Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जुलाई 15, 2015

पानी से तर


1-डॉ अर्पिता  अग्रवाल

1

ओढ़ी धरा ने

हरियाली  चूनर

पानी से तर ।

2

आँख -मिचौली

बादल बिजली  की

ॠतु वर्षा  की

3

घन- गर्जन 

विद्युत  नर्तकी का

नृत्य आरम्भ

4

पड़ी बौछार

मेघ मल्हार  मन

नाचे मयूरी

5

नील मेघों  में

तड़पी  सौदामिनी

डरी  दिशाएँ।

6

चौंका मासूम

मेघ  गर्जन सुन

मृग का छौना

-0-

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Responses

  1. सुन्दर हाइकु.विशेषरूप से ….
    घन- गर्जन
    विद्युत नर्तकी का
    नृत्य आरम्भ ।….अच्छा बिम्ब है.

  2. सभी हाइकु सुन्दर …
    विद्युत् नर्तकी ..और ..तड़पी सौदामिनी विशेष !
    हार्दिक बधाई अर्पिता जी !

  3. मनमोहक वर्षा ऋतु का सुंदर चित्रण !
    आँख -मिचौली
    बादल बिजली की
    ॠतु वर्षा की। -बहुत प्यारा लगा।

    हार्दिक बधाई अर्पिता अग्रवाल जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  4. हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ !!

  5. ओढ़ी धरा ने
    हरियाली चूनर
    पानी से तर ।
    khoob likha hai
    rachana

  6. ओढ़ी धरा ने
    हरियाली चूनर
    पानी से तर ।

    bahut sundar! badhai bahut bahut

  7. वर्षा ऋतु के बहुत सुन्दर हाइकु….बधाई।

  8. वर्षा के आगमन पर सुन्दर भावपूर्ण रचना पर बधाई !हुई वर्षा मन हर्षा !

  9. घन- गर्जन
    विद्युत नर्तकी का
    नृत्य आरम्भ ।
    बहुत सुन्दर…बधाई…|


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