Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 25, 2015

चिड़िया झूले


बुध सिंह चित्रकार

1

बुधसिंह चित्रकारटूटता तारा

पल की है झलक

छाई उदासी ।

2

रात चाँदनी

निर्मल सागर में

शान्त लहरें ।

3

चाँद छिपता

बच्चे तारे पकड़ें

रब हँसता ।

4

चिड़िया झूले

बिजली के तारों को

झूला बनाके ।

5

खुली खिड़की

भीतर फैल गया

पूरा अम्बर ।

6

गिरते आँसू

मोती बन भरते

खाली अँजुरी  ।

7

अंधकार में

राहें करें रौशन

जगते दीये ।

8

इस बार भी

सावन बीता सूखा

सूली पे प्राण ।

9

सूखा जो पत्ता

डाली से टूट गिरा

नदी में तरे

10

बुझता दीय

सन्देश देता गया-

शुभ प्रभात

11

सूखता जाता

भीतर  का सोता तो

प्यासे अधर ।

12

डाली से झरा

हवाओं से लड़ता

फूल अभागा।

13

टॉवर-युग

नन्ही सी चिरैया की

चहक मरी ।

14

पानी व रूख

मानव-जीवन के

शाश्वत सुख ।

15

करे संकेत

चलते पथिक को

भोर का तारा ।

16

चाँद-चाँदनी

रात के जख्मों  के ये

देते गवाही

-0-

नादालों वाया अजनोहा

जिला-होशियारपुर -144404

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Responses

  1. सभी हाइकु बहुत सुन्दर!
    बुझता दीया
    संदेश देता गया-
    शुभ प्रभात।

    डाली से झरा
    हवाओं से लड़ता
    फूल अभागा।

    टावर-युग
    नन्ही-सी चिरैया की
    चहक मरी…………..विशेष रूप से अच्छे लगे।
    बुद्ध सिंह जी आपको बहुत बधाई!

  2. चाँद-चाँदनी
    रात के जख्मों के ये
    देते गवाही. vishesh lgaa
    sbhi ek se badhakae ek

    badhai

  3. सुन्दर हाइकु ..
    बुझता दिया ..और ..डाली से झरा बहुत अच्छे लगे |
    हार्दिक बधाई !!

  4. पानी व् रुख/ मानव जीवन के / शाश्वत सुख सुन्दर हाइकू लगा | हार्दिक बधाई ||

  5. बुझता दीय
    सन्देश देता गया-
    ‘शुभ प्रभात’ । प्रेरक हाइकु, बधाई आपको |

  6. Beutiful

  7. पहली बार अति सुंदर चित्रन

  8. खुली खिड़की
    भीतर फैल गया
    पूरा अम्बर ।

    bahut khub, bahut achha laga ye haiku sabhi haiku bahut achhe hain meri badhai…

  9. आदरणीय बुध सिंह चित्रकार जी का ‘हिन्दी हाइकु’ परिवार में हार्दिक स्वागत है!
    सभी हाइकु सुंदर हैं ! विशेषकर–

    गिरते आँसू
    मोती बन भरते
    खाली अँजुरी।

    बुझता दीया
    सन्देश देता गया-
    ‘शुभ प्रभात’ ।

    डाली से झरा
    हवाओं से लड़ता
    फूल अभागा।–बहुत अच्छे लगे !

    आपको हार्दिक बधाई !

    ~सादर
    अनिता ललित

  10. खुली खिड़की
    भीतर फैल गया
    पूरा अम्बर ।
    bahut sunder haiku hai sare aapko bahut bahut badhai ayr svagat
    saader
    rachana

  11. बुद्ध सिंह जी आप के सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे। जैसे – टूटता तारा / पल की है झलक /छाई उदासी। और चिड़िया झूले। … खुली खिड़की। … आदि। टॉवर युग /नन्ही सी चिरैया की /चहक मरी। बहुत खूब लिखा आपने।
    वधाई हो बुद्ध सिंह जी।

  12. टॉवर-युग
    नन्ही –सी चिरैया की
    चहक मरी ।
    जैसी सभी उम्दा रचनाओं के लिये श्रद्धेय श्री बुध सिंह जी साहब को हार्दिक बधाई व विनम्र प्रणाम.

  13. बहुत अच्छे हाइकु हैं…मेरी बधाई…|


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