Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 30, 2015

दाग़ एक भी नहीं


 डॉ.रश्मि

1

dr.rashmi (1)नारी जीवन

धरती के सरीखा

सहना जाने ।

2

मानुष -तन

जैसे कि तपोवन

कर्मठ काया ।

3

माली अधीर

फूल-सी खिल उठी

बाग़ की कली ।

4

शिकारी ताके

पंख पसारे बेटी

कैद में करे ।

5

मन पंछी-सा

नभ में उड़ रहा

देह -पिंजरा ।

6

वो मज़दूर

जो बनाता था घर

रहा बेघर ।

7

ओ सियासत!

बहुत गिर चुकी

अब सँभल ।

8

पैबंद कई

दाग़ एक भी नहीं

गरीब है वो ।

9

कई बारीक

दिखती हैं दरारें

ढक ले जरा ।

10

कलम शांत

मानवता भी मौन

विकट दौर ।

11

एक रोचक

पुस्तक है ज़िन्दगी

पढ़ो तो ज़रा ।

12

रिश्ते चुभते

काँच की किरचों  -से

दर्द रिसता ।

13

पिया मिलन

नेह का आगमन

प्रेम मुस्काया ।

14

माँ की ममता

आँचल लहराया

शीतल छाया ।

15

अग्नि फेरे ले

बेटी विदा हो गई

दहेज-अग्नि ।

16

डसे इंसान

साँप भी है हैरान

खोह में चल ।

17

कैंची व छुरी

देखकर रो पड़ी

कोख की कली ।

-0-

  • डॉ रश्मि

  • जन्म – 18 जनवरी 1974 कानपुर (उत्तर प्रदेश)

  • शिक्षा – पी-एच. डी. (कबीर काव्य का भाषा शास्त्रीय अध्ययन)

  • सम्प्रति – लेखन व अध्यापन दो पुस्तकें प्रकाशित, तीन अन्य पुस्तकें प्रकाशनाधीन (प्रभात प्रकाशन और किताबघर प्रकाशन)

  • विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं में लेख, कविताएँ, कहानियाँ प्रकाशित

  • नवभारत टाइम्स और आज समाज में नियमित कॉलम-लेखन, दैनिक ट्रिब्यून के लिए पुस्तक समीक्षाएँ

  • दूरदर्शन, अन्य चैनलों एवं आकाशवाणी में प्रस्तुति दिल्ली एवं देश के अन्य शहरों में मंच पर काव्य-प्रस्तुति

  • संपर्क – मोबाईल 9971711337

dr.rashmi00@gmail.com

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Responses

  1. sundar tatha saamyik haiku ….bahut -bahut badhai rashmi ji .

  2. vividh bhaavobn bhare bahut sundar haiku ….

    ‘karmathh kayaaa ‘ , ‘paiband kaii’ , ‘dase insaan’ , ‘kokh kii kalii’…..bahut sundar prastuti !

    haardik badhaaii Rashmi ji !!

  3. badhiya sabhi badhayi

  4. गरीब की सुन्दर ,सटीक परिभाषा – पेवंद कई /दाग एक भी नहीं . ऐसा गरीब गरीब न होकर वस्तुत: अमीर है. सुन्दर हाइकु. – सुरेन्द्र वर्मा

  5. सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे…| हार्दिक बधाई रश्मि जी…|

  6. कैंची व छुरी
    देखकर रो पड़ी
    कोख की कली ।

    अत्यंत मार्मिक …

  7. उम्दा रचनायें |

    कैंची व छुरी
    देखकर रो पड़ी
    कोख की कली ।

    बहुत ही ज्यादा खूबसूरत है |

  8. सभी हाइकू पढ़ कर लगा हिंदी कविता को एक और प्रतिभाशाली हाइकुकार मिल गया है . बधाई. सब एक सेबढ़कर एक, मगर इस हाइकू ने तो रुला ही दिया .
    कैंची व छुरी
    देखकर रो पड़ी
    कोख की कली ।

  9. मेरे सभी प्रिय मित्रों का हृदय से आभार |


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