- ग्राम व पोस्ट – चाँदपुर, टांडा, अम्बेड़कर नगर, यू.पी.

मेल- kaviamanchandpuri@gmail.com


Responses

  1. aaj bhi bachchon men yhi luknaa – chipnae ki baal leela dikhaai deti hae . stik smmprn sundr haigaa .

    दिन के घोड़े
    थककर ढूँढते,
    सुख की रात।

    sbhi ythaarth ka sundr chitrn pr yh vishesh hae sanjiiv ji
    नन्हीं गौरैया
    कमरे में आते ही
    भिड़ी पंखे से। haan satik
    sbhi ythaarth ka sundr chitrn pr yh vishesh hae

    “शशि पाधा” , संजीव निगम , अमन सिंह badhaai
    1

  2. sundar haaiga aur haiku ..

    sabhi rachanakaaron ko bahut badhaii !

  3. सभी हाइकु / हाइगा बेहतरीन हैं / बहुत अच्छे लगे ।शशि पाधा जी, संजीव निगम जी और अमन चाँदपुरी जी को बधाई और शुभकामनाएं !

  4. शशि पाधा जी आप का हाइगा कमाल का है ।और छुपा शरारती नन्हा भी मजा ले रहा है आप को सताने का ।बहुत अच्छा लगा ।वधाई।और संजीव निगम जी आप
    नये हाइकुकारों का पाठकों की तरफ से स्वागत है ।पढ़ ने को मिले नये बिम्ब और नये कल्पना चित्र बहुत अच्छे लगे जैसे — बहते आंसू / समा लेगी खुद में / रात अधेरी । वधाई ।
    अमन चांद पुरी तुम्हारे हाइकु भी नई कल्पना और समाज की वास्तविकता दर्शाते अच्छी लगे जैसे गाँव का कुआँ / पैसे बदले पानी/ ठाकुर राज।आदि । गौरैया वाला तो बहुत मार्मिक है क्यों कि अक्सर वह पंखे से भिड़ कर प्राण गवांती है । शुभ कामनायों के साथ वधाई।

  5. हाइगा और हाइकु बहुत बढिया!
    सभी रचनाकारों को बधाई!

  6. sabhi haiku haiga achhe lage sabhi ko badhai..

  7. शशिजी और संजीव जी
    और अमन जी आप सभी को आपकी रचनाओं पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं

  8. AAp sabko haardik dhanyvaad.

  9. shashi ji apka haiga abodh bachhon mein khojane aur janane ki jigyasa ko jagata hua bahut hi sunder hai ,badhai. sanjeev aur aman ji apko sunder haiku lekhan hetu badhai .
    pushpa mehra.

  10. सुंदर हाइगा एवं हाइकु !
    हार्दिक बधाई शशि पाधा जी, संजीव निगम जी एवं अमन चाँदपुरी जी !
    हिंदी हाइकु परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है अमन जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  11. Aap sab ko haiga psand aaya, haardik dhanyvaad | Aman ji aur sanjeev ji ko sundar haiku ke liye bdhai .

  12. बहुत सुन्दर हाइगा और मनभावन हाइकु…| आप सभी को बधाई…|


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