Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 7, 2015

झर रही चाँदनी


1-डॉ हरदीप सन्धु

1

छाया गूगल से साभार

छाया गूगल से साभार

चाँद अकेला

चाँदनी से गुफ़्तगू

सिन्धु- किनारे।

2

सिन्धु में डूबी

मखमली चाँदनी

चाँद  मुस्काए।

 3

चाँद -कटोरी

झर रही चाँदनी

सागर पिये ।

4

चाँद अधूरा

बूँद- बूँद बिखरा

खामोश सिन्धु।

5

चाँद- सितारा

बूँद– बूँद सागर

शोख शरारा।

-0-

2-ज्योत्स्ना प्रदीप

छाया: डॉ ज्योत्स्ना शर्मा
छाया: डॉ ज्योत्स्ना शर्मा

1

सागर सारे

सहस्रों नयन भरे

वसुन्धरा के ।

3

बने आईने

सूर्य चन्द्र तारों के

जलधि सारे ।

4

तट की रेत

गीली ही  रहती है

आँसू समेत ।

5

देश- निकाला

लहरों ने दिया है

सीपी, मोती को ।

-0-

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Responses

  1. सभी हाइकु बहुत सुंदर व चित्रात्मक !
    चाँद सितारा
    बूँद– बूँद सागर
    शोख शरारा।( डॉ हरदीप संधु )…अति सुंदर हाइकु
    देश -निकाला
    लहरों ने दिया है
    सीपी, मोती को ।(ज्योत्स्ना प्रदीप )…बहुत खूब !

  2. हरदीप जी और ज्‍योत्‍सना जी अाप दोनों के हाइकु बहुत ही सुन्‍दर हैं । हार्दिक बधाई।
    चाँद सितारा—-
    देश निकाला——

  3. हरदीप जी और ज्योत्स्ना जी आप दोनों के हाइकु बहुत सुंदर है बधाई अच्छे सृजन के लिए

  4. हरदीप जी , ज्योत्स्ना जी, चाँदनी की छटा एवं सागर लहरों से भीगते हुए यह हाइकु मन को भिगो गए | बधाई आप को |

    शशि पाधा

  5. हरदीप सन्धु और ज्योत्स्ना प्रदीप दोनों के हाइकु बहुत अच्छे लगे ।चाँदनी रातों मे समुन्दर और लहरों के चित्र खींचकर कमाल कर दिया अकेला चांद चाँदनी से गुफ्तगू करता समुन्दर किनारे ।हरदीप और ज्योत्सना क्या बढिया बात कही “देश निकाला / लहरों ने दिया/ सीपी मोती को बहुत ही सुन्दर लगी ” देश -निकाले की बात। चाँदनी रात और समुन्दर की लहरों से मिलािकर रात्रि -भ्रमण करा दिया दोनों ने बहुत सुन्दर रचनाएँ बधाई दोनों को ।

  6. हरदीप जी चाँद अधूरा बूँद बूँद …..बढ़िया लगा |ज्योत्स्ना जी आपको भी हार्दिक बधाई |

  7. Dono ke haiku bahut pasand aaye bahut bahut badhai…

  8. सभी हाइकु सुन्दर हैं तथा प्रभावशाली बिम्ब विधान से युक्त हैं। हरदीप जी और ज्योत्स्ना जी को साधुवाद एवं हार्दिक बधाई!!!

  9. हरदीप जी ,ज्योत्स्ना जी मनमोहक हाइकु।

  10. हरदीप जी ,ज्योत्स्ना जी ke haiku gaagar men saagr bhar rhe haen
    badhai

  11. हरदीप जी और ज्योत्स्ना जी दोनों के ही हाइकु प्रभावी हैं सभी हाइकु सरसता से परिपूर्ण है हरदीप जी
    के हाइकु-चाँद कटोरा/झर रही चांदनी/सागर पिए..अद्भुत बिम्बों से युक्त है ।ज्योत्स्ना जी के बिम्ब और प्रतीक भी सुन्दर है -देश निकाला/लहरों ने दिया है/ सीप मोती को…अलग ही अर्थ खोल रहा ।दोनों को हार्दिक बधाई।

  12. चाँद- सितारा
    बूँद– बूँद सागर
    शोख शरारा।
    bahut khoob
    बने आईने
    सूर्य चन्द्र तारों के
    जलधि सारे ।
    bahut khoob likha hai
    badhai
    rachana

  13. सभी हाइकु बेहतरीन हैं और बहुत अच्छे लगे । डॉ हरदीप सन्धु जी और ज्योत्स्ना प्रदीप जी को बधाई और शुभकामनाएं !

  14. मोहक बिम्ब प्रस्तुत करते बहुत सुन्दर हाइकू हैं …

    चाँद सितारा , चाँद कटोरा , तट की रेत , देश निकाला ..बहुत ही सुन्दर हाइकु !

    डॉ. हरदीप जी एवं ज्योत्स्ना जी को बहुत-बहुत बधाई !!!

  15. चाँद अधूरा
    बूँद- बूँद बिखरा
    खामोश सिन्धु।
    अनोखा सा…कहीं टीस जगाता अहसास…| बहुत सुन्दर…|

    देश- निकाला
    लहरों ने दिया है
    सीपी, मोती को ।
    बहुत अच्छा लगा |

    आप दोनों को हार्दिक बधाई…|


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