Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 12, 2015

थिरकी वर्षा


1-अनुपमा त्रिपाठी

1

हरित धरा,

बिखरी हरियाली ,

मन पावन

2

थिरकी वर्षा

माटी से हरियाली

महक उठी

3

खनके मन

हरी -हरी चूड़ियाँ

आया सावन

 4

मन भावन,

हुआ हरित मन ,

जैसे सावन

5

कुछ हरी सी ,

मुझमें जो खरी सी ,

बातें तुम्हारी

6

आस से हरी  ,

अनहद पहुंची ,

स्वर लहरी

7

थिरकी वर्षा

माटी से हरियाली

महक उठी

-0-

2-शान्ति पुरोहित- बीकानेर

1

नभ चूनर

वसुंधरा के सिर

सितारों जड़ी |

2

बैखौ हवा

झुलसती धरती

सूर्य प्रचण्ड ।|

3

तुहिन गिरे

वृक्षों के पात पर

मोती सजते

4

भू ने पहना

गुलमोहर हार

किया शृंगार

5

भाव डगर

करुणा संग मैत्री

नेह चरम

6

रिते रिश्ते

फैले जीवन नभ

छलावा बने

7

खेतो के बीच

पगडंडी अकेली

चुप्पी ली खींच

8

नदी प्रवाह

लहराता आँचल

असंख्य धार

 -0-

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Responses

  1. ‘थिरकी वर्षा’ , ‘कुछ हरी सी’ , ‘भाव – डगर’ , ‘खेतों के बीच’ …..बहुत सुन्दर हाइकु !

    अनुपमा जी एवं शान्ति पुरोहित जी को बहुत बधाई !

  2. sabhi haiku bahut sunder hain anupama ji vashanti ji badhai.
    pushpa mehra.

  3. आप दोनों के हाइकु बहुत अच्छे लगे…| हार्दिक बधाई स्वीकारें |


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