Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जून 5, 2015

सिन्धु -किनारे


1-भावना सक्सेना

छाया:डॉ जेन्नी शबनम

1

सिन्धु –किनारे

कितनी कहानियाँ

गातीं लहरें।

2

दर्द के गीत

बिछड़े हुए मीत

किस्से घनेरे।

3

कहे लहर

सागर है मुझमें

मुझ बिन क्या !

4

ले गयी दूर

छोड़कर किनारे

यादें लहरें ।

5

चाँद ने छुआ

लहर उठ आई

भीगी ,लजाई ।

6

कई रहस्य

सिंधु उर में छिपे

बूझे न कोई

7

मुझे  पुकारें

सागर की लहरें

बाहें पसारे

-0-

2-कमला निखुर्पा

1

शोर मचाए

सुधियों का सागर

तुम ना आए।

2

जग किनारे

खोजूँ  नेह के मोती

सीपियाँ मिलीं।

-0-

3-रामेश्वर काम्बोजहिमांशु

1

लहरें क्रुद्ध

प्रिय हैं उस पार

मैं मझधार

2

घिरा अँधेरा

खो गए हैं किनारे

प्रिय पुकारे

3

नभ में तूफ़ाँ

घटाएँ घनघोर

कश्ती भी डोली

 4

पुकारूँ कैसे !

उमड़ा है सागर

सुनेगा कौन?

5

छूटा है हाथ

सर्पिणीसी लहरें

केवल साथ

6

तट की रेत

बनाए जो घरौंदे

हुए विलीन

7

कुछ बचा,

बचे पैरों के निशाँ

सिन्धु उदास।

8

खोजेंगे  कहाँ?

तुम सागर पार,

गए,खो गए!

9

मैं हूँ गागर

तुम अतल सिन्धु

दो बूँद दे दो !

10

खारा सागर

मीठी नदियाँ मिलीं

खारा ही रहा

11

चूमना चाहे

चाँद को प्यासा सिन्धु

चूम न पाए

12

भव -सागर

पार करें ,ऐसे कि

डूब न जाएँ

13

जीभ निकाले

हाँफें सिन्धु -उर्मियाँ

कितनी प्यासी !

14

छवि  निहारे

उतर लहरों पे

नीला अम्बर।

15

छाया:डॉ जेन्नी शबनम

अंक में ले लो,

थकान सफर की‘-

नदिया बोली ।

16

तैरके सिन्धु

पा ही लेंगे प्यार के

दो-चार बिन्दु ।

-0-

4-अनिता ललित

1

खो गया जोश
सुन नदी की पीर
सिन्धु खामोश।

2

मन की पीर
सागर से गहरी
चुनूँ मैं मोती। 

3

चाँद है खोया
सपनीली आँखों के
सिन्धु में सोया। 

4

चाँद का दर्द
सागर ने जो पिया,
बेचैन हुआ। 

5

सुधि-तरंगें
जब दिल में उठीं
बेक़ाबू हुईं।
-0-

5-नमिता राकेश

1

क्यों  लाँघे सीमा

और –और की  चाह

पुरुष- सिन्धु

 2

खोया अस्तित्व

समा कर  सिन्धु में

फिर भी  खुश 

3

गोरी  नहाई

खारे  पानी  में जब,

कौंधी   बिजली ।

4

गहरा  सिन्धु

मेरे  अंतर्मनसा

भाव  समेटे।

5

शांत  सागर

फेंके  कोई  पत्थर

हो  हलचल

-0-

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Responses

  1. sagar sambandhit haiku padhe. achchhe lage. badhai. – bsagrawal

  2. भावना सक्सेना ने ठीक ही कहा है, ‘सिन्धु किनारे /कितनी कहानियां /गाती लहरें’ अगली सभी रचनाओं ने इस हाइकु को प्रमाणित किया है. मुझे निम्न रचनाएं विशेष कर पसंद आईं –
    ‘पुकारूं कैसे /उमड़ा है सागर /सुनेगा कौन’ -‘कुछ न बचा/ बचे पैरों के निशान /सिन्धु उदास’-‘अंक में लेलो/ थकान सफ़र की /नदिया बोली’ (काम्बोज)
    ‘शोर मचाए/ सुधियों का सागर/ तुम न आए’ (कमला निखुर्पा )
    ‘सुधि तरंगें/ जब दिल में उठीं /बेकाबू हुईं ‘ (अनिता ललित)
    “गहरा सिन्धु / मेरे अंतर्मन सा / भाव समेटे’ (नमिता राकेश)
    वैसे अन्य सभी रचनाएं भी भावना और विचार को उत्तेजित करने वाली हैं. बधाई और शुभकामनाएं. *सुरेन्द्र वर्मा

  3. भावना सक्सेना जी के ५,६,७, हाइकु ने मन को गहरे छुआ बधाई |कमला जी के भी हाइकु मनभावन लगे और श्री कम्बोज जी के हाइकु ने तो मुझे सागर किनारे ला खड़ाकर लहरों की अठखेलियों का आनंद लेने और उनसे उठते भावों में बहा दिया |नमिता राकेश एवं अनीता जी जी को भी बधाई इतने खूबसूरत हाइकु की रचना पर |

  4. सिन्धु-किनारे…भावना जी, शोर मचाए…कमला जी, कुछ ना बचा… भव -सागर…अंक में ले लो, तैर के सिन्धु….काम्बोज जी, सुधि-तरंगें…अनीता ललित जी, क्यों लाँघे सीमा..खोया अस्तित्व…नमिता राकेश जी के मनमोहक हाइकु! आप सभी को हार्दिक बधाई!

  5. bahut sundar haiku!
    sabhi rachnaakaaron ka abhinandan!!

  6. saagar par haiku sagar umad padaa …behatareen haiku prastut kiye gaye hain …
    ‘sindhu kinaare’ , ‘shor machaye’ , kuchh n bachaa ‘ , bhav saagar,ank mein le lo , sudhi tarangein , khoyaa astitav … anupam haiku !!!
    sabhi rachanaakron ko haardik badhaii !!

  7. वाह वाह एक से बढ़कर एक हाइकु ,आ. काम्बोज जी , अनीता जी। कमला जी , नमिता जी
    , भावना जी आप सभी को हार्दिक बधाई उम्दा हाइकु हैं। मन आनंदित हो गया

    2015-06-05 2:50 GMT-07:00 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब

  8. दर्द के गीत
    बिछड़े हुए मीत
    किस्से घनेरे।
    Bahut khun bahut bahut badhai…

  9. तैरके सिन्धु
    पा ही लेंगे प्यार के
    दो-चार बिन्दु ।
    Javab nahi ! Bahut bahut badhai…

  10. गहन हाइकू !!सभी एक से बढ़कर एक ,आ. काम्बोज भैया जी , अनीता जी। कमला जी , नमिता जी
    , भावना जी आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें !!

  11. saagr – se vishaal haiku ki srndr abhivykti

  12. सुन्दर एक से बढ़कर एक रचनाएँ, सभी रचनाकारों को बधाई एवम शुभकामनायें

  13. gharai lie haiku

  14. चाँद ने छुआ
    लहर उठ आई
    भीगी ,लजाई ।
    बहुत प्यारा हाइकु…|

    जग किनारे
    खोजूँ नेह के मोती
    सीपियाँ मिलीं।
    सुन्दर…|

    छूटा है हाथ
    सर्पिणी –सी लहरें
    केवल साथ ।

    खोजेंगे कहाँ?
    तुम सागर पार,
    गए,खो गए!

    ‘अंक में ले लो,
    थकान सफर की‘-
    नदिया बोली ।
    क्या बात है…!!! अप्रतिम…!!!

    चाँद है खोया
    सपनीली आँखों के
    सिन्धु में सोया।
    मनमोहक…|

    खोया अस्तित्व
    समा कर सिन्धु में
    फिर भी खुश ।
    जैसे एक स्त्री का सच…|
    इतने अच्छे हाइकु के लिए आप सभी को हार्दिक बधाई…|


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