Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 23, 2015

रोके है वर्षा


1-डा सुरेन्द्र वर्मा

1

धरा,आकाश

हवा, पानी, रोशनी

रचाते काव्य

2

कदम्ब तले

श्वेत किंजल गेंद

पावस सौन्दर्य

3

रोके है वर्षा

कहाँ जाओगे बाहर

यहीं रुको ना !

4

झूला कजरी

झूम झूम के गाएँ

मियाँ मल्हार

5

झूले श्रावणी

सखियाँ, बादरियाँ

पेंग मारतीं

6

वर्षा पवन

अट्टहास बादल

डर भी डरे

-0-

2-डॉसरस्वती माथुर

1

मन बूँदों– सा

टपकता ही रहा

भिगोके पल।

2

सोयी झील में

भँगेड़ी हवाओं ने

रात जगाई।

3

पगली हवा

बाँस झुरमुट में

रास्ता  ही भूली।

4

हवा – चूड़ियाँ

नदी की कलकल

सुरों के गीत।

5

स्वप्न परी थी

नैनों  की नदिया में

नींद में मिली।

6

फेन– सी तैरूँ

सागर लहरों में

रेत गवाह।

7

मन सावन

लगा है बगिया में

झूलों का मेला।

-0-

Advertisements

Responses

  1. धरा,आकाश
    हवा, पानी, रोशनी
    रचाते काव्य । yh hkikt hi hae .
    chintan ki smridhdi se lbaalb sabhi haaiku

    मन सावन
    लगा है बगिया में
    झूलों का मेला।
    vaah aap donon ko badhaai

  2. सुन्दर हाइकु …
    ‘धरा,आकाश’,’रोके है वर्षा’ ,’पगली हवा’ और ‘मन सावन’ बहुत अच्छे लगे |
    आदरणीय डॉ.सुरेन्द्र वर्मा जी एवं डॉ.सरस्वती माथुर जी को बहुत-बहुत बधाई !

  3. डॉ सुरेन्द्र जी बिलकुल सही कहा है आपने कि धरा आकाश /हवा पानी रौशनी /रचाते काव्य |
    सभी हाइकु भावपूर्ण हैं |बधाई | सरस्वती जी आपको भी हार्दिक बधाई |सोयी झील में / भंगेड़ी हवाओं ने /रात जगाई | सुन्दर भाव हैं |

  4. सुन्दर सरस हाइकु।
    दूसरे हाइकु में यदि सौंदर्य
    के स्थान पर छवि या रूप
    कैसा रहेगा ।
    सविनय
    रेखा रोहतगी

  5. बहुत सुन्दर हाइकु आप दोनों के…बहुत बधाई।

  6. abhi haiku varsha aur savan ke roop- ras mein puurN roop se lipt hain,mathur ji ko va varma ji ko naman .
    pushpa mehra.

  7. धरा,आकाश
    हवा, पानी, रोशनी
    रचाते काव्य । मनभावन हाइकु |

    पगली हवा
    बाँस झुरमुट में
    रास्ता ही भूली।
    बहुत सुन्दर सरस्वती जी , आप दोनों को बधाई |

  8. डॉ.सुरेन्द्र वर्माजी, डॉ.सरस्वती माथुर जी बहुत मनमोहक
    हाइकु।
    पगली हवा
    बाँस झुरमुट में
    रास्ता ही भूली।

  9. आदरणीय डॉ. सुरेन्द्र वर्मा जी एवं डॉ. सरस्वती माथुर जी… वर्षा की फुहारों जैसे ही सभी हाइकु बहुत सुंदर हैं !
    आप दोनों को हार्दिक बधाई !
    ~सादर
    अनिता ललित

  10. रोके है वर्षा
    कहाँ जाओगे बाहर
    यहीं रुको ना !
    bahut sadharan se tarike se samjhaya sa haiku achha laga hardik badhai…
    मन बूँदों– सा
    टपकता ही रहा
    भिगोके पल

    Bhega bhega sa haiku haiku achha laga bahut bahut badhai…

  11. sabhi haiku sundar ..visheshkar
    मन बूँदों– सा
    टपकता ही रहा
    भिगोके पल

    पगली हवा
    बाँस झुरमुट में
    रास्ता ही भूली।

    laazawaab …badhaai

  12. धरा,आकाश
    हवा, पानी, रोशनी
    रचाते काव्य ।

    हवा – चूड़ियाँ
    नदी की कलकल
    सुरों के गीत।
    bahut sunder aap dono ko badhai
    rachana

  13. सुन्दर हाइकु…बधाई…


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: