Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 20, 2015

कराहते पर्वत


  1सुदर्शन रत्नाकर

1

सुनो तो ज़रा

कराहते पर्वत

कटे हैं वन ।

2

झील-2नदी निकली

पर्वत की कोख से

धरा से मिली ।

3

पर्वत पर

मँडराते बादल

ढूँढे जीवन ।

4

धरती काँपी

पाँव उखड़ गए

पर्वत के भी ।

5

ज़रा सुनो तो

कराहते पर्वत

कटे हैं वन ।

-0-

2-पुष्पा मेहरा          

1

 दरक रहे

 काँच से,पर्वतों के

 कठोर दिल।

2

 आकुल नदी

 बंधन-बँधे पाँव

 थिरकें कैसे !

3

 हुआ हमला

 आत्मघाती घन का

 उड़े पखेरू ।

 4

 तड़प रहीं

 ज़ख्मी ज़िन्दगानियाँ

 बही है पीड़ा ।

5

 किसने छीनी

 वो मधुर रागिनी

 धरा की हँसी !

6

 वीरान हैं गाँव

 ऊँघ रहीं घाटियाँ

 सोए हैं चूल्हे ।

7

 झुकी कमर

 कर्म की गठरी ले

 गोरी ना थकीं ।

 8

 सीली सीढ़ियाँ

 सोखने को आतुर

 मन  के  आँसू । 

-0-

 पुष्पा मेहरा, बी-201, सूरजमल विहार

 दिल्ली-92 फ़ोन : 011-22166598

-0-

3-कमला  घटाऔरा

1

पर्वत शिशु

देखने को उछलें

दौड़ते घन।

2

बर्फ गुफा में

तप करें पर्वत

हित धरा के।

3

मौन क्षितिज

देखे विवश खड़ा

तपी पर्वत ।

4

नन्हे पर्वत

चाहें करना स्पर्श 

कैसा है नभ।

5

काले बादल

रूप धर पर्वत

करें ठिठौली  ।

6

नदीझरनों !

पर्वतपिता आज्ञा

बाँटो अमृत।  

7

चाहो ऊँचाई –

पहले धरा पर

पाँव टिकाओ ।

-0-

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Responses

  1. सभी हाइकु सुंदर
    सुनो तो ज़रा
    कराहते पर्वत
    कटे हैं वन ।…सुदर्शन रत्नाकर ॥अति सुंदर
    वीरान हैं गाँव
    ऊँघ रहीं घाटियाँ
    सोए हैं चूल्हे ।…पुष्पा मेहरा ॥बहुत बढ़िया

    मौन क्षितिज
    देखे विवश खड़ा
    तपी पर्वत । …कमला घाटाऔरा॥ बहुत खूब

  2. सभी हाइकु बेहद सुन्दर !
    सब रचनाकारों का अभिनन्दन!!

  3. suno to zara, karahte parvat, kate hai van.maun xitij ,dekhe vivash kha.Da ,tapi
    parvat.sudershan ji va kamla ji bahut sunder haiku hain.ap dono ko badhai.mere haiku ko is post me.n sthan dene ke liye bhai ji apko dhanyavad.
    pushpa mehra.

  4. ‘karaahate parvat’ , ‘aakul nadi ‘ , ‘maun kshitij ‘ bahut bhaavpoorn …marmsparshii haiku !

    haardik badhaaii aadaraneeyaa ratnaakar di , pushpa ji evam kamala ji ..saadar naman !

  5. सुदर्शन रत्नाकर , पुष्पा मेहरा , कमला घटाऔरा ji ki sundr prastuti .
    badhai .

  6. रामेश्वर काम्बोज हिमांशु जी एवं हरदीप सन्धु जी मुझे आज के हाइकु लोक में स्थान देने के लिए आभार एवं बहुत बहुत धन्यवाद यह मेरे लिए हौंसला बढ़ाने वाली बात है।

  7. सुदर्शन जी, पुष्पा मेहरा जी, कमला जी को खूबसूरत हाइकुओं के लिए बधाई!

  8. सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे । सुदर्शन जी, पुष्पा मेहरा जी एवं कमला जी को बधाई और शुभकामनाएं !

  9. सभी हाइकु बहुत सुंदर ! विशेषकर–
    धरती काँपी
    पाँव उखड़ गए
    पर्वत के भी ।

    सीली सीढ़ियाँ
    सोखने को आतुर
    मन के आँसू ।

    चाहो ऊँचाई –
    पहले धरा पर
    पाँव टिकाओ ।

    बहुत अच्छे लगे !

    हार्दिक बधाई सुदर्शन दीदी, पुष्पा जी, कमला जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  10. ज़रा सुनो तो
    कराहते पर्वत
    कटे हैं वन ।

    पर्वत शिशु
    देखने को उछलें
    दौड़ते घन।

    आकुल नदी
    बंधन-बँधे पाँव
    थिरकें कैसे !

    Bahut sundar! dard ko pahchante haiku hardik badhai…

  11. प्रकृति भी रोती-कराहती है…बस कोई सुनने वाला हो…| बहुत सार्थक हाइकु…बधाई…|

  12. वीरान हैं गाँव
    ऊँघ रहीं घाटियाँ
    सोए हैं चूल्हे ….. In chand shabdon me vyatha ka kitna vistrit varnan hai… Haiku vidha ka sateek udaharan


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