Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 28, 2015

बैरी है जेठ


1-कमला निखुर्पा

1

धरती कहे-

कैसे करूँ घूँघट

बैरी है जेठ ।

2

हँसी है भोर

रोई है दुपहरी

सुबकी साँझ।

3

नाचती फिरे

हवा के संग धूल

ताल-बेताल।

4

माँगे चिरैया

इक टुकड़ा छाँव

दो बूँद पानी ।

-0-

2-विजय आनन्द

 1

बेख़ौफ़ हवा

सूर्य की आगजनी

रूह घायल ।

2

सूर्य उत्तप्त

आक्रोशित किरणें

पक्षी तड़पे ।

3

खफा किरणें

सूरज का उत्पात

सहमी धरा

 4

तपती धरा

पिघलती  हवाएँ

जिस्म झुलसे ।

 -0-

3/566, मालवीय नगर, जयपुर

-0-

3-कशमीरी लाल चावला

1

आज सूरज

बरसा गया धूप

सूखी है नदी ।

-0-

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Responses

  1. Reblogged this on oshriradhekrishnabole.

  2. Bahut sundar haiku !
    Sabhi rachanakaaron ko hardik badhai !!

  3. Bahut sundar rachnaayen !
    Sabhi rachanakaaron ka abhinandan !!

  4. सभी हाइकु बहुत सुंदर !
    सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई !

    ~सादर
    अनिता ललित

  5. बड़े खूबसूरत सभी हाइकु…..आप सभी को हार्दिक बधाई!

  6. bahut hi sunder haiku hai aap sabhi ko bahut bahut badhai
    rachana

  7. सुन्दर मौसमी हाइकु

  8. achhe lage haiku…

  9. मनभावन हाइकु के लिए आप सभी को बधाई…|


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