Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जून 29, 2015

मन एकाकी


1-डा.सुरेन्द्र वर्मा

1

जो ख़त्म न हो,

कहो कोई कहानी

बिता दें रात

2

पूनो का चाँद

मद्धम पड़ गए

तारे बेचारे ।

3

दिया न बाती

निविड़ अन्धकार

मन एकाकी

4

अँधेरी रात

न जाने कहाँ, क्यों,

रोती है बिल्ली

5

रात अँधेरी

चुनौती ली तारों ने

जागते रहे

6

एक अकेला

अन्धकार का अहं

तोड़ता तारा

7

ज्योति जुगनू

घुप अँधेरी  हुआ

गहरा और

8

दबंग दीया

जलते रहने की

जिद में बुझा

9

दस्तक देती

गंध, रात रानी की,

खोलो कपाट

10

डंक जुगुनू

चादर अँधेरे की

तिलमिलाई

-0-

2-ज्योत्स्ना प्रदीप

1

मै भी बदली

देख भरी बदली

छलक पड़ी

2

मिट्टी कत्थई

हरा लाचा पहन

नखरे कई

-0-

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Responses

  1. सुरेन्द्र जी के हाइकु प्रकृति के सरस रूप को महसूस करा रहे हैं.ज्योत्सना जी के आज दो ही हाइकु हैं पर दूसरा मिट्टी कत्थई……हंसी ठिठोली करता हुआ सुन्दर हाइकु है .आप दोनो के बधाई.

  2. डा. सुरेन्द्र वर्मा जी ,बहुत खूब प्रकृतिक दृश्यों को दर्शाते आप के हाइकू बहुत भाये। यह वाला तो कमल का है – दस्तक देती /गंध रात रानी की /खोलो कपाट। और ज्योत्स्ना जी आपके सिर्फ दो ही क्यों ?बहुत बढ़िया लगा -मिट्टी कत्थई /हरा लांचा पहन /नखरे कई। वधाई दोनों रचनाकारों को।

  3. ek akela ,andhkar ka aham , toData diya.bahut hi oj purN panktiyan hain. verma ji badhai.
    main bhi badali, dekh bhari badali, chhalak paDii. bahutsunder bhav.jyotsna ji badhai.
    pushpa mehra.

  4. बहुत सुन्दर हाइकु …
    ‘पूनो का चाँद’ ..और ..’डंक जुगनू ‘ ..बेहतरीन !

    ‘मिट्टी कत्थई” ..क्या नखरे हैं ..गज्ज़ब ज्योत्स्ना जी !

    दोनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई !!

  5. दबंग दीया, डंक जुगनु….. उम्दा हाइकु!
    मिट्टी कथई….बहुत खूबसूरत!
    डा० सुरेन्द्र वर्मा जी, ज्योत्स्ना प्रदीप जी…..बहुत बधाई!

  6. aadarniya dr.surendra verma ji ke haiku bahut pyare hain…poonon ka chand v eak jugnu bahut gahrai liye hai…bahut khoob!sadfr naman ke saath -saath badhai bhi .

    पूनो का चाँद
    मद्धम पड़ गए
    तारे बेचारे ।

    डंक जुगुनू
    चादर अँधेरे की
    तिलमिलाई।

  7. सुरेन्द्र जी सभी हाइकू बहुत अच्छे लगे विशेषकर एक अकेला …,दबंग दीया ,.डंक जुगनू ….,दीया न बाती….बधाई |ज्योत्सना जी आपको भी इन सुंदर रचना के लिए बधाई |

  8. sundar rachnayen

    Surendra evam Jyotsna ji ko badhai

  9. दिया न बाती
    निविड़ अन्धकार
    मन एकाकी ।

    bahut khub! meri badhai…

  10. दोनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई !!

  11. मनभावन हाइकु…बहुत बधाई…|


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