Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मई 8, 2015

स्वर्ण-मृग मन में


डॉ.शिवजी श्रीवास्तव
शिवजी श्रीवास्तव1
बेला गोधूली,
आलता रचा रही,
साँझ सुन्दरी।
2
उड़ी पतंगें,
सतरंगी चूनर,
फैली नभ में।
3
बटोही सूर्य
समेटता गठरी
शाम होते ही।
4
पाँव पसारे
सुस्ता रही छत पे
फागुनी धूप।
5
लाड़ली उषा,
चढ़ी व्योम काँधे पे,
हँसी धरती।
6
शरच्चन्द्रिका
अनावृत्त सौन्दर्य
धरा- वधू का।

7
गंध संदली,
दिशा–दिशा महकी,
स्मृति- वन में।
8
मन उन्मन,
देते रहते दंश
यादों के बिच्छू।
9
उगा है सूर्य,
निशा सोई थी बोके,
चाँद -सितारे।
10
नन्ही गौरैया
नाप रही नभ को
हौसला तो है।
11
धो रही उषा
रात वाली ओढ़नी
झरे कोहरा।
12
केशो में चाँदी
स्वर्ण-मृग मन में
उम्र ठगिनी।
13
ओ मछुआरे
ढला उम्र का सूर्य
जाल समेटो।
14
तितलियों -सी
झट हो जाती फुर्र,
धूप जाड़ों की।
15
टूट ही गया
तिलिस्म कोहरे का
बिखरी धूप।
17
मन मगन
बेटियाँ गौरैया- सी
छुएँ गगन।
18
चढ़ गया मैं
झुके कन्धे पिता के
बढ़ गया मैं।
19
एक स्वेटर
गर्माता है अब भी
माँ ने बुना था।

छाया: रामेश्वर काम्बोज

छाया: रामेश्वर काम्बोज

20
ग्रीष्म तपाए
योगी गुलमोहर
मोद लुटाए।
-0-

लेखक–परिचय

नाम : डॉ0 शिवजी श्रीवास्तव
जन्म : 19 जनवरी 1955,जिला झाँसी(उ0प्र0)
षिक्षा : एम0ए0(हिन्दी) पी–एच.डी.
सम्प्रति: एसोसिएट प्रोफेसर,हिन्दी विभाग श्री चित्रगुप्त पी.जी कॉलेज मैनपुरी(उ0प्र0)
सम्पर्क : 2,विवेक विहार मैनपुरी,
मोबाइल: 09412069692
पुरस्कार :
1.जाल –वर्तमान साहित्य द्वारा आयोजित कृष्ण प्रताप स्मृति कहानी प्रतियोगिता में पुरस्कृत कहानी–1988.
2. माँद – वर्तमान साहित्य द्वारा आयोजित कृष्ण प्रतापस्मृति कहानी प्रतियोगिता में पुरस्कृत कहानी–1989.
3.अजगर – वर्तमान साहित्य द्वारा आयोजित कृष्ण प्रताप स्मृति कहानी प्रतियोगिता में पुरस्कृत कहानी–1990.
4.ऐसे तो घर नहीं बनता मम्मी (रेडियो नाटक) – अखिल भारतीय सर्वभाषा रेडियो नाट्य लेखन प्रतियोगिता–(1992–1993) में हिन्दी वर्ग में सर्वोच्च स्थान प्राप्त तथा आकाशवाणी के समस्त केन्द्रों से समय–समय पर प्रसारण.
प्रकाशन/प्रसारण :
1.यक्ष प्रश्न (कहानी संग्रह) किताबघर प्रकाशन नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित.
2.मकड़ी का जाला –इप्टा (अखिल भारतीय नाट्य संस्था) की रायबरेली शाखा द्वारा ‘जाल’ कहानी के नाट्य रूपान्तर का 12–13 जनवरी 1990 को रायबरेली में मंचन.
3.आकाशवाणी आगरा एवम झाँसी से अनेक कहानी,वार्ताओं का प्रसारण.
4.असम समस्या पर आठ टैली–फिल्मों की कथा–पटकथा का लेखन.
5.वर्तमान साहित्य,निष्कर्ष,हंस,कथा दशक,कथा समवेत,देशकाल सम्पदा,
इत्यादि प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में समय–समय पर कहानी,लेख,एकांकी समीक्षा,रिपोर्ट आदि प्रकाशित.
6.अमर उजाला,नवभारत टाइम्स,अमृत प्रभात, दैनिक जागरण इत्यादि समाचार पत्रों में समय–समय पर लेख,व समीक्षाएँ प्रकाशित।
सम्पादन : साप्ताहिक समचार पत्रों– बलिदान (मैनपुरी), रिपोर्टर टाइम्स (मैनपुरी) का सम्पादन।
वर्तमान में प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका ‘निष्कर्ष’ (लखनऊ) में सम्पादन सहयोग।
सम्पर्क:–2,विवेक विहार,मैनपुरी–205001

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Responses

  1. केशो में चाँदी
    स्वर्ण-मृग मन में
    उम्र ठगिनी।
    बहुत सुन्दर हाइकु डा० शिवजी श्रीवास्तव जी….बधाई!

  2. सुन्दर रचनाएं!
    डॉ. शिवजी अभिनन्दन!

  3. बहुत ही सुंदर हाइकु शिवजी भाई …बधाई ,शुभकामनायेँ व हिन्दी हाइकु परिवार में स्वागत !

  4. प्रकृति के विभिन्न रूपों का मानवीकरण बहुत ही सुन्दर शब्दावली में | बधाई आपको |

  5. Bahut sundar ,prabhaavii haiku !
    Hardik badhai!

  6. वाह! वाह! अतिसुन्दर ! एक से बढ़कर एक सभी हाइकु। कोई भी किसी से कम नहीं है।
    इतनी सुंदर अभिव्यक्ति के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई एवं आपका हार्दिक स्वागत …आ. डॉ. शिवजी श्रीवास्तव जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  7. केशो में चाँदी
    स्वर्ण-मृग मन में
    उम्र ठगिनी।

    धो रही उषा
    रात वाली ओढ़नी
    झरे कोहरा।BAHUT HI KHOOBSURAT ABHIVYAKTI…..HAARDIK BADHAI AADARNIYA DR.SHIVJI KO .

  8. क्या बात है…! सब एक से बढ़ कर एक हाइकु…| हार्दिक बधाई…|


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