Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मई 1, 2015

दुल्हन भोर


कमला निखुर्पा

कमला निखुर्पा-हाइगा1

नभ मंडप

किरणों का सेहरा

दुल्हन उषा

2

मंगलगीतकमला निखुर्पा-हाइगा-2

पंछी चहक गाएँ

गूँजी दिशाएँ।

3

सोने की डोर

थामे चली आई है

दुल्हन भोर

4

हठीली हवा

छेड़के छुप जाए

घूँघटठा।

5

घूँघट उठा

चकाचौंध अँखियाँ

चमकी धरा।

6

गिराए वक्त

चाहे कितनी बार

उठेगा इंसाँ ।

7

उसी जगह

सजाएगा सपना

टूटा था जहाँ।

8

होता ही रहा

ध्वंस पर निर्माण

सत्य ले जान ।

9

आँसू को पोछ

तिनकों को उठा

नीड़ तू बना।

-0-

2-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

1

वाटिका रूप

बिखेरे तू खुशबू

भरके सूप

2

अक्षरमोती

मनमाला में गूँथ

सौरभ भरे।

3

मन का ताल

प्रभु-सा है पावन

डूबा तो जाना।

4

खिला कमल

या तुम मुस्काई हो

बनके भोर

5

मन के द्वार

गाता रहूँगा सदा

नेह आरती

-0-

3-सुभाष लखेड़ा

1

हरित क्रांति

फिर भी लोग भूखे

बदन सूखे । 

2

पराया दुःख

बाँटना तो सीखिए ,

वही है सुख। 

3

मंदिर नहीं

आज चलना वहाँ 

पीड़ा है जहाँ।

4

जलजला हो ,

बाढ़ हो या हो  सूखा

गिद्ध लूटेंगे।

5

आज के गिद्ध

चंदा माँगने में हैं

जन्म से सिद्ध।

लोग बेहाल

नेता बजाएँ गाल

भैया  कमाल !

-0-

4- कमला  घाटाऔरा

1

फटा हृदय

पहाड़ी बदलसा

नेपाल भू का।

-0-

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Responses

  1. anupam haiku hain …..

    sone kii dor , vatika roop , khila kamal , mandir nahin , fata hruday ….bahut hii sundar haiku !!

    sabhi rachanaakaaron ko bahut badhaii evam ..

    naman ke saath
    jyotsna sharma

  2. giraye vakht ……,usi jagah, sajayega sapane ……,man ka tal ……,mandir nahin ,aj chalana vahan ….., fata hriday……bahut sunder haiku hain . kamla ji ,kamboj bhai ji lakheda ji ghataaura ji ap sabhi ko badhai .
    pushpa mehra.

  3. सोने की डोर, आँसू को पोंछ, वाटिका रूप, मन का ताल, पराया दुख, मंदिर नहीं तथा फटा हृदय, बहुत सुन्दर हाइकु! आप सभी रचनाकारों को बहुत-बहुत बधाई!

  4. सोने की डोर
    थामे चली आई है
    दुल्हन भोर ।(कमला निखुर्पा)…वाह !

    मन के द्वार
    गाता रहूँगा सदा
    नेह आरती ।(रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’)…बहुत खूब

    पराया दुःख
    बाँटना तो सीखिए ,
    वही है सुख। (सुभाष लघेड़ा )..वाह

    फटा हृदय
    पहाड़ी बादल –सा
    नेपाल भू का।(कमला घाटऔरा )…मार्मिक

    सभी सुंदर हाइकु आप सभी को बधाई !

  5. सभी हाइकु बहुत सुन्दर | हार्दिक बधाई !

  6. सभी हाइकु बहुत सुन्दर!
    “मन का ताल
    प्रभु-सा है पावन
    डूबा तो जाना”…. अद्भुत!
    सब रचनाकारों का हार्दिक अभिनन्दन!

  7. सोने की डोर
    थामे चली आई है
    दुल्हन भोर ।

    खिला कमल
    या तुम मुस्काई हो
    बनके भोर ।

    मंदिर नहीं
    आज चलना वहाँ
    पीड़ा है जहाँ।

    adbhut ……

  8. khile khile haiku mile man bhi khil utha hardik badhai…

  9. मन का ताल
    प्रभु-सा है पावन
    डूबा तो जाना।

    फटा हृदय
    पहाड़ी बदल –सा
    नेपाल भू का।

    जलजला हो ,
    बाढ़ हो या हो सूखा
    गिद्ध लूटेंगे।

    सोने की डोर
    थामे चली आई है
    दुल्हन भोर ।
    sabhi haiku badhiya arthpurn ..haiga bhi bahut hi sundar ,,,:)

  10. अतिसुन्दर हाइगा !
    भोर दुल्हन की ख़ूबसूरती बयान करते सभी हाइकु बेमिसाल…कमला जी !

    आ. हिमांशु भैयाजी… सभी हाइकु बहुत प्यारे, पावन, कोमल !
    मन का ताल
    प्रभु-सा है पावन
    डूबा तो जाना। -बहुत सुंदर!

    आ. सुभाष जी… सार्थक सन्देश देते हाइकु , विशेषकर –
    पराया दुःख
    बाँटना तो सीखिए ,
    वही है सुख। -बहुत सुंदर!

    कमला जी सत्य बयाँ करता हाइकु !

    बहुत-बहुत बधाई आप सभी को !

    ~सादर
    अनिता ललित

  11. सभी रचनाकारों की रचनायें बहुत खूबसूरत हैं |
    सभी बंधुजनों को शुभकामनाएं |

  12. मन के द्वार
    गाता रहूँगा सदा
    नेह आरती ।
    मंदिर नहीं
    आज चलना वहाँ
    पीड़ा है जहाँ।
    आँसू को पोछ
    तिनकों को उठा
    नीड़ तू बना।
    फटा हृदय
    पहाड़ी बदल –सा
    नेपाल भू का।sabhi rachnakaaron ko naman ke saath -saath badhai …itne sundar srajan ke liye.

  13. सोने की डोर
    थामे चली आई है
    दुल्हन भोर ।
    बहुत मनभावन…|

    खिला कमल
    या तुम मुस्काई हो
    बनके भोर ।
    अति सुन्दर…|

    आज के गिद्ध
    चंदा माँगने में हैं
    जन्म से सिद्ध।
    बहुत बढ़िया अवलोकन है आज की राजनीति का…|

    फटा हृदय
    पहाड़ी बदल –सा
    नेपाल भू का।
    फिर याद आ गई वो त्रासदी |

    आप सभी को बहुत बधाई…|


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