Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जून 21, 2015

नभ उलीचे


1-मंजु शर्मा

1

तुहिन मोती

जमीं पर चमके

नभ उलीचे

2

 नहाए पत्ते

पहली बारिश में

मादक सृष्टि

3

नभ उड़ेले

ख़ुशी से नीर कण

मेघ ज्यों हर्षे

4

 चाँद आ गया

बन कर सजना

तारे बाराती

5

तृष्णा के  पंख

बाँध पहुँचा मन

परी लोक में

6

नभ का चन्दा

 रूप धर सजना

अंक समाया।

-0-

2-विजय आनंद

1

मृत्यु मंज़िल

ज़िंदगी राजपथ

वक़्त सारथी ।

2

जीवन नदी

मृत्यु महासागर

वक़्त प्रवाह ।

3

डूबे- उबरे

लहरों सी ज़िंदगी

तृषा भँवर

4

दिल के ज़ख़्म

समय चिकित्सक

दवा अमोघ

5

तपता सूर्य

घनी पीपल छाँव

चीखा सन्नाटा

-0-

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Responses

  1. विजय आनंद के जीवन मृत्यु वाले हाइकु एक से एक सत्य से साक्षात कराते। … जैसे -जीवन नदी /मृत्यु महासागर /वक्त प्रवाह। … मृत्यु मंजिल /जिंदगी राजपथ /वक्त सारथी।
    मंजु शर्मा के प्राकृतिक सौंदर्य से ओतप्रोत भी उत्तम बन पढ़ें हैं। … नहाये पत्ते /पहली वारिश में /मादक सृष्टि।
    नभ उँड़ेले /ख़ुशी से नीर कण /मेघ ज्यों हर्षे। वधाई दोनों को।

  2. jeevan nadi….,nahaye patte….., bahut suder manju va vijay anand ko badhai.
    pushpa mehra.

  3. बहुत सुन्दर बिम्बों का प्रयोग हुआ है…| आप दोनों को हार्दिक बधाई…|

  4. हाइकु पसंद करने और टिप्पणी करने के लिए आदरणीय kamla जी , pushpamehra जी , प्रियंका गुप्ता जी ,आप सब का हार्दिक आभार ( विलम्ब से उपस्थिति के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ )


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