Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 22, 2015

कौंधी दामिनी


1-डॉ सुधा गुप्ता

1-Ammaji 18-06 - Copy

-0- 

2-अनिता मण्डा

1

टिका रखती

दहलीज़ पर आँखें

संध्या दीवानी।

2

काँपते हाथ

संध्या धूप– पूजन

अकेलापन।

3

साँझ देखती

दिन-रैन मिलन

स्निग्ध छुअन।

4

समेट पाँखें

घर आते परिंदे

मुस्काती आँखें।

5

संध्या -सुन्दरी

तारों में स्नेह भर

जलाती दीप।

6

बुलाती चाँद

साँझ कर इशारे

साथ में तारे।

7

गुजरी शाम

चौंकते आहटों पे,

आँखें राहों पे।

8

जीवन-साँझ

बही दृग– कोरों से

जल की धारा।

9

ढलती साँझ

सूरज में भी देखो

बुझती आँच।

10

साँझ होते ही

नंगे पैरों से भागें

रवि किरणें।

11

जीवन बीता

बीतती नहीं शामें

इंतजार की।

12

डूबी है साँझ

सागर के किनारे

फिर से आज।

13

देकर ख़्वाब

साँझ पानी में घुली

चमकी झील।

14

खिलती साँझ

नववधू नैनों में

लाज के डोरे।

15

खुली छत पे

साँझ उतरती है

दबे पाँव से।

16

सूरज है थका

साँझ के काँधे पर

सिर टिकाया।

17

नाचे मनवा

साँझ करे  सिंगार

पिया मिलेंगे।

18

खेवन हार !

जीवन– सांध्य बेला

उतारो पार ।

19

झुकी हुई है

साँझ की भी कमर

लम्बे हैं साये।

20

जिद्दी सूरज

सुने नहीं साँझ के

मन की बात।

21

हँसी ठिठौली

साँझ पनघट की

पनिहारियाँ।

22

साँझ उदास

भोर वाले परिंदे

बैठे न पास।

23

साँझ का हाथ

थाम के आई रात

रही न साथ।

-0-

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Responses

  1. aa . didi sudhaa ji ke haiku to gaagar men saagr bharte haen
    anitaa ji ki sundr abhvykti

  2. आदरणीय सुधा गुप्ता दीदी की हस्तलिपि से बिखरे अमूल्य मोती के लिए शब्द कहाँ से लाऊं ? विस्मित सी उनके भावों की नदी में मैं भी लहरों सी बस बहती ही जाऊँ…नमन दीदी !
    अनीता मंडा जी आपको भी बधाई… अच्छे हाइकु हैं !

  3. परम पूजनीय डॉ. सुधा गुप्ता जी का हस्तलेख calligraphy जैसा अप्रतिम सुन्दर है।
    किसी शायर का कहा “तुम सामने भी हो और मुखातिब भी,
    तुमसे बात करूँ या तुम्हे देखूँ ” याद आ गया .…
    समझ नहीं पा रहा कि लेख ज़्यादा कलात्मक है या लेखनी !
    शब्दों की बनावट ने कथ्य तक जाने में अवरोध उत्पन्न किया…
    सादर नमन!

  4. सदा की तरह सभी सुन्दर,अनुपम हाइकु …लेकिन ..’मीना बाज़ार’ , ‘परियाँ’ , ‘सतरंगी साड़ी’ …बेहद ख़ूबसूरत ! आदरणीया दीदी और उनकी लेखनी को सादर नमन !!

    ‘लाज के डोरे’ , ‘थका सूरज’ , ‘नाचे मनवा ‘ ..बहुत सुन्दर बिम्ब उकेरे अनिता जी !
    हार्दिक बधाई ! शुभ कामनाएँ !!

  5. मेरे हाइकु को यहां स्थान देने के लिए हार्दिक आभार।

    सुधा दीदी बेहद खूबसूरत हाइकु ।नमन।

    मंजू गुप्ता जी,डॉ.सरस्वती माथुर जी,ज्योत्स्ना शर्मा जी
    आप सभी का हार्दिक आभार।

  6. आदरणीया सुधा दीदी तथा अनीता मंडा जी बेहतरीन, मनमोहक हाइकु…… हार्दिक बधाई!

  7. सुधा जी के सुन्दर हाइकु सुंदर लिखाई में पढ़ कर डबल आननद मिला। बहुत बढ़िया सुधा जी वधाई ।
    और अनिता माण्डा जी की साँझ का आना जाना सजना सवंरना पनघन पर हंसी ठिठौली सब भा गई तुम्हे भी बहुत वधाई ।बडिया लेखन ।

  8. Sudha ji ka javab nahi hamesha ki trha…anita ji ke haiku bhi bahut achhhe lage meri shubhkmanye…

  9. bahut khoob! …..”meena bazaar”,pariyaan’ ‘,satrangi saadi’…manmohak saath hi….” laaj ke dore,” ‘thaka suraj’ ,”naanche manva”..ne bhi man moh liya aadarniya sudha ji tatha anita ji ko sadar naman ke saath-saath badhai!

  10. आदरणीया सुधा जी के मोती जैसे अक्षरों में, उनके हस्तलिखित इन सारे हाइकु को तो सहेज कर अपनी डायरी में रख लेने का दिल करता है | हमेशा की तरह मुग्ध ही रह गयी…| उनको नमन, बधाई और बहुत आभार…हमें इतना आनंदित करने के लिए…|

    अनीता जी, आपके हाइकु भी कमाल होते हैं | मेरी हार्दिक बधाई स्वीकारें…|


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