Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 18, 2015

सुन्न पहाड़!


1-अनिता ललित

फोटो: निहित सक्सेना

फोटो: निहित सक्सेना

1

भोर किरणें

लहरों पे मचलें

करें किलोलें।

2

भूली है राह

झील की पनाहों में

थमी है रात।

3

बहकी हवा

झील मचल उठी

लहरें हँसी।

4

सुन्न पहाड़!

अब चोट खाने की

आदत हुई।

5

झील में देखे

उजड़ा हुआ रूप

गिरि उदास।

6

छिपा न पाती

पैबंद लगी साड़ी

शर्मिंन्दा घाटी।

7

बेबस चीड़

बढ़ाने को तत्पर

घाटी का चीर।

8

न माँग-टीका-

बिन निर्झर घाटी-

सिंगार फीका।

9

कहे कहानी

पहाड़ों के गालों पे

आँसू निशानी।

10

हरे फ़र की

केले छबीले

हरे फ़र की टोपी

गिरि पहने ।

-0-

2-डॉ नूतन गैरोला

1

धरा में सदा

रहे बसंत खिला

रोको दोहन।

2

पहाड़ पर

आपदा की सुनामी

सीख सिखाएँ

3

इतिहास में

जज्ब जो सभ्यताएँ

कुछ बताएँ ।

4

छाया: अनिता ललित
छाया: अनिता ललित

करें सम्मान

पर्यावरण का तो

पीढ़ियाँ सजें ।

5

बुग्याल हरे

निर्झर झर झरे

पर्वत सजे ।

6

नाचे मगन

बाँसुरी की तान पे

पर्वतजन।

-0-

3-अनिता मण्डा

1

अति दोहन

करतब इंसाँ के

भोगे पर्वत।

2

धुँआँ-धुँआँ- सा

हुआ पर्वत हिया

सूखी नदियाँ।

3

लूटी सम्पदा

पहाड़ नंगे हुए

लुप्त नदियाँ।

4

मेरु हिय में

पर्वत -सी पीर

बनती नीर।

5

पीर पर्वत

पिघल बनी नदी

सींचा सबको।

6

सहा दोहन

पथरा ही गए हैं

पर्वत सारे।

7

खोई चेतना

पर्वत पर भारी

लोभ का नशा।

8

ले आये बाढ़

सिसकते पहाड़

वक़्त है जाग।

9

मूढ़ बादल

सागर पे बरसे

धरा तरसे।

10

सुमेरु– पुत्री

सिंधु– हिय समाने

चली सलज्ज।

11

छाया: निहित सक्सेना

छाया: निहित सक्सेना

नदी का नीर

पहाड़ धोए पैर

चरणामृत।

12

शीत लहर

संत हुए पहाड़

बर्फ़ लिबास।

13

फूटे झरने

पहाड़ की कोख से

गाएँ हवाएँ।

14

टँगा हुआ है

पर्वत पे आकाश

छोड़ो न आस।

15

फैलाके बाहें

कोहरा पर्वत को

आगोश में ले ।

-0-

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Responses

  1. सुन्न पहाड़!

    अब चोट खाने की

    आदत हुई।…अद्भुत अनिता जी ..बहुत बधाई !

    करें सम्मान

    पर्यावरण का तो

    पीढ़ियाँ सजें ।…सुन्दर सन्देश नूतन जी ..अभिनंदन !

    मूढ़ बादल

    सागर पे बरसे

    धरा तरसे।..कटु यथार्थ अनिता जी …बहुत बधाई !

  2. सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे । आप सभी को बधाई और शुभकामनाएं !

  3. सारे हाइकु सुन्दर!
    सभी रचनाकारों का अभिनन्दन!!

  4. sabhi haiku bahut achhe likhe hain .badhai.
    pushpa mehra

  5. naye bhavon ke saah utkrisht abhivykti .

  6. अनिता ललित जी,नूतन जी बहुत सुन्दर हाइकु।

    आप सभी का दिल से आभार।

  7. सुन्दर सृजन के अनीता ललित जी, नूतन जी, अनीता मंडा जी आप सब को बहुत बधाई!

  8. छिपा न पाती
    पैबंद लगी साड़ी
    शर्मिंन्दा घाटी।

    करें सम्मान
    पर्यावरण का तो
    पीढ़ियाँ सजें ।

    मूढ़ बादल
    सागर पे बरसे
    धरा तरसे।kya baat hai ..bahut hi khoobsurat!katu sachchai ko darshate v sandesh dete haiku ..anita ji ,nutanji v anita ji ko sadar naman ke saath -saath badhai…

  9. नूतन जी, अनीता मण्डा जी बहुत सुंदर, भावपूर्ण हाइकु !
    हार्दिक बधाई आपको !
    मेरा प्रोत्साहन बढ़ाने हेतु संपादक द्वय एवं आप सभी का …हृदय से आभार!

    ~सादर
    अनिता ललित

  10. भूली है राह
    झील की पनाहों में
    थमी है रात।

    बुग्याल हरे
    निर्झर झर झरे
    पर्वत सजे ।

    पीर पर्वत
    पिघल बनी नदी
    सींचा सबको।

    bahut khub! sabhi rachnakaron ko hardik badhai…

  11. अनीता मंडा जी को लेखन के क्षेत्र में बहुत ही कम समय हुआ है। आप बहुत सुन्दर हाइकू लिख लेती है।यह आपके सतत स्वाध्याय का ही परिणाम है।
    सभी की रचनाएँ बहुत सुन्दर है,सभी रचनाकारों को बधाई।

  12. बहुत सुन्दर हाइकु…सबको बहुत बधाई…|


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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