Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जून 23, 2015

श्यामल आँखें


2015-06-16-07-19-45-1306835900

2-सपना मांगलिक

1

रश्मि सीढ़ियाँ

चढ़ गगन जाऊँ

हाथ न आऊँ ।

2

बैठ बादल

उड़नतश्तरी मैं

छू लूँ गगन ।

3

नैन मटक्का

चले आड़ नभ की

धरा- चाँद का ।

4

नभ प्लेट में

रखे मेघ बताशे

खा धरा खाँसे ।

5

लौटके आ रे

मेहमान नभ के

नीड़ पुकारे ।

6

सौम्य कितना

जीत लेता है मन

नीला गगन ।

7

कहता नभ-

‘रखो दुनिया ढक

छा जाओ ऐसे।’

8

श्यामल आँखें

नभ की रिमझिम

नीर बहाएँ ।

9

नभ आँचल

खेलें गिल्ली व डंडा

सूरज –चंदा ।

10

तारों की टोली

चाँद की हमजोली

रवि से कट्टी ।

11

टूटा नभ से

चमकीला सितारा

दुखी बेचारा ।

12

उल्टा लटका

घमंड हुआ चूर

नभ बेचारा ।

13

देखें नभ को

पथरा गई आँखें

लौट आ मेघा ।

14

बूढ़े माँ बाप

अलग-थलग से

नभ ओ धरा ।

15

अम्बर- साथी

धरा के बाराती

मेघदूत ये ।

16

नभ बिखेरे

तारों की फुलझड़ी

निशा सुन्दरी ।

17

नभ मंडल

भर नयन तारे

धरा निहारें ।

18

धूप -तूलिका

उकेरे बारिश में

नभ धनुष ।

19

चूमे पर्वत

चुपके से अम्बर

लाज न डर !

20

मेरे हिस्से का

दे दो ये मुठ्ठी भर

नीला आकाश ।
21

ऊँचाई पे तू

क्यूँ करता है गुमाँ

मूर्ख आसमाँ !

22

ओढ़ी धरा ने

सितारों जड़ी झीनी

नीली चूनरी ।

23

नभ को छू लूँ

कहे मन बाबरा

पाखी बनादो !

24

चाँद का झूला

नभ डार मैं डालूँ

मल्हार गा लूँ ।

25

पिता के जैसे

हाथ रखता नभ

हमारे सर ।

26

टँगी है ऊँची

धरा कैसे उतारे

नीली चूनर ।

-0-

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Responses

  1. ये हाइगा और सभी हाइकु बेहतरीन हैं / बहुत अच्छे लगे । डॉ ज्योत्स्ना शर्मा और सपना मांगलिक जी को बधाई औ र शुभकामनाएं !

  2. jyotsna ji kaa haaiga bahut hi sarthak aur manmohak hai .badhai

  3. हाइगा और सभी हाइकु ne rupkon , upmaaon se sje . badhai

  4. bahut-bahut aabhaar sampaadak dway 🙂

    chaand ka jhoolaa , pita ke jaise .., niilii choonar …bahut sundar haiku !
    haardik badhaii Sapana ji !!

  5. sabhi haiku aur jyotsna ji ka haiga bahut achha hai sapnna va jyotsna ji ko badhai.
    pushpa mehra.

  6. धरा के लिए आया सात लड़ा हार बहुत सुंदर हाइगा लगा। वधाई ज्योत्सना जी।
    सपना तुम्हारे हाइकु नई बिम्ब माला लेकर आये। बहुत भाये। तुम्हे भी वधाई।
    अधिक मोहक ये लगे –
    तारों की टोली /चाँद से हमजोली /रवि से कट्टी।
    टँगी है ऊँची। धरा कैसे उतारे /नीली चुनरी।
    बूढ़े माँ बाप /अलग थलग से /नभ औ धरा।

  7. बहुत सुन्दर हाइगा।
    बहुत अच्छे हाइकु ।दोनों को हार्दिक बधाई।

  8. sundar haiga,haiku badhai…

  9. बूढ़े माँ बाप
    अलग-थलग से
    नभ ओ धरा ।

    नभ को छू लूँ
    कहे मन बाबरा
    पाखी बनादो !

    और भी सभी रचनाएँ सुन्दर, बधाई एवं शुभकामनायें

  10. लाये सजन,……………सुन्दर रचना

    बधाइयाँ, शुभकामनायें

  11. jyotsna ji satlada harve ne man moh liya aur sapna lji …bahut sunder haiku … bahut sunder haiga !
    बूढ़े माँ बाप
    अलग-थलग से
    नभ ओ धरा ।…vaah kya baat!badhai aap donon rachnakaaron ko .

  12. बहुत सुन्दर हाइगा।
    बहुत अच्छे हाइकु ।दोनों को हार्दिक बधाई।

  13. बहुत सुन्दर हाइगा…बधाई…|

    टँगी है ऊँची
    धरा कैसे उतारे
    नीली चूनर ।

    तारों की टोली
    चाँद की हमजोली
    रवि से कट्टी ।
    बहुत मनभावन…हार्दिक बधाई…|


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