Posted by: हरदीप कौर संधु | जून 20, 2015

सागर -सीना


1-डॉ भावना कुँअर

1

सागर-सुशीलाखारा पानी भी

मीठा हो गया आज

पिया जो साथ।

2

थामा जो हाथ

सागर का सीना भी

धड़क उठा ।

3

लहरों जैसी

मचल रही यादें

हौले-हौले से।

4

लहरें आतीं

कानों में मीठा कुछ

घोल -सा जातीं।

5

जाकर बैठी

मेरे गालों की लाली

लहरों पर।

6

सागर -सीना

पाकर लालिमा को

खिल -सा उठा।

7

सदा ही रहे

सागर -सा गहरा

प्यार हमारा।

8

सिंदूरी शाम

मचलता सागर

मेरे मन -सा।

9

छलक उठीं

सागर की पलकें

देख ये प्यार।

10

ढलती शाम

चुरा ले गई लाली

मेरे गालों की ।

-0-

मंजु गुप्ता

1

ईश सृष्टि है

सागर  – सी गहरी

कोई न जाने।

2

चाँद का बिम्ब

लगे   बर्फ  का गोला

सिंधु उर्मि पे।

3

गहरा सिंधु

 जाल में फँसी मीन

फिर भी प्यासी ।

4

बगुले – हंस

क्रीड़ा करें, मोहते

सिंधु स्वर से ।

5

अम्बुधि ओढ़े

तरंगों की ओढ़नी

झाग शय्या पे।

6

 दिवस -रैन

लहरें करती  योग

सिंधुशाला में। 

7

सागर संग

तार- तार हो गई

मन की वीणा।

8

 सागर– रथ

सवार हो उर्मियाँ

करें  भ्रमण ।

9

सागर  देव !

प्यास सूखे अधर

रस से  भर।

10

खारा सागर

कभी नहीं हो मीठा

मृदु गंगा से । 

11

मन का चाँद

ज्वार-भाटे में फँस

भटका जाए । 

12

मन सिंधु में

तूफानों का सैलाब

खोलता राज । 

13

हैय्या हो हैय्या

गाएँ जो  मछुआरे

झूमे सागर। 

-0-


Responses

  1. लहरों जैसी
    मचल रही यादें
    हौले-हौले से।
    बहुत सुंदर हाइकु… भावना कुँअर, जी बधाई !

    हैय्या हो हैय्या
    गाएँ जो मछुआरे
    झूमे सागर।
    बहुत खूब… मंजु गुप्ता जी बधाई !

  2. बेहद सुन्दर हाइकु !
    विशेष लगे :
    १. खारा पानी भी
    मीठा हो गया आज
    पिया जो साथ।
    २. मन का चाँद
    ज्वार-भाटे में फँस
    भटका जाए ।
    भावना जी , मंजु जी अभिनन्दन!!

  3. sagar par adharit sabhi haiku bahut hi sunder bhav liye hain .bhavna ji va manju ji
    ap dono ko badhai.
    pushpa mehra.

  4. ‘छलक उठीं ‘ , ‘खारा पानी भी ‘ , ‘मन का चाँद’ ..बहुत सुन्दर हाइकु !
    हार्दिक बधाई भावना जी एवं मंजु जी !!

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

  5. आज सुदर्शन रत्नाकर ,डा भावना ,पुष्प मेहरा ,मंजु गुप्ता के हाइकु पढ़ने को मिले एक से बढ़ कर एक। जो मन में बस गए हैं – धरती काँपी/पाँव उखड गए /पर्वत के भी। … दरक रहे /काँच से पर्वतों के /कठोर दिल। … दिवस रैन /करती योग /सिंधु शाला में और वीरां हैं गाँव /ऊंघ रहीं घाटियाँ /सोये है चूल्हे। सब को वधाई।

  6. vidvatjnon ka haardik aabhaar ,
    डॉ भावना कुँअर ji ki sndr prastuti .
    badhai .
    1

  7. सागर जैसे जीवन मे सागर जैसी उमंगें चाहिए ! Badia.d

  8. भवना जी का… खारा पानी भी, मंजु जी का… मन का चाँद बहुत सुन्दर हाइकु! आप दोनो को बधाई!

  9. सभी हाइकु बेहतरीन हैं / बहुत अच्छे लगे । डॉ भावना कुँअर जी और मंजु गुप्ता जी को बधाई और शुभकामनाएं !

  10. सभी हाइकु बहुत ही सुंदर एवं भावपूर्ण !
    खारा पानी भी
    मीठा हो गया आज
    पिया जो साथ

    मन का चाँद
    ज्वार-भाटे में फँस
    भटका जाए ।
    —मन को छू गए ।

    हार्दिक बधाई भावना जी व मंजु जी !
    ~सादर
    अनिता ललित

  11. Sabhi ka hrdaya se aabhar…

  12. खारा पानी भी
    मीठा हो गया आज
    पिया जो साथ।

    छलक उठीं
    सागर की पलकें
    देख ये प्यार।
    भावना जी…आज किसी एक हाइकु को चुन पाना तो बहुत कठिन कर दिया आपने…सभी एक से बढ़ कर एक…हार्दिक बधाई…|

    मन का चाँद
    ज्वार-भाटे में फँस
    भटका जाए ।
    बहुत बढ़िया…बधाई…|


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