Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 5, 2015

जीवन -नदी


vijay anand1-विजय आनंद

1

जीवन -नदी

सुख -दुःख किनारे

वक़्त मल्लाह।

2

उम्र हिरण

समय आखेटक

लक्ष अभेद्य।

3

उदित सूर्य

 किरणों की किलोल

स्वर्णिम धरा।

4

चैत्र की भोर

 कोयल की कुहक

मन विभोर।

5

 हर्ष अनंत

गूँजी किलकारियाँ

शिशु -प्रसून।

6

मन विटप

 विचार चहकते

ढूँढें बसेरा ।

7

दर्द अबूझ

 प्रकृति का कहर

 किसान हारा।

8

प्रकृति रुष्ट

 आकुल मरुधरा

 जीवन पस्त।

9

कलह -क्लेश

 जीवन -अपकर्ष

 शून्य निष्कर्ष।

10

सार संसार

व्यवहार मिठास

 जीवन रास।

11

दुःख अतिथि

 विदाई सुनिश्चित

 धैर्य फलित।

12

 विकास लीला

अनियमित ऋतु

रूठी प्रकृति।

13

अल्प अर्जन

 कामनाएँ हज़ारों

जान न छोड़ें।

14

वृद्ध अशांत

 बीते लम्हों की दास्ताँ

 भूले कभी ना।

-0-

  विजय आनंद

जन्म तिथि: 23-08-1960

 शिक्षा : स्नातक प्रकाशन: पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ

 सम्प्रति: सहायक लेखाधिकारी

 संपर्क: 3/566, मालवीय नगर, जयपुर

-0-

ओमप्रकाश क्षत्रिय

1

लोभ का जाल

फँसती मछलियाँ

मरे बेहाल ।

2

लोभ के शूल

पंचर कर देते

रिश्तों की गाड़ी।

3

लोभ की  आँधी

जब-जब भी चली

मरे है  गाँधी।

4

निशीथ चोर

सपने देख रहा

जागती भोर ।

5

दया सागर

आँखों से बरसते

माँ के ही  आँसू ।

6

प्रेम की पाती

पपीहा ही लिखता

वर्षा के गीत ।

7

नभ व धरा

क्षितिज का मिलन

कोरा है भ्रम।

8

दर्द का बीज

हर कोई बोता

स्वयं ही रोता ।

9

विभा  बीनती

रवि की किरणों से

दिन के क्षण।

-0-

ओमप्रकाश क्षत्रिय,पोस्ट ऑफिस के पास ,रतनगढ़ -458226,

जिला– – नीमच

मोबाइल 09424079675

opkshatriya@gamilcom

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Responses

  1. बहुत बहुत बधाई विजय आनंद जी व ओम क्षत्रिय जी अच्छे हाइकु हैं । हाइकु परिवार में स्वागत।

  2. आ. विजय आनंद जी की सभी रचनाएँ बहुत खूबसूरत हैं, किन्तु निम्न बहुत ही शानदार है
    जीवन -नदी
    सुख -दुःख किनारे
    वक़्त मल्लाह।

    आ. ओमप्रकाश क्षत्रिय जी ने भी बहुत सुन्दर रचनाएँ लिखी हैं निम्न बहुत बहुत खूबसूरत है

    लोभ के शूल
    पंचर कर देते
    रिश्तों की गाड़ी।

    दोनों ही विद्वानों को बधाई |

  3. Sundar rachnaayen!
    Aap dono ka swaagat..!

  4. alp arjan ,kaamanayen hazaron ……,dard aboojh,prakriti ka kahar….sachai batati panktiyan hain.lobh ke shool,panchar kar dete, rishton ki gaadi.sach hai ,sunder haiku rachana hetu anand ji va xatriya ji ko badhai.
    pushpa mehra.

  5. दर्द का बीज
    हर कोई बोता
    स्वयं ही रोता ।
    बहुत गहरी बात । बहुत सुन्‍दर हाइकु । आपको हार्दिक बधाई।

  6. अति सुंदर

  7. सार संसार
    व्यवहार मिठास
    जीवन रास।
    Satay…badhai…

  8. दर्द का बीज
    हर कोई बोता
    स्वयं ही रोता ।
    Bahut Khub ! Badhai…

  9. Bahut sundar ,prabhaavii rachanaayen !
    Dono rachanakaaron ke Prati hardik badhaaii !

  10. bade hi sundar v prabhaavi haiku …aap dono rachnakaron ko hridy se badhai .

  11. सभी हाइकु प्रभावी! सुंदर प्रस्तुति!
    हार्दिक बधाई एवं स्वागत आ. विजय आनंद जी व ओम प्रकाश क्षत्रिय जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  12. विभा बीनती
    रवि की किरणों से
    दिन के क्षण। बहुत सुन्दर हाइकु , बधाई आपको ओमप्रकाश जी |

    विजय आनन्द जी सभी हाइकु सुन्दर और प्रभावी |
    चैत्र की भोर
    कोयल की कुहक
    मन विभोर।

    मन विटप
    विचार चहकते
    ढूँढें बसेरा । यह दोनों विशेष भाव लिए | बधाई आपको |

    शशि पाधा

  13. दोनों ही रचनाकारों की सभी रचनाएँ बहुत ही भावपूर्ण हैं. हार्दिक बधाई.

  14. सुन्दर हाइकु के लिए आप दोनों को हार्दिक बधाई…|


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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