Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जून 27, 2015

साँझ बुलाती


  डॉ.विद्याविन्दु सिंह

1

कसती रहीं

कसौटियाँ हमको

खरेपन की।

2

यह उदासी

मन पर पोतती

श्यामल रंग।

3

सूनी वादियाँ

आवाज लौट आती

बस अपनी।

4

मारते रहे

दिल के करीब जो

पत्थर हाथ ले।

5

फूलों ने मारे

घाव गहरे हुए

सहते चुप।

6

निकट रहें

चाहें दूर हैं शूल

चुभते सदा।

7

जीना कठिन

रेत पर कछुवा

यही नियति।

फोटो: गूगल से साभार

फोटो: गूगल से साभार

8

धूप उतरे

ढलती दोपहर

साँझ बुलाती ।

9

मन भीतर

खारा सागर बसा

निकले आँसू।

10

मन– विहग

पिंजरा तोड़कर

उड़ता नहीं।

11

मन पहाड़

पार नहीं हो पाते

अपने दूर।

12

जीवन सोना

सबका बनाने को

मिट्टी हो गए।

13

द्वार बन्द हैं

सपने भीतर हैं

अपने बाहर।

14

चुभते रहे,

अपनों के मन में,

काँटों– से हम।

15

कुछ अपने

कुछ अपने बन

काट देते हैं।

16

महानगर

तुम थूक देते हो

भीड़ बेगानी।

17

हाथ पकड़ो

लाठियाँ नहीं रहीं

बेसहारों की।

18

आँधियाँ आतीं

उड़ाकर ले जाती

तपसाधना।

19

यशउजास

अपने न देखते

मन उदास।

20

पेड़ ताकते

हमने पेट भरा

हम सूखते।

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Responses

  1. द्वार बंद हैं/सपने भीतर हैं/अपने बाहर

    आ.डा. विद्या बिन्दु सिंह जी बहुत ही वरिष्ठ हैं। हम सभी उनका सम्मान करते
    हैं। उच्च कोटि के हाइकु के लिए उन्हें बधाई। केवल दीदी से यह जानना था कि
    5-7-5 के वर्णों में शिथिलता क्या हाइकु के भाव के आधार पर दी जा सकती है।
    ससम्मान- कैलाश बाजपेयी
    On Jun 27, 2015 10:07 AM, हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब

  2. sabhi utkrisht haaiku
    badhaai

  3. kuchh apane ,,,kuchh apane ban,kaaT dete hain.sahi kaha .vaise sabhi haiku bahut hi achhe hain badhai.
    pushpa mehra.

  4. बहुत सुंदर हाइकु एक से बढ़कर एक जीवन की हकीकत वर्णन करते। आँधियाँ आती। उड़ा के ले जाती /तप साधना। अच्छा लगा .दिल को छू गया यह भी … पेड़ ताकते /हमने पेट भरा /हम सूखते . और उत्कृष्ट यह भी। … हाथ पकड़ो /लाठियाँ नहीं रहीं /बेसहारों की / वधाई विद्याविन्दु सिंह जी।

  5. Beautiful imagination

  6. वाह ! सभी हाइकु मार्मिक एवं भाव प्रधान .
    मान्यवर, हार्दिक बधाई. प्रणाम.

  7. aap sabhi suhrid pathkon ko mera hardik aabhar…likhana tabhi safal hota hai jab sabdon ki samvedana sabka sparsh kare. aap sabki atmiyata mera sambal hai..

  8. बहुत गहन भावपूर्ण हाइकु …..जीवन सोना , हाथ पकड़ो और यश उजास बेहद प्रभावी …सादर नमन मेरा !

  9. आदरणीया विद्या बिन्दु जी ने मेरी जिज्ञासा को शान्त नहीं किया। मैं अपनी जानकारी बढ़ाना चाहताथा

  10. sundar aur sarthak hikus,

  11. मन– विहग
    पिंजरा तोड़कर
    उड़ता नहीं।

    BAHUT KHUB! BAHUT BAHUT BADHAI..

  12. वाह ! आदरणीया विद्या बिंदु जी के सभी हाइकु बहुत ही अच्छे लगे | विषय की विविधता और भाषा सौन्दर्य इन्हें और भी रुचिकर बना रहा है | बधाई आपको |

    शशि पाधा

  13. सुन्दर हाइकू…बधाई…|


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