Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 13, 2015

टीसते शूल


1-सुनीता शर्मा 

1

वृक्ष घनेरे 

बस एक लुटेरे 

वन माफिया  ।

2

जून की ज्वाला 

भई  लौ विकराल 

दहके  वन ।

3

टीसते शूल  

फिर भी अनुकूल 

नारी का पथ

-0-

2-कैलाश बाजपेयी

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1

सूत कातती
चाँद पर बुढ़िया
दादी  बताती  ।

2

चाँद -सा बनो
शीतलता फैलाओ
ताप मिटाओ  ।

3

चाँद का  दाग
मिट न सका जब
लिया  बैराग  ।

4

चाँद– सा मुख
नायिका का बताते
छू नहीं  पाते  ।

5

आत्मा  अमर

मिटता है शरीर

कहें  कबीर ।

6

बंशी  की  धुन

मीरा भूली दुनिया

बेसुध   मन   ।

7

इतनी  गर्मी

तप रही धरती

गायब   बत्ती  ।

8

सूरज  दादा

कुपित लग रहे

ताप   बढ़ाया  ।

9

पसीना  सूखा

फिर गई बिजली

पसीना   बहा  ।

10

आया  सावन

लेकर काले घन

मयूर- मन    ।

11

धरती  हँसी

फूल-पौधे मुस्काए

खुशियाँ   छाएँ ।

12

सावन आया

धरती हरी-भरी

मन  हर्षाया  ।16

13

सखियाँ  खुश

झूले पड़े बागों में

पेंग   बढ़ाएँ ।

14

कजरी  गाएँ

झूम-झूम मुस्काएँ

हर्ष   मनाएँ    ।

15

पीहर  आएँ

नवविवाहिताएँ

पी  याद आएँ  ।

16

सूखते  धान

निकल रही जान

ताके  किसान  ।

-0-

कैलाश बाजपेयी
128/862 Y ब्लॉक किदवई नगर कानपुर

नाम-कैलाश बाजपेयी

        पिता-स्व. रमाशंकर बाजपेयी

        माता-स्व. शकुंतला बाजपेयी

        जन्मतिथि-20.03.1960

        समकालीन सांस्कृतिक प्रस्ताव(त्रैमासिक) का 1996 से संपादन,     पहला हाइकु-संग्रह”तीन टिप्पे” प्रकाशनाधीन

        संपर्क-सूत्र-128/862 y ब्लाक किदवई नगर कानपुर-208011

        Mob. 09453286556

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Responses

  1. vrix ghanere……. van mafiya.. sukhte khet ,nikal rahi jan, take kisan.ache va sachai par adharit haiku sunita ji va kailash ji ap dono ko badhai.
    pushpa mehra.

  2. आदरणीय हरदीप सन्धु जी और काम्बोज जी
    सादर अभिवादन
    मैंने नहीं सोचा था कि इतने प्रतिष्ठित पन्नों पर एक दिन मुझे भी स्थान
    मिलेगा। लेकिन आपके इस कृपापूर्ण स्नेह के लिए मैं आपका सदैव आभारी रहूंगा।
    आगे भी आपका स्नेह मिलता रहेगा ऐसा विश्वास है। आभार सहित-
    स्नेहाकांक्षी
    कैलाश बाजपेयी
    On Jun 13, 2015 3:22 PM, हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब

  3. sundar sargarbhit haiku …rachanaakaaron ko bahut badhaaii !

  4. सुंदर हाइकु !
    रचनाकारों को हार्दिक बधाई।

    ~सादर
    अनिता ललित

  5. टीसते शूल
    फिर भी अनुकूल
    नारी का पथ।

    सूखते धान
    निकल रही जान
    ताके किसान ।
    bahut khoob likha hai
    badhai aapdono ko
    rachana

    बेसुध मन ।

  6. bahut khoobsurat ! aap dono rachnakaro ko sadar naman ke saath -saath badhai bhi .

  7. उत्साहवर्धन के लिए आप सभी का ह्रदय से आभारी हूं।

  8. आदरणीय द्वय संपादक जी
    आपने हाइकु पर मेरी कोशिशों को इतना मान दिया आपका हार्दिक आभार ,प्रणाम ।
    स्नेहाकांक्षी

  9. हाइकु प्रवीण सभी हाइकुकारों की उत्साहवर्धक टिप्पणियों से “नन्ही कलम ” में नवीन ऊर्जा का संचार हुआ है ,भविष्य में भी आपका स्नेहशीर्वाद मिलता रहे इसी विश्वास के साथ आप सबको सादर नमन ।

  10. टीसते शूल
    फिर भी अनुकूल
    नारी का पथ।
    बहुत बढ़िया…बधाई…|

    सूत कातती
    चाँद पर बुढ़िया
    दादी बताती ।
    बचपन याद आ गया…| सुन्दर हाइकु…बधाई…|


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