Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 19, 2015

पहाड़ जागे


1-डॉ सरस्वती माथुर

1

फोटो डॉ नूतन गैरोला

फोटो डॉ नूतन गैरोला

पहाड़ जागे

सूरज ने बजाई

धूप की घंटी ।

जल- तांडव

पहाड़ों पे करता

धरा उतरा ।

पहाड़ ओढ़ 

बर्फ की चादर को

समाधि साधे ।

4

हवा के सुर

मौन पहाड़ों पर

गीत बुनते  । 

5

सर्द हवाएँ

हिम-शिखरों पर

ढूँढे अलाव ।

6

मरु ने ओढ़ी

धौलाधार चाँदनी

रात निखरी ।

7

रत्नगर्भा हैं

पहाड़ों की चट्टानें

हमें पुकारें ।

8

जीना सिखाए

पहाड़ी पगडंडी

 राह दिखाए ।

9

पहाड़ चीखे

झरणे बह कर

बिखरे सारे ।

10 

गहरी खाई

पहाड़ों के दर्द से

 कसमसाई ।

11

पहाड़ी घाटी

मौन रह कर भी

बातें करती ।

12

पहाड़ों पर

सुरमई हो जाती

 उनींदी धूप ।

13

बर्फ के फाहे

पहाड़ों की घाटी में

पाखी -से उड़े ।

14

झरना बहा  

पहाड़ों की गोद भी

 हरी हो गयी   ।

15

पंख  फैलाती

शिखर पे पाखी -सी

धूप उतरी ।

16

झरने बुन

पहाड़ों पे हवाएँ

बर्फ कातती ।

17

पहाड़ -वन 

आदिवासियों का हैं

जीवन धन ।

-0-

2-डॉ कविता भट्ट

1

दैवीय नहीं

भयावह आपदा

मानव कृत

2

धरा कुपित

रुदन चहुँ ओर

अम्बर क्रुद्ध

3

निष्ठुर हुए

शैल पिता, नदी माँ

पाप-संताप

4

निष्प्राण मान

पर्वत का हृदय

छेदे मानव

5

रोई नदी माँ

अश्रुधार से ढहे

गर्व महल

6

अभिलाषाएँ-

विष-वृक्ष तने की

अमरबेल ।

7

प्रफुल्लित है

उन्मुक्त शिखर -सी

आत्मा की लाश

8

विलाप हुआ,

भयावह रूप तो

अभी है बाकी ।

9

किसको कोसे

हर शिला के नीचे

भुजंग बसे ।

-0-

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Responses

  1. गहरी खाई
    पहाड़ों के दर्द से
    कसमसाई ।sarswati ji aapke sabhi haiku bahut pyare hai .’..gahari khai’ ne to man moh liya ….naman ke saath -saath badhai aapko .

  2. सभी हाइकु बेहद सुन्दर!
    सरस्वती जी, कविता जी अभिनन्दन!!

  3. sbhi utkrisht haaiku bhaavon men phaad – se vishaal

  4. सरस्वती जी ,बहुत ही अच्छे हाइकु हैं आपके.बहुत-बहुत बधाई

  5. parvaton ki manoram kathaa aur manovyathaa dono ko sundarataa se kahaa aapane !

    Dr. saraswati ji evam dr. kavita Bhatt ji ko bahut badhaaii !!

  6. बहुत सुन्दर हाइकु…सरस्वती जी, कविता जी बधाई!

  7. sabhi haiku bahut hi sunder hain sarasvati ji vakavita ji apako badhai.
    pushpa mehra.

  8. धन्यवाद एवं आभार, आप सभी पाठको का,
    मेरी रचनाओ के साथ प्रकाशित सरस्वती जी के हाइकू भी सुन्दर

  9. पहाड़ जागे
    सूरज ने बजाई
    धूप की घंटी ।

    किसको कोसे
    हर शिला के नीचे
    भुजंग बसे ।

    Bahut sundar ! bahut bahut badhai…

  10. पहाड़ जागे
    सूरज ने बजाई
    धूप की घंटी
    बहुत सुन्दर…बधाई स्वीकारें |

    दैवीय नहीं
    भयावह आपदा
    मानव कृत
    कटु सत्य दर्शा दिया आपने…बहुत बधाई…|


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