Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 25, 2015

जेठ मुखिया


1-डाअमिता कौंडल

1

गर्मी की मार,

मारती हैं कितने,

हर मौसम ।

2

झुलसी धरा,

माँगती जल धार,

सूखे हैं कूप।

-0-

2 पुष्पा मेहरा  

1

 शीत की छुट्टी

 बिता के सूर्य राजा

 रौब दिखाते ।

2

 जेठ मुखिया

 तपती छावनी छा

 मगन हुए ।

3

 उड़ती धूल

 रस से भर रहीं

 अमराइयाँ ।

 4

 जेठ का ग़ुस्सा

 लू की चाबुक बन

 तन पे पड़ा ।

5

 सोंधी महक

 जल – भरा मटका

 मन को सींचे ।

6

 लुकी है धूप

 पत्रों के छत्र बीच

 जुड़ाती तन ।

7

 धरती बोली

 कासे कहूँ दुखड़ा

 कोई न रुके  ।

8

 दरकी पड़ीं

 धूप-लपट पी के

 नदियाँ प्यासी ।

 9

 लगी अगन

 गुलमोहर – तन

 निखरा रंग ।

10

 निचोड़े आम

 बनाए अमरस

 मीठी -सी अम्मा ।

-0-

3-कृष्णा वर्मा

1

होते ही भोर

पसारे रवि तेज

धरा आँगन।

2

भरी उमस

पवन  का उच्छ्वास

करे प्रहार ।

3

सूर्य प्रखर

पथिक थका -हारा

ढूँढे डगर।

4

नारंगी गेंद

कौन दे आकाश को

नित ये भेंट।

5

उलीचे आग

बेरहम लू चले

झुलसे गात।

6

कैसी भड़ास

बाँटे पसीना रोज़

छिटके आग।

7

पंछी बेताब

कुण्डी का जल सूखे

सूर्य दे शाप।

8

देखा सूरज

पसीने से नहाई

अकडू धूप।

9

धूप निगोड़ी

छाँव का हाथ धर

भागती फिरे ।

10

कहाँ तन्हाई

धूप में भी घेरती

आ परछाई।

11

खड़ी अकेली

जेठ दोपहरी -सी

तपे जिंदगी।

12

सूर्य शैतान

धरा के सिर गर्म

तम्बू दे तान।

13

अलापे रात

रेतीले टीलों पर

शीतल गान।

-0-

4-रेणु चन्द्रा

1

प्रचंड रूप

गर्मी ने दिखलाया

बहा पसीना ।

2

तपता दिन

सड़कों का डामर

पिघल रहा ।

3

देख हैरान

रमी के तेवर

मन परेशां ।   

4

घात लगा

शहर में लू बैठी

सन्नाटा छाया ।

-0-

5-सुनीता अग्रवाल

1

आ रे बदरा

लांछनाएँ जलाती

भरो अँचरा

2

ताप -संगत

खिले गुलमोहर

नवरंगत

3

धूप से मिली

मृदु मंद बयार

लू बन चली

4

धूप प्रखर

लम्बी परछाइयाँ

सिमटी घर

5

चिहुँके पथ

जेठ की दुपहरी

स्कूल की छुट्टी 

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Responses

  1. सच्चे और अच्छे हाइकु ।

  2. garmi aur dhoop ke vividh roop dikhaate sundar haiku !
    aadaraneeyaa krisha didi ,pushpa didi , amita ji , renu ji , evam sunita ji ko haardik badhaii !!

  3. धूप-लू से त्रस्त सभी हाइकु ! बहुत ख़ूब !
    सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई !
    ~सादर
    अनिता ललित

  4. अरे साहब वाह! गर्मी की तरह गर्म हाइकु भी ख़त्म नहीं हुए…ये भी पहले वालों जैसे ही बेमिसाल हैं :):)
    सभी रचनाकारों का अभिनन्दन !

  5. jhulasi dhara\ mangati jaldhar\ suukhe koop.-amita kondal,.surya prakhar \pathik thaka- haraa\ dhuundhe dagar-. krishnna verma , ghaat lagaye\shahar mein loo baithi\sannataa chhaya.-renu chandra,.aare badara\lanchhanayen jalaatin \bharo anchala.-sunita agrawal.
    garmi ki vibhishika batate tatha usase chhutakara pane ke liye badalon ka aavahan karate haiku bahut hi bhavpurn hain . vaise mujhe yah kahane mein sankoch nahin ho raha hai ki kavi aur kavi haikukar har bar ek hi vishay par haiku likhate samay yah bat dhyan mein rakhata hai ki ek hi bhav naveen shabd -sanyojan ke dwara doharaaya na jaye.maine isi baat ko dhyan mei.n rakhane ki koshish kii. hai
    uparokt sabhii haikukar sathiyon ko hardik badhai.

    pushpa mehra.

  6. झुलसी धरा,
    माँगती जल धार,
    सूखे हैं कूप।

    शीत की छुट्टी
    बिता के सूर्य राजा
    रौब दिखाते ।

    दरकी पड़ीं
    धूप-लपट पी के
    नदियाँ प्यासी ।

    घात लगाए
    शहर में लू बैठी
    सन्नाटा छाया ।

    भरी उमस
    पवन का उच्छ्वास
    करे प्रहार ।
    garmi par aadharit sabhi haiku apne ap me vishesh hai badhayi sabhi rachnakaro ko ..kamboj bhaiya or hardeep di ko shukriya mere haikuz publish kar mera utsaah badhane ke liye 🙂

  7. बहुत सुन्दर हाइकु…हार्दिक बधाई सबको…|


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