Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 16, 2015

पहाड़ सकुचाए


1-रचना श्रीवास्तव

1

वस्त्र विहीन

पहाड़ सकुचा

लाज के मारे

2

सूने पर्वत

लूटा इस तरह

कुछ न बचा

3

पशु बेघर

उदास था पर्वत

कौन बचाए ?

4

बादल चूमे

पर्वत का मस्तक

बरस जाए ।

5

बहता जल

मेरे ही हृदय से

मैं न पाथर ।

6

मानव छीने

पर्वत के वसन

बादल  ढके

7

नदी थाम के

पर्वत की बाहों को

बहती जाए ।

8

नदी निकली

पर्वत ने खोला जो

उर  का द्वार

9

खिली ऋतुएँ

पर्वत के अँगना

महकी धरा ।

-0-

2-कमला घटाऔरा

1

वर्षा है आई

फुहार ठंडी -ठंडी

नहाई धरा।

2

नभ का प्यार

उतरा वर्षा बन

धन्य हुई भू।

3

चंचल बूँदें

गिरती , नाचती ज्यों

गन्धर्व– कन्या।

4

जलद गुरु

भूलने न दे ताल

छमा-छम की।

5

भावों की नौका

मन नदी में डोले

खेल बच्चों का।

6

तपन भागे

तन मन धरा की

धन्य बरखा

-0-

Advertisements

Responses

  1. सभी हाइकु बहुत सुंदर !
    हार्दिक बधाई रचना जी, कमला जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  2. utkrisht haiku

  3. दोनों लेखकों की रचनाओं में कुदरत का सुंदर चित्रन है । दोनों लेखकों को बधाई !

  4. सभी हाइकु सुन्दर …
    नदी निकली , खिली ऋतुएँ , गन्धर्व कन्या बहुत अच्छे लगे |
    रचना जी और कमला जी को बहुत बधाई !!

  5. प्रकृति का सुन्दर चित्रण.कमला जी एवं रचना जी को बधाई.

  6. बेहतरीन हाइकु। रचना जी, कमला जी को बधाई!

  7. मानव छीने
    पर्वत के वसन
    बादल ढके । रचना, आपका यह हाइकु बहुत भाया |

    जलद गुरु
    भूलने न दे ताल
    छमा-छम की। कमला जी, सभी हाइकु मन भावन | यह विशेष लगा | बधाई |

  8. nadi nikali, parvat ne khola jo, man ka dvar. jalad guru ,bhulane na de tal ,chhama –chham ki. sunder haiku.rachana ji va kamla ji badhai.
    pushpa mehra.

  9. बहुत सुन्दर हाइकु। हार्दिक बधाई।

  10. सभी हाइकु बहुत सुन्दर!
    रचना जी और कमला जी अभिनन्दन!!

  11. रचना जी और कमला जी आप दोनों को सुन्दर हाइकु की रचना पर हार्दिक बधाई |

  12. प्रिय पाठकों आपने मेरी रचनाओं को रूचि लेकर पढ़ा। बहुत प्रोत्साहन मिला। चलना सीखने वाले बच्चे को जैसे एक कदम उठाने पर शाबाशी मिली हो वह उत्साह से भर कर अगला कदम उठाने की कोशिश करे। ठीक उसी तरह यह सब मेरी ‘आत्माजा’ की मेहनत का फल है। संपादक द्वा का बहुत बहुत आभार जिन्होंने हाइकू लोक में मुझे स्थान दिया।
    रचना श्री वास्तव जी के हाइकु बहुत उत्तम लगे। … अधिक भाये। … वस्त्र विहीन /पहाड़ सकुचाये /लाज के मारे।
    मानव छीने /पर्वत के वसन /बादल ढके। … नदी निकली /पर्वत ने खोला जो /उर का द्वार। वधाई रचना जी।

  13. बहुत सुंदर हाइकू, बधाई आप दोनों को

  14. bahut sunder ! badhai dono rachnakaaron ko .

  15. वस्त्र विहीन
    पहाड़ सकुचाए
    लाज के मारे ।

    भावों की नौका
    मन नदी में डोले
    खेल बच्चों का।

    Bahut khub ! meri dono rachnakaron ko hardik badhai….

  16. बेहतरीन हाइकु। रचना जी, कमला जी को बधाई!

  17. बहता जल
    मेरे ही हृदय से
    मैं न पाथर ।

    नदी थाम के
    पर्वत की बाहों को
    बहती जाए ।
    सभी हाइकु बहुत बेहतरीन हैं…पर ये दोनों बहुत भाया..| हार्दिक बधाई…|

    भावों की नौका
    मन नदी में डोले
    खेल बच्चों का।
    बहुत सुन्दर…बधाई…|


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: