Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जून 26, 2015

जीवन-साँझ


1-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

1

साँझजीवन-साँझ

अनुताप क्यों करें

दीप जलाएँ ।

2

सिन्दूरी साँझ

ले मादक मुस्कान

पन्थ निहारे।

3

आकुल नैन

अम्बर पट खिंचे,

गुलाबी डोरे।

4

हो गई साँझ

रिश्ते, नाते व प्यार

हुए फरार ।

5

बन्धन टूटे

बरसों रहे साथी

साँझ में छूटे।

6

साँझ सहेली !

छोड़ो ये इंतज़ार

बन्द हैं द्वार ।

7

संध्या वेला में

बहुत याद आए

अपने साए ।

8

छलिया साथी

संझा द्वारे दे गए

शूल-पोटली।

9

साँझ हो गई

पथ है अनजाना

अब आ जाओ!

-0-

2-डॉ ज्योत्स्ना शर्मा

1

दिवस चले

रजनी से मिलने

संध्या यूँ जले !

2

उदास साँझ

तरसता है तन्हा

यादों का नीड़ !

3

संध्या तापसी

चल दी है जलाने

पूजा के दीप ।

-0-

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Responses

  1. सभी हाइकु बेहतरीन हैं / बहुत अच्छे लगे । रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ जी और डॉ ज्योत्स्ना शर्मा को बधाई और शुभकामनाएं !

  2. सभी हाइकु बेहद सुन्दर!
    १. जीवन-साँझ
    अनुताप क्यों करें…
    २. साँझ सहेली !
    छोड़ो ये इंतज़ार…
    ३. उदास साँझ
    तरसता है तन्हा…
    बहुत ख़ास लगे!
    श्री काम्बोज सर और ज्योत्स्ना जी अभिनन्दन!!

  3. सांझ पर बहुत अच्छे हाइकु.संन्ध्या बेला मे
    बहुत याद आये
    अपने साये
    कम्बोज सर,अभिनन्दन
    ज्योत्सना जी का ये हाइकु..
    संध्या तापसी
    चल दी है जलाने
    पूजा के दीप.मन को छू गया.बधाई आप दोनो को.

  4. vaah kyaa khubsurat haaigaa !
    sabhi chamtkaar ki lekhani men jde haaiku
    ‘हिमांशु’ जी और डॉ ज्योत्स्ना शर्मा को बधाई

  5. हो गई साँझ
    रिश्ते, नाते व प्यार
    हुए फरार ।

    संध्या तापसी
    चल दी है जलाने
    पूजा के दीप ।

    सभी भावपूर्ण हाइकु…काम्बोज सर एवं ज्योत्सना जी को बधाई !

  6. आज साँझ के हाइकु बड़े भावपूर्ण एवं मन को छू लेने वाले हैं। हिमांशु जी … संध्या वेला में /बहुत याद आये /अपने साये /और … आशा से भरा यह हाइकु। … जीवन साँझ /अनुताप क्यों करें / दीप जलाएँ। … सच्चाई कहता यह हाइकु। … बंधन टूटे /बर्षों रहे साथी /साँझ में छूटे। ज्योत्स्ना जी बहुत भाया यह वाला। … दिवस चले/ रजनी से मिलने /संध्या यूँ जले। वधाई आप दोनों को।

  7. sanjh par kendrit haiku sabhi bahut achhe hain . jyotsna ji va kamboj bhai ji apdonon ko badhai.
    pushpa mehra.

  8. हो गई साँझ
    रिश्ते, नाते व प्यार
    हुए फरार ।
    संध्या तापसी
    चल दी है जलाने
    पूजा के दीप ।bahut sunder! katu saty ko badi khoobsurti se darshaya hai bhaiya ji aapne…….sandhya ka sundar roop.jyotsna ji ..naman hai aap dono rachnakaaron ki lekhni ko .

  9. कम्बोज जी और डॉ ज्योत्सना जी आप दोनों ने सांझ पर सुन्दर हाइकू की रचना की है सभी हाइकू बहुत अच्छे लगे विशेषकर आकुल नैन /अम्बर पट…..,और छलिया साथी …..|हार्दिक बधाई |

  10. हो गई साँझ
    रिश्ते, नाते व प्यार
    हुए फरार ।

    संध्या तापसी
    चल दी है जलाने
    पूजा के दीप ।
    bahut sunder aapdono ko badhai
    rachana

  11. अनुताप क्यों करें। जीवन की बहुत बड़ी सीख समेटे हुए हायकु।
    बहुत उम्दा हाइकु सारे के सारे।

  12. बन्धन टूटे
    बरसों रहे साथी
    साँझ में छूटे।

    हो गई साँझ
    रिश्ते, नाते व प्यार
    हुए फरार ।

    bahut hi bhawpoorn haiku bhaiya n jyotsna ji 🙂

  13. जीवन साँझ
    अनुताप क्यों करें
    दीप जलाएँ।

    हो गई साँझ
    रिश्ते, नाते व प्यार
    हुए फरार।

    संध्या तापसी
    चल दी जलाने
    पूजा के दीप।
    बहुत भावपूर्ण हाइकु! आप दोनों को बधाई!

  14. परम श्रद्धेय हिमांशु जी एवं आदरणीय बहिन डा. ज्योत्स्ना शर्मा जी ,
    कई दिनों बाद आप दोनों के हृदयस्पर्शी उम्दा हाइकु पढ़कर
    मन को सुकून मिला | आप दोनों को हार्दिक बधाई |
    साथ ही मेरा विनम्र प्रणाम स्वीकारें |

  15. मानवीय संवेदनाओं की गहरी परख के साथ उनकी बहुत सुन्दर मर्मस्पर्शी प्रस्तुति है …
    ‘जीवन साँझ’ …’बंधन टूटे ‘..और …’हो गई साँझ ‘..अनुपम !
    सादर नमन आदरणीय काम्बोज भैया जी !!

    मेरी रचनाओं को यहाँ स्थान देने के लिए संपादक द्वय के प्रति और उत्साह वर्धक प्रतिक्रियायों के लिए आप सभी सुधिजनों के प्रति हृदय से आभार !

  16. सभी हाइकु बेहतरीन हैं

  17. हो गई साँझ
    रिश्ते, नाते व प्यार
    हुए फरार ।
    बहुत गहरी बात कही है…| सार्थक और सटीक हाइकु…| बधाई…|

    उदास साँझ
    तरसता है तन्हा
    यादों का नीड़ !
    बहुत मर्मस्पर्शी…| बधाई…|


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