Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जुलाई 24, 2015

नींद उचाट


रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

1

नींद छीनते

बरसा कर मोती

खज़ाने वाले ।

2

लोभी है मन

बटोरना चाहता

बिखरा धन।

3

रस का लोभी

जगे रजनी भर

नींद उड़ी है ।

4

मन के मोती

मिलते हैं जिसको

वह क्यों सोए?

5

अमृत खोया

चाँदनी रातों में भी

जो कभी सोया।

6

झरे चाँदनी

सब खुले झरोखे

नींद नहाए।

7

शान्त रात में

टिटिहरी जो चीखी

जंगल जागा।

8

नींद उचाट

यादों की तरी लगी

मन के घाट ।

9

याद जो  आए

सभी साथी पुराने

भीगी  पलकें ।

10

स्नेह की बातें

फिर से याद आईं

फूटी रुलाई ।

11

भोर सुहानी

उतरी है अँगना

मुदितमना।

-0-

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Responses

  1. बहुत सुंदर हाइकु। सचमुच हाइकु मो ती बटोर कर सुबह
    मुदितमना हो गई ।
    आपको सादर नमन ।

  2. मन के मोती
    मिलते हैं जिसको
    वह क्यों सोए?
    कितनी खूबसूरत और सच्ची बात कही है…|

    झरे चाँदनी
    सब खुले झरोखे
    नींद नहाए।
    अप्रतिम…|

    स्नेह की बातें
    फिर से याद आईं
    फूटी रुलाई ।
    ये हाइकु तो सीधे दिल में उतर गया…|
    आपकी सशक्त कलम से झरते इन मोतियों के लिए आभार और बधाई…|

  3. बहुत सुंदर …भोर को भी विभोर करते ..भावपूर्ण हाइकु !
    अमृत खोया और झरे चाँदनी ….बेहतरीन !!
    हार्दिक बधाई सादर नमन !

  4. सभी हाइकु बहुत भाव पूर्ण अति सुन्दर लगे।
    विशेषकर निम्न हाइकु भी मन को भाये।
    झरे चाँदनी
    सब खुले झरोखे
    नींद नहाए

    याद जो आए
    सभी साथी पुराने
    भीगी पलकें ।
    आपको हार्दिक बधाई।

  5. मन के मोती,मिलते हैं जिसको ,वह क्यों सोये,
    याद जो आये,सभी साथी पुऱाने,भीगी पलकें…बहुत मार्मिक हाईकु .बधाई सर.

  6. नींद उचाट
    यादों की तरी लगी
    मन के घाट ।

    anya sabhi bhi sundar haiku

    badhaiyan evam shubhkamnayen sir jee ko.

    kavita bhatt

  7. रस का लोभी
    जगे रजनी भर
    नींद उड़ी है । yh vishesh lga . sbhi chintn ki smamridhi se pripurn haaiku .
    badhaai .

  8. वाह! अतिसुन्दर, भावपूर्ण, मन की कोमल चाँदनी बिखेरते हुए सभी हाइकु ! विशेषकर–

    ‘नींद उचाट
    यादों की तरी लगी
    मन के घाट ।

    याद जो आए
    सभी साथी पुराने
    भीगी पलकें ।

    स्नेह की बातें
    फिर से याद आईं
    फूटी रुलाई ।

    भोर सुहानी
    उतरी है अँगना
    मुदितमना।’ —बहुत ही सुंदर !

    हार्दिक बधाई भैया जी !
    आपको एवं आपकी लेखनी को नमन !

    ~सादर
    अनिता ललित

  9. बहुत सुन्दर भावपूर्ण हाइकु!
    झरे चाँदनी, नींद उचाट, स्नेह की बातें….बहुत बढ़िया!
    हार्दिक बधाई आपको!

  10. बारिश, चाँदनी और मीठी यादों को शब्दों में बाँधते सुन्दर हाइकु | बधाई आपको

  11. jhare chandani, sab khule jharokhe, niiind nahaye.,yaad jo aye,sabhi sathi purane,bhigi palaken. sunder haiku.bhai ji badhai.

    pushpa mehra.

  12. जंगल का जागना, नींद का नहाना एकदम अनूठे एवं अभिनव प्रयोग। सभी हाइकू बहुत सुन्दर।

  13. नींद उचाट शीर्षक के हाइकु
    सभी बहुत सुंदर लगे। सधी कलम से ही ऐसी रचना बन पड़ती है।
    भोर सुहानी /उतरी है अँगना /मुदितमना। वाकई मुदित करने वाली है।
    और भी जैसे -अमृत खोया /चाँदनी रातों में भी /जो कभी सोया।… झरे चाँदनी /… तारीफ़ के हक़दार हैं।
    आप को वधाई।

  14. सभी हाइकु बेहतरीन हैं / बहुत अच्छे लगे । आपको बधाई और शुभकामनाएं !

  15. अमृत खोया
    चाँदनी रातों में भी
    जो कभी सोया।
    झरे चाँदनी
    सब खुले झरोखे
    नींद नहाए।sabhi haiku sundar v bhaavpurn ! magar amrit tatha chaandni ne to man moh liya bhaiya ji …shubhkaamnao ke saath-

  16. प्रिय सहृदय साथियो ! आपका एक -एक शब्द मेरे लिए संजीवनी है , साथ ही बेहतर लेखन करने के लिए चुनौती भी । आपका मन -प्राण से आभार !

  17. श्री कम्बोज जी सभी हाइकू एक से बढ़कर एक लगे |अपने मन भाव हम सभी के साथ बांटने के लिए हार्दिक बधाई |

  18. नींद न आने के सकारात्मक पक्ष भी हो सकते हैं, और इन्हीं पहलुओं से आपके हाइकु अवगत कराते हैं. अमृत खोया, झरे चाँदनी, शांत रात में, नींद उचाट – जैसी रचनाएं अद्वितीय हैं . बधाई और साधुवाद. सुरेन्द्र वर्मा

  19. sadar kamboj bhai
    ‘nind uchat’ ke sabhiee haiku bahut umda lage .Aapko bahut badhai.

  20. अति सुंदर

  21. मन के मोती
    मिलते हैं जिसको
    वह क्यों सोए?

    अमृत खोया
    चाँदनी रातों में भी
    जो कभी सोया।

    dono haikuon men bahut nayapan mila bahut achhe lage sabhi haiku ye dono bahut bahut khas hain meri hardik badhai kamboj ji ko…

  22. waah ati sundar haiku ….

  23. स्नेह की बातें
    फिर से याद आईं
    फूटी रुलाई ।

    अमृत खोया
    चाँदनी रातों में भी
    जो कभी सोया।

    bhaiya aapke haiku pr kuchh likha suraj ko diya dikhana hai
    aap se sikh kar mene llikhna sikha hai
    badhai bhaiya aur abhar
    rachana

  24. Badhiya haiku

  25. सभी हाइकु बहुत सुन्दर है. यह दोनों हाइकु विशेष पसंद आए –
    अमृत खोया / चाँदनी रातों में भी / जो कभी सोया
    तथा
    मन के मोती / मिलते हैं जिसको / वह क्यों सोए ?
    काम्बोज भाई की लेखनी सदैव एक अलग छाप छोड़ती है. सादर बधाई.


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