Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जुलाई 4, 2015

हिन्दी हाइकु छठे वर्ष में-3


1-छठे वर्ष में प्रवेश के अवसर पर अभिनन्दन और शुभकामनाएँ। 

भगवत शरण अग्रवाल

  1

 नदी हँसी थी

घरोंदे बनाने पर

मेरे तुम्हारे। 

2

तुम्हारे बिना

दीवारें हैं, छत है

घर कहाँ है?

-0-

2-कमला निखु्र्पा

कमला1

बरसी बूँदें 

रिमझिम भावों की

मन- सावन |

2

भीगी कविता

खिली हाइकु कली

मन- अंगना |

-0-

3- भावना सक्सैना

भावना सक्सैना1

धरा निखरी

निहारता गगन

मेघ मुस्काए।

2

थका बेचारा

सांझ को टोहे रस्ते

दिन बंजारा

-0-

4-हरकीरत हीर

हरकीरत 'हीर'1

खिलता रहे

सदा शब्द संसार

हाइकु द्वार।

2

शब्द -गहना

सजे तेरे अंगना

भैया -बहना।

-0-

5-सीमा स्मृति

1

मिली दिशाएँ

नयी परिभाषाएँ

जागी आशाएँ।

2

पाया संसार

हाइकु -परिवार

प्यार ही प्यार।

 -0-

6-डॉ रश्मि

1

चाँदनी रातें

झरती तेरी यादें

भीगती हूँ मैं |

 2

ज़िन्दगी मानो

हैं फूलों -सी कोमल

खुशबू -भरी |

 -0-

7-कमल कपूर

1

चाँद  की नाव

है नदी चाँदनी की

नभ का गाँव ।

2

पाखी  रे बोल

वाणी  में  मधु  घोल

मिश्री  से  तोल ।

 -0-

8-कशमीरी चावला

1

बहे जो आँसू

बस जुदाई बीच

बने सागर

-0-

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Responses

  1. सुंदर रचनाएँ

  2. utkrisht bhaav

  3. सभी हाइकु बहुत सुन्दर हैं।सभी को बधाई ।

  4. हाइकु लोक/ भाव ज्ञान भंडार / हर्षाता रहे ।वर्षों वर्ष ।रंग लाई अथक मेहनत रामेश्वर काम्बोज और हरदीप सन्धु की ।फले फूले उन का यह रचना सन्सार दुआ है ईश से ।बहुत बहुत वधाई जन्म दिन की । बहुत मन भाई नयी रचनायें ।

  5. sundar ,utkrisht prastuti hetu bahut badhaii …haardik shubh kaamanayen

    saadar
    jyotsna sharma

  6. अच्छी रचनाएँ, बधाई एवं शुभकामनायें सभी साथियों को,
    कविता भट्ट

  7. nadi hansi thi, gharaunde banane par, mere tumhare.ati sunder.isake alawa anya rachanakaron ke haiku bhi bahut sunder hain .sabhi rachnakaron ko badhai.
    pushpa mehra.

  8. सभी हाइकु बहुत सुन्दर हैं।सभी को बधाई ।

  9. bahut khub!

  10. हिन्‍दी हाइकु छठे वर्ष में प्रवेश कर गया, मैं इस यात्रा की पथिक हूँ और मार्गदर्शक हरदीप जी और भैया को और हम सब को हार्दिक बधाई। ये भैया ही हैं जो हाइकु मेल ना कर पाने भी आप ही के द्वारा विश्‍व हिन्‍दी हाइकु ग्रुप पर लिखे हाइकु प्रकाशित हो जाएंगे ।इतना ख्‍याल ये भैया ही रख सकते हैं। मैं कुछ दिनों से बैंक में अधिक व्‍यस्‍त होने के कारण
    कुछ लिख नहीं पा रही थी और इस अंक के लिए केवल दो हाइकु फोन में लिख पाने का अवसर लंच समय में मिला और आज देख रही हूँ तो वो प्रकाशित हैं।
    आप दोनों को धन्‍यवाद कहना बहुत कम होगा।
    सादर नमन

  11. सभी हाइकु मनभावन…यह हाइकु परिवार की यात्रा यूँ ही अनवरत चलती रहे…इसी शुभकामना के साथ सभी साथी हाइकुकारों को बहुत बधाई…|


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