Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जुलाई 10, 2015

ये शहर


1-सीमा स्मृति

1

है सुनहरे

ख़्वाबों का ये शहर

तू भी ठहर।

 2

मन उदास

छोड़ते नहीं आस

जीने का राज़।

3

पानी से सस्ता

यहॉं लहू का मोल

कुछ न बोल।

4

एकाकीपन

चेहरों पे सिमटा

हँसी लिपटा ।

5

चौराहों पर

हादसे करें शोर

क्यों हर रोज।

6

जान से सस्ती

बंदूक की है गोली

रोज ही होली।

7

 आँखें ना देखें,

कान सुनते नहीं,

शहर यही ।

-0-

2-शान्ति पुरोहित (नोखा बीकानेर)

1

स्मृति की लता

ह्रदय -कुञ्ज -तले

फैलती सदा

2

रिश्ते सितार

नाजुक जुड़े तार

टूटें, बेकार

-0-

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Responses

  1. रिश्ते सितार
    नाजुक जुड़े तार
    टूटें, बेकार ।

    शांति जी बहुत ही यथार्थपरक हाइकु । जीवन का सत्‍य । सुन्‍दर हाइकु के लिए हार्दिक बधाई

  2. बहुत सुंदर हाइकु ! विशेषकर–

    एकाकीपन
    चेहरों पे सिमटा
    हँसी –लिपटा ।

    रिश्ते सितार
    नाजुक जुड़े तार
    टूटें, बेकार ।

    मन को छू गए।
    हार्दिक बधाई सीमा जी एवं शान्ति जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  3. हार्दिक आभार अनीता जी व सीमा स्मृति जी सीमा स्मृति जी आपको भी बधाई रचना बहुत अच्छी बन पडी है आपकी

  4. पानी से सस्ता
    यहॉं लहू का मोल
    कुछ न बोल।
    स्मृति की लता
    ह्रदय -कुञ्ज -तले
    फैलती सदा।

    yh dono vishesh , badhaai

  5. सीमा जी और शान्ति जी सभी हाइकू की रचना अति मोहक लगी विशेषकर
    पानी से सस्ता ……,और स्मृति की लता…..|हार्दिक बधाई |

  6. ekakiipan,cheharon pe simaTaa, hansii – lipaTaa. rshte – sitaar, naajuk ju.de taar, ju.De.n bekaar.bahut sunder panktiyaan hain.seema ji ,shanti ji badhai.

    pushpa mehra.

  7. एकाकीपन, स्मृति की लता…दोनों हाइकु बहुत मन भाए….सीमा जी, शान्ति पुरोहित जी….बधाई!

  8. सभी हाइकु सुन्दर हैं लेकिन ..एकाकीपन ..और ..रिश्ते सितार बहुत अच्छे लगे | दोनों हाइकुकारों को हार्दिक बधाई !!

  9. सीमा स्मृति और शान्ति पुरोहित जी आप दोनों के हाइकु बहुत अच्छे लगे सीमा जी आज की ,शहर की परिभाषा बहुत स्टीक लगी । जान से सस्ती बन्दूक की गोली … और एकाकी पन /चेहरों पे सिमटा / हँसी लिपटा।और शान्ति जी आप की स्मृति लता बहुत भायीदोनों को वधाई ।आशा करती हूं , इतना अच्छा और भी पढने को मिलता रहे गा ।

  10. आप सभी का हार्दिक धन्‍यवाद । आप लोगों की थपकी ही लिखने को प्रेरित करती है ।

  11. एकांकीपन चेहरों पे सिमटा….

    रिश्ते सितार …

    सहित सभी हाइकू सुन्दर … दोनों रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामना

  12. सीमा जी, शान्ति जी , सुन्दर सृजन के लिए बधाई |

  13. बहुत सुन्दर और मर्मस्पर्शी हाइकु…हार्दिक बधाई…|


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