Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जून 30, 2015

जुगलबन्दी


1-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

(पूर्व प्रकाशित)

2-रचना श्रीवास्तव

(हिमांशु जी के हाइकु पर लिखी जुगलबन्दी)

 

 

जीवन-साँझ

अनुताप क्यों करें

दीप जलाएँ ।

दीप जलाया

हुआ नहीं  उजाला

ये कैसी साँझ

सिन्दूरी साँझ

ले मादक मुस्कान

पन्थ निहारे।

साँझ भी रोई

जब पिया न  आये

थक के सोई ।

आकुल नैन

अम्बर पट खिंचे,

गुलाबी डोरे।

गुलाबी नैन

नीर भरे बरसे

अम्बर सोए ।

हो गई साँझ

रिश्ते, नाते व प्यार

हुए फरार ।

जीवन -साँझ

कोई नहीं  अपना

यही है रीत

संध्या वेला में

बहुत याद आए

अपने साए ।

खोया साया भी

सूरज के ढलते

बाकी थी याद

छलिया साथी

संझा द्वारे दे गए

शूल-पोटली।

साथी ही देते

साँझ हो या  सुबह

दर्द पोटली

साँझ हो गई

पथ है अनजाना

अब आ जाओ!

तुम आओ  तो

पथ अनजाना भी

अपना लगे

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Responses

  1. ye sunder jugalbandi aaj ki bhor ko aur bhi khoobsurat bana gai…….kadva sach par kadvahat ke baad hi mithaas ka maza hai …bahut khoob! . हो गई साँझ
    रिश्ते, नाते व प्यार…
    हुए फरार ।
    जीवन -साँझ
    कोई नहीं अपना
    यही है रीत।
    saath hi…ashavadita ki pyari kirnen…
    साँझ हो गई
    पथ है अनजाना
    अब आ जाओ!
    तुम आओ तो
    पथ अनजाना भी
    अपना लगे
    aadarniya himanshu ji v rachna ji ko is jugalbandi ke liye sadar naman ke saath -saath badhai.

  2. bahut hi sargarbhit jugalbandi hai, jeevan sandhya mein jab koi suhrid sathi sahara banta hai to path kaisa bhi ho sukhad ant pa jata hai .bhai kamboj ji
    apake jeevan – sanjh ki sachhai batate aur rachna ji ke sath nibhate haiku bahut hi sunder hain. ap dono ko badhai .
    pushpa mehra.

  3. हिमांशु जी के सभी हाइकु पसन्द आए । पहला छन्द बहुत भाया , जिस में जीवन सन्ध्या में निराश रोने के स्थान पर दीप जलाने की बात की गई है । बधाई हिमांशु चीं ।

  4. miln -virh ki juglbndi kaa sartk snvaad adbhut .
    बधाई हिमांशु – रचना श्रीवास्तव

  5. bahut sundar jugalbandi, dono rachnakaron ko shubhkamnayen

  6. बहुत उम्दा जुगलबंदी….. आप दोनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई!

  7. अद्भुत जुगल बन्दी है | छलिया साथी और साथी ही देते , साँझ हो गई और तुम आओ तो की जुगलबन्दी बहुत ही सुन्दर लगी |
    आप दोनों को हार्दिक बधाई !

  8. जीवन साँझ पर श्री रामेश्वर काम्बोज और रचना श्रीवास्तव की हाइकु जुगल बन्दी अच्छी लगी। अपनी अपनी बात सुंदर हाइकु लिख कर कह दी। गीले शिकवे और चाह की बातें और इंतजार बढ़िया बन पड़ा। वधाई।
    बहुत अच्छा लगा – जीवन साँझ /अनुताप क्यों करें /दीप जलाएं।

  9. आदरणीय काम्बोज जी एवं डा. हरदीप संधु जी
    ‘हाइकु कविताओं की वेब पत्रिका’ की पांचवीं वर्षगांठ की आपको बहुत-बहुत बधाई व
    शुभकामनाएँ।

    -कैलाश बाजपेयी ,

  10. सन्ध्या-छाया का सुन्दर शब्द दर्शन वहभी हाइकु में। आ. काम्बोज जी व रचना श्रीवास्तव जी को बधाई

  11. श्री कम्बोज जी के हाइकू के साथ रचना जी की भी जुगलबंदी बहुत अच्छी लगी |दोनों के ही हाइकू एक से बढ़ कर एक हैं |दोनों रचना कारों ने ही जीवन की सांझ का खूबसूरत वर्णन किया है |बधाई |

  12. आप सबका बहुत-बहुत आभार

  13. आदरणीय काम्बोज जी के हाइकु के साथ रचना जी की जुगल बन्दी बहुत रोचक लगी | सभी हाइकु गहन भाव लिए | आभार आप दोनों का |

  14. क्या बात है…वाह !
    आप दोनों के हाइकु तो वैसे भी मन मोहते हैं, उस पर अगर आप दोनों की ही जुगलबंदी हो जाए तो कहना ही क्या |
    बहुत सुन्दर…हार्दिक बधाई और आभार…हाइकु रस के इस सागर में डुबोने के लिए…|

  15. जुगलबन्दी का सुन्दर समाँ …

    एकदम सटीक जीवन सत्य को प्रस्तुत करता ये हाइकू बहुत ही अर्थपूर्ण …

    ेसंध्या वेला में
    बहुत याद आए
    अपने साए

  16. बहुत सुंदर जुगलबंदी । काम्बोज भाई के व रचना जी के हाइकु बहुत भाए । एक से बढ़कर एक हाइकु लगे ।बहुत बधाई ।


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