Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मई 23, 2015

दर्द


डॉ जेन्नी शबनम

1

बहुत चाहा   

दर्द की टकसाल 

नहीं घटती !

2

दर्द है गंगा

यह मन गंगोत्री-

उद्गमस्थल !

3

मालूम होता

गर दर्द का स्रोत

दफ़ना देते !

4

दर्द पिघला

बादल-सा बरसा

ज़माने बाद !

5

किस राह से

मन में दर्द घुसा,  

नहीं निकला !

6

टिका ही रहा

मन की देहरी पे

दर्द अतिथि !

7

बहुत मारा

दर्द ने चाबुक से,  

मन  छिलाया !

8

8

तू न जा कहीं !

दर्द के बिना जीना 

आदत नहीं !

9

यूँ तन्हा किया 

ज्यों चकमा दे  दिया,  

निगोड़ा दर्द !

10

ये आसमान   

दर्द से रोता रहा

भीगी धरती !

11

सौग़ात मिली,

प्रेम के साथ दर्द

ज्यों फूल-काँटे !

12

मन में खिला

हर दर्द का फूल

रंग अनूठे ! 

13

तमाम रात

कल लटका रहा   

तारों-सा दर्द !

14

क़ैद कर दूँ

पिंजरे में दर्द को 

जी चाहता है !

15

फुर्र से उड़ा

ज्यों ही तू घर आया 

दर्द का पंछी !

16

ज्यों ख़ाली हुई

मन की पगडंडी,

दर्द समाया !

17

रोके न रुका,

बेलगाम दौड़ता  

दर्द है आया !

18

प्यार भी देता

मीठा-मीठा-सा दर्द,   

यही तो मज़ा !

19

दर्द उफ़ना,  

बदरा बन घिरा,   

आँखों से गिरा !

20 

छुप न सका

आँखो ने चुगली की  

दर्द है दिखा !

-0-

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Responses

  1. vedardi dard ke sundr dardile haaiku
    badhai

  2. बहुत भावपूर्ण हाइकु …सभी मर्मस्पर्शी !

    तू न जा कहीं !

    दर्द के बिना जीना

    आदत नहीं ! …वाह भी .आह भी !!
    हार्दिक बधाई !!

  3. सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे । डॉ जेन्नी शबनम जी बधाई और शुभकामनाएं !

  4. टिका ही रहा
    मन की देहरी पे,
    दर्द अतिथि !

    फुर्र से उड़ा
    ज्यों ही तू घर आया
    दर्द का पंछी !

    Dard par likhe aapke haiku bahut achhe lage par dard kisi ko khana achha lagta hai par eak badi baat yah hai ki dard srjan karta hai,aapke ye do haiku mujhe bahut payare lage sateek lage apna priya jab sang ho tab tab dard ko jana hi hota hai bahut touching laga bahut bahut badhai…

  5. सभी हाइकुकारों के हाइकु दर्द और जीवन की सच्चाई लिए हुए है सभी को हार्दिक बधाई |

  6. jenni ji dard par likhe sabhi haiku bahut achhe likhe hain mujhe vishvas hai har pal sukh ka sathi ata rahega jise dekh kar dukh ka panchhi bina koshish ke hi uD
    jayega.sunder haiku hetu badhai.
    pushpa mehra.

  7. दर्द में भीगे भावपूर्ण हाइकु…..बधाई जेन्नी शबनम जी!

  8. टिका ही रहा
    मन की देहरी पे,
    दर्द अतिथि !

    जेन्‍नी जी क्‍या लिख डाला। दर्द और जीवन का सत्‍य । आपके लेखन को नमन ।

  9. वेदना संवेदना जगाते हुए सुन्दर हाइकु ।

  10. सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे । डॉ जेन्नी शबनम जी बधाई और शुभकामनाएं !

  11. दर्द पिघला
    बादल-सा बरसा
    ज़माने बाद !
    bahut hi sunder haiku bahan bahut bahut badhai
    rachana

  12. दर्द है गंगा
    यह मन गंगोत्री-
    उद्गमस्थल …बहुत खूब!
    डॉ. जेन्नी शबनम जी, अभिनन्दन!

  13. मेरे हाइकुओं की सराहना कर मेरा मान बढाने और प्रेमपूर्ण प्रतिक्रिया के लिए आप सभी का ह्रदय से आभार!

  14. दर्द पर इतने सारे भावपूर्ण हाइकु…| काव्य की किसी भी विधा को आपकी लेखनी जब छू लेती है, तो ऐसे ही सुन्दर रचनाएँ निकलती हैं…| बहुत बधाई जेन्नी जी…|


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