Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मई 14, 2015

ख़ुशी का घर


1-डॉ  ज्योत्स्ना शर्मा

1

तन्हा शज़र

जोहता रहा बाट

लौटोगे घर ।

2

दर्द का गीत

मेरे दिल ने गाया

उन्हें सुहाया ।

3

छलक उठीं

अँखियाँ क्या बोलतीं

और बताओ ?

4

ढूँढ तो लिया

ख़ुशियों में तुम्हारी,

ख़ुशी का घर ।

5

ऊँची ही ऊँची

पंछी भरे उड़ान

झुकता आस्माँ।

-0-

2-ज्योत्स्ना प्रदीप

1

आम्रपाली सी

सजी आशाएँ बनी

बौद्ध भिक्षुणी ।

1

वो प्रेम नहीं,

जिसमें आँसुओं के

मोती  न तैरें  ।

2

तुम मेरे हो

लोगों से सुना पर ,

लगा ही नहीं  ।

3

दुष्यंत मन

यादें शकुन्तलासी

सभी भुला दीं 

4

तेरे बहाने

जमें  आँसू पुरानें

तर्पण किए  

-0-

3-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

1

बाहें मरोड़े

दबंग  बवण्डर

डालियाँ तोड़े ।

2

घास मुस्काई-

तूफ़ान थके- हारे

पार न पाएँ।

-0-

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Responses

  1. सभी हाइकु बहुत ही सुन्दर ।
    हार्दिक बधाइयाँ ।

  2. ghas muskai,tufan thake – hare , par na payen.tum mere ho …….,tanha shaZar ….lautoge ghar.bahut sunder bhav hain kamboj bhai ji, jyotsna ji -dono ko badhai.
    pushpa mehra.

  3. ज्योत्स्ना द्वै के हाइकु कोमल भावनाओं से भरपूर हैं. काम्बोज जी ने मर्दवाद पर बड़ा अच्छा कटाक्ष किया है. सभी को बधाई. -सुरेन्द्र वर्मा.

  4. सभी हाइकु अतिसुन्दर एवं भावपूर्ण !

    ढूँढ तो लिया
    ख़ुशियों में तुम्हारी,
    ख़ुशी का घर ।

    वो प्रेम नहीं,
    जिसमें आँसुओं के
    मोती न तैरें ।

    घास मुस्काई-
    तूफ़ान थके- हारे
    पार न पाएँ।

    मन को छू गए।
    हार्दिक बधाई ज्योत्स्ना शर्मा जी, ज्योत्स्ना प्रदीप जी तथा हिमांशु भैया जी!

    ~सादर
    अनिता ललित

  5. ‘tum mere ho’ , ‘wo prem nahi’ ..bahut bhaavpoorn haiku Jyotsna ji ! hardik badhaii !!

    ‘ghaas muskaaii’ ..aur ..’bavandar ‘ dono bahut dabang haiku hain bhaiyaa ji !

    saadhuvaad !!
    saadar naman ke saath
    jyotsna sharma
    yahaan sthaan dene ke liye hruday se dhanyawaad sampaadak dway !!

  6. बेहद, बेहद सुन्दर हाइकु !
    मुझे ये बहुत विशेष लगे:
    १. तन्हा शज़र
    जोहता रहा बाट
    लौटोगे घर ।
    २. आम्रपाली –सी
    सजी आशाएँ बनी
    बौद्ध भिक्षुणी ।
    ३. घास मुस्काई-
    तूफ़ान थके- हारे
    पार न पाएँ।
    सभी रचनाकारों का हार्दिक अभिनन्दन!

  7. सभी हाइकु मनमोहक भावपूर्ण….आप तीनों रचनाकारों को बहुत बधाई!

  8. sabhi sundar haaiku …badhaayi

  9. दर्द का गीत
    मेरे दिल ने गाया
    उन्हें सुहाया ।

    bahut khub kaha aapne dil ka dard bahut bahut badhai…

  10. दुष्यंत –मन
    यादें शकुन्तला–सी
    सभी भुला दीं ।

    javab nahi…bahut bahut badhai…

    बाहें मरोड़े
    दबंग बवण्डर
    डालियाँ तोड़े ।

    manvikarn bahut pasnd aaya..bahut bahut hardik badhai…

  11. ढूँढ तो लिया
    ख़ुशियों में तुम्हारी,
    ख़ुशी का घर ।
    अधिकतर संजो कर रखे हुए रिश्तों में यही होता है…हम किसी अपने की खुशी में अपनी खुशी ढूँढ लेते हैं…|

    ‘तुम मेरे हो’
    लोगों से सुना पर ,
    लगा ही नहीं ।
    बहुत भावपूर्ण…| जब तक दिल न मान पाए, तब तक कोई अपना है ही कहाँ…?

    घास मुस्काई-
    तूफ़ान थके- हारे
    पार न पाएँ।
    कितनी गहरी बात…| कोमलता से, नम्रता से झुकने में हार नही , बल्कि एक अनोखी जीत ही है…| प्रेरक हाइकु…|

    आप सभी को इतनी सुन्दर हाइकु के लिए हार्दिक बधाई…|


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