Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जून 19, 2015

बुच्चे पहाड़


1-कुमुद बंसल

1

मानव-अग्नि

दावानल बनके

वन दहके।

2

फोटो डॉ नूतन गैरोला
फोटो डॉ नूतन गैरोला

पर्वत, वन

वादियों नदियों को

ढूँढता मन ।

3

गिरि निष्प्राण

हमसे माँग रहे

थोडा सम्मान ।

-0-

2-सुभाष लखेड़ा

1

काटे जंगल

ठेकेदारों ने किए

पहाड़ नंगे।

2

रोकी नदियाँ

बही अविरल जो,

लाखों सदियाँ।

3

हिले पहाड़

उनकी ये दहाड़

गौर से सुनो।

4

कैसा विकास!

पहाड़ों का इससे

हुआ विनाश।

5

ये छेड़छाड़

आखिर क्यों सहेंगे

ऊँचे पहाड़।

6

बोले पहाड़ –

अब ये चीरफाड़

बंद कीजिए ।

-0-

3-कृष्णा वर्मा

1

लेटा मिलेगा

देश का इतिहास

चट्टान -ओट।

2

शांति के पुंज

प्राणमय पहाड़

हुए निष्प्राण।

3

शैल की छाती

एक मूक गर्जन

छटपटाती।

4

रोए दहाड़

लुटे तस्करों से जो

नंगे पहाड़।

5

पेड़ों का कत्ल

मायूसी ओढ़े खड़े

काले पहाड़।

6

ढोर- डंगर,

ना तन पे जंगल

बुच्चे पहाड़।

7

झींकें पहाड़

हमारी संपदा को

किया कबाड़।

8

अरे अबोध

कुल्हाड़ी के वार का

करो विरोध।

9

मौन पहाड

बीहड़ हवाएँ आ

कहें कथाएँ।

10

मधुर स्वर

झरते पहाड़ों की

ठंडी खोहों से।

-0-

4-सपना मांगलिक 

1

ये भू संपदा

असली है खजाना

भूल न जाना ।

2

पर्वत घटा

हरित पृथ्वी छटा

कल क्या होंगे ?

3

 छलके पीर

पर्वत की आँखों से

बनके नीर ।

4

आहें कराहें

गिरी हुई शिलाएँ

शाप हैं देती ।

5

बचो तुरंत

केदार सा ही होगा

सदी का अंत ।

6

सूरज की डोर

साधे गिरी निशाना

तोड़ने भोर

7

गिरी पे उष्मा

ग्लेशियर भी पिघले

चैन कहीं न ।

8

तपे धरती

गिरि बहा दो जल

कंठ विकल

9

बाहों में नभ

ले अरावली कहे

लगा लो अंक ।

10

रास्ता दुर्गम

थके नहीं कदम

पर्वत पार ।

11

धरा  क्यों गर्म

सब तेरे ही कर्म

ओजोन कम ।

12

लूटी मैं सदा

मनुज सुविधा ने

कहे वसुधा ।

13

सुन्न है धरा

सुन्न नभ समीर

चीखे प्रकोप।

14

तरु पक्षी से

लिपट के सुबके

मित्र विदाई                                     

-0-

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Responses

  1. parvat par likhe sabhi haiku manbhavan hai .aadarniya kumud ji ,krishna ji ,sapna ji tatha subhash ji ko naman ke saath- saath badhai bhi .

  2. सभी हाइकु बेहद सुन्दर!
    सब रचनाकारों का अभिनन्दन!!

  3. lakhera ji kumud ji bahut badhiya haaiku

  4. sbhi utkrisht haaiku bhaavon men phaad – se vishaal

  5. पहाड़ों की मनोव्यथा को कहते सुन्दर हाइकु !

    सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई !!

  6. पर्वत, वन, धरा , नदियाँ … सभी की व्यथा सुनाते हाइकु…. बहुत सुंदर !
    सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई !

    ~सादर
    अनिता ललित

  7. बहुत सुंदर हाइकु।बधाई।

  8. sabhi haiku bahut sunder hain .sabhi ko badhai.
    pushpa mehra.

  9. पर्वत पीर
    शब्द शब्द बाँधते
    सिहरे धीर |

    नदियाँ ढूँढें
    कहाँ खोया अँगना
    बाबुल घर |

    आप सब के हाइकु पढ़ कर यही भाव मन में उभरे | बहुत ही सुन्दर , मार्मिक अभिव्यक्ति | बधाई आप सब को |

  10. बुच्चे पहाड़ शीर्षक से आज पहाड़ों, जंगलों,धरा और ओजोन का ज़िकर इन हाइकुओं में उन की अथाह व्यथा कह गया।
    … कुमुद बंसल , सुभाष लखेड़ा ,कृष्णा वर्मा ,सपना मांगलिक सब वधायी के पात्र हैं। इतने सुंदर हाइकुओं की रचना करके।
    कैसा विकास /पहाड़ों का इससे /हुआ विनाश । जो इतनी सम्पदा का दाता है उसी का यह हाल … दुःख की है बात। और कुमुद जी, आपने भी गिरि निष्प्राण/ हम से माँग रहे/ थोड़ा सम्मान … अच्छी बात कही और सपना तुम ने भी अच्छा कहा । .… आहें कराहें/ गिरी हुईं शिलाएँ /शाप हैं देती।

  11. सभी हाइकु बहुत मनभावन !सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई !

  12. कैसा विकास!
    पहाड़ों का इससे
    हुआ विनाश।

    पेड़ों का कत्ल
    मायूसी ओढ़े खड़े
    काले पहाड़।

    ये भू संपदा
    असली है खजाना
    भूल न जाना ।

    Arthpurn sabhi haiku bahut bahut badhai…

  13. सभी हाइकु बहुत सुन्दर हैं बधाई ।

  14. पहाड़ो की शोचनीय स्थिति…उनकी मौन पीड़ा को मानो ज़बान मिल गई इन हाइकु से…| आप सबको हार्दिक बधाई…|


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