Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जून 15, 2015

नन्ही उमंग


1-डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा

1

नन्ही उमंग

छूने चली गगन

होके मगन

2

टूटे हैं बंध

दर्द का दरिया भी

ख़ामोश बहा ।

3

 तेरा अबोला

तोड़ जाए मुझको

जीना मुहाल ।

4

तेरे प्यार का

हुआ जादू सा ऐसा

मूक हुई मैं ।

5

रोमरोम ने

तोड़ दिया ग़ुरूर

मौन का मेरे ।

6

तरसा जिया

लख –लख के पाती

अमृत पिया ।

7

क्यों दूर रही

सुख की एक गंगा

मिलके बही ।

8

बनी हैं धूप

सतरंगी किरनें

बिखरा रूप।

-0-

2-सीमा स्मृति

1

सूनी आँखों-सी

हो गई नीली झील

जल- विहीन ।

2

मन का पंछी

लगा रहा गुहार-

आओ बहार!

3

भटक रही

यूँ उदास तितली

मिली न कली ।

4

काँपी धरती

हजारों दंश सहे

अज्ञानी रहे।

5

खेतों की आँखें

कर रही सवाल

बधिर मेघ।

6

नदिया बहे

यूँ आहें भर कहे-

कितने पल?

7

वो मरुथल

दे प्रश्नों के सलीब

ख़ामोश रहे।

8

बूढ़ा पहाड़

भूला मुझे संसार

करे पुकार

9

बाट जोहती

सूनी पगडंडियाँ

आहें भरती ।

10

हिलोरें लेता

साँसों का एहसास

नव स्पंदन ।

11

नदी- सी बही

मचले सागर-सी

भावों की झील।

12

है अनिश्चित

मिली जीवन धारा

दूर किनारा। 

-0-

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Responses

  1. नन्हीं उमंग़़़़़़़़़ बहुत सुन्दर हाइकु। बधाई

  2. सभी हाइकुबहुत अच्छे लगे । डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा और सीमा स्मृति जी को बधाई और शुभकामनाएं !

  3. बहुत प्यारे हाइकु डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा और सीमा स्मृति जी को बधाई और शुभकामनाएं !

  4. बहुत सुन्दर हाइकु !
    ज्योत्स्ना जी, सीमा जी अभिनन्दन!

  5. बहुत सुन्दर हाइकुहैं ज्योत्सना जी तथा सीमा जी को बधाई.

  6. सभी हाइकु बहुत ही सुंदर एवं प्यारे ! विशेषकर-

    तेरा अबोला
    तोड़ जाए मुझको
    जीना मुहाल ।

    तरसा जिया
    लख –लख के पाती
    अमृत पिया ।

    भटक रही
    यूँ उदास तितली
    मिली न कली ।

    खेतों की आँखें
    कर रही सवाल
    बधिर मेघ।
    हार्दिक बधाई ज्योत्स्ना जी व सीमा जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  7. यहाँ स्थान देने के लिए संपादक द्वय के प्रति बहुत-बहुत आभार !

    आदरणीय Kailash bajpai जी , Subhash Lakheraji , Dr. Saraswati Mathur ji , Amit ji , Dr. Asha Pandey ji evam Anita Lalit ji प्रोत्साहन भरे कमेंट्स के लिए आप सभी का हृदय से धन्यवाद !

    बहुत भावपूर्ण हाइकु सीमा जी हार्दिक बधाई !

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

  8. बहुत सुन्दर रचनाएँ
    दोनों रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनायें

  9. रोम–रोम ने
    तोड़ दिया ग़ुरूर
    मौन का मेरे ।

    नदी- सी बही
    मचले सागर-सी
    भावों की झील।
    badhai aap dono ko
    rachana

  10. नन्ही उमंग
    छूने चली गगन
    होके मगन ।………. बहुत सुंदर ज्योत्सना जी.

    खेतों की आँखें
    कर रही सवाल
    बधिर मेघ।
    …… बहुत सुंदर, सीमा जी !
    आप दोनों को हार्दिक बधाई

  11. डॉ ज्योत्सना जी रोम रोम ने तोड़ दिया गरूर …..गहरे भाव लिए हाइकु है |बधाई |सीमा जी बूढा पहाड़ हाइकु बहुत पसंद आया बधाई |लिखती रहे|

  12. Bhavpurn sabhi haiku,meri hardik badhai…,

  13. sabhi haiku bahut bhavpurn hain, jyotsna ji va seema ji badhai.
    pushpa mehra.

  14. बहुत सुन्दर रचनाएँ।हार्दिक बधाई।

  15. hruday se dhanyawaad Dr. Kavita ji , Rachana ji , Bhavana ji , Savita agrawal’savi’ ji , Bhawna ji , Pushpa di evam Anita Manda ji …dil se shukriyaa !!

  16. नन्ही उमंग
    छूने चली गगन
    होके मगन
    खेतों की आँखें
    कर रही सवाल
    बधिर मेघ।bahut manbhavan haiku ….jyotsna ji v seema ji ko dheron badhai !

  17. बेहतरीन हाइकु…आप दोनों को ढेरों बधाई…|


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