Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 24, 2015

बस एक कहानी


डॉ.अवनीश सिंह चौहान

abnish singh

1

जरूरी नहीं

जो पढ़ा है तुमने

पढ़ा सकोगे ।

2

जिनके घर

बने हुए शीशे के

लगाते पर्दे ।

3

तेरी-मेरी है

बस एक कहानी-

राजा न रानी

4

प्रभु के लिए

छप्पन भोग बने

खाये पुजारी

5

बड़े दिनों से

मन है मिलने का

समय नहीं ।

6

घोंसले जले

आग से जंगल में

भागे परिंदे

7

अजाने रास्ते

चलते रहे पाँव

ज़िंदगी भर

8

आखिर फिर

फूल हुए शिकार

पतझड़ में

9

कहने को तो

सफर है सुहाना

थकते जाना।

10

पहल हुई-

महिला हो मुखिया

कागज़ पर

11

नदिया चली

तटों से गले मिल

पिया के घर।

12

कैसा उसूल

पत्थरों के हवाले

मासूम फूल

13

अनंत यात्रा

जीवन, जगत की

ढेरों पड़ाव

14

जीव मात्र में

सुख की अभिलाषा

छटे कुहासा

15

नहीं सुनाती

अब एक भी लोरी

मइया मोरी

-0-

परिचय

युवा कवि, अनुवादक, सम्पादक डॉ अवनीश सिंह चौहान का जन्म 04 जून, 1979, चन्दपुरा (निहाल सिंह), इटावा (उत्तर प्रदेश) में हुआ। शिक्षा: अंग्रेज़ी में एम०ए०, बी०एड०, एम०फिल० एवं पीएच०डी०। ‘शब्दायन’ एवं ‘गीत वसुधा’ आदि समवेत संकलनों में आपके गीत और मेरी शाइन (आयरलेंड) द्वारा सम्पादित अंग्रेजी कविता संग्रह ‘ए स्ट्रिंग ऑफ़ वर्ड्स’ (2010) एवं डॉ चारुशील एवं डॉ बिनोद द्वारा सम्पादित अंग्रेजी कवियों का संकलन “एक्जाइल्ड अमंग नेटिव्स” में रचनाएं संकलित। आपकी आधा दर्जन से अधिक अंग्रेजी भाषा की पुस्तकें कई विश्वविद्यालयों में पढ़ी-पढाई जा रही हैं। पिछले वर्ष प्रकाशित आपका गीत संग्रह ‘टुकड़ा कागज़ का’ काफी चर्चित हुआ। आपने ‘बुद्धिनाथ मिश्र की रचनाधर्मिता’ पुस्तक का संपादन किया है। आप वेब पत्रिका पूर्वाभास के सम्पादक हैं। आपको ‘अंतर्राष्ट्रीय कविता कोश सम्मान’, मिशीगन- अमेरिका से ‘बुक ऑफ़ द ईयर अवार्ड’, राष्ट्रीय समाचार पत्र ‘राजस्थान पत्रिका’ का ‘सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार’, अभिव्यक्ति विश्वम् (अभिव्यक्ति एवं अनुभूति वेब पत्रिकाएं) का ‘नवांकुर पुरस्कार’, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान- लखनऊ का ‘हरिवंशराय बच्चन युवा गीतकार सम्मान’ आदि से अलंकृत।

 

 

 

 

 

-0-


Responses

  1. जीव मात्र में
    सुख की अभिलाषा
    छटे कुहासा
    bahut sunder
    haiku privar me aapka svagat hai.
    badhai
    rachana

  2. सभी हाइकु सुंदर अवनीश जी ,जितने सुंदर आपके नवगीत उतने ही सुंदर हाइकु भी लगे ! जयपुर में आपसे मिलना भी सुखद रहा ! बहुत बहुत बधाई !

  3. अजाने रास्ते
    चलते रहे पाँव
    ज़िंदगी भर
    Bahut Khub! Hardik badhai..

  4. Wonderful creations!

  5. सभी हाइकु सुंदर! विशेषकर-
    ‘अजाने रास्ते
    चलते रहे पाँव
    ज़िंदगी भर’ -बहुत अच्छा लगा !

    हार्दिक बधाई… अवनीश सिंह चौहान जी!

    ~सादर
    अनिता ललित

  6. हाइकु परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है। (पहली टिप्पणी में लिखना भूल गए थे!)

    ~सादर
    अनिता ललित

  7. सभी हाइकु बेहतरीन हैं; बहुत अच्छे लगे । डॉ•अवनीश सिंह चौहान को बधाई और शुभकामनाएं !

  8. आप सभी का ह्रदय से आभार

  9. सुन्दर भावपूर्ण उपस्थिति पर वंदन अभिनन्दन डॉ. अवनीश सिंह चौहान जी !
    ‘अनंत यात्रा’ , ‘कैसा उसूल’ , ‘छटे कुहासा’ , अजाने रास्ते’ ..बहुत सुन्दर हाइकु !!
    हार्दिक बधाई !!

  10. जिनके घर
    बने हुए शीशे के
    लगाते पर्दे ।

    4
    प्रभु के लिए
    छप्पन भोग बने
    खाये पुजारी

    नहीं सुनाती
    अब एक भी लोरी
    मइया मोरी

    बहुत ही सुन्दर हैं, बधाईयाँ एवं शुभकामनायें
    कविता भट्ट

  11. अवनीश जी आपका ईमेल आई डी चाहिए मुझे mrs.kavitabhatt@gmail.com पर भेज दीजिये

  12. hindi haiku mein aapka svagat hai avneesh ji
    अजाने रास्ते
    चलते रहे पाँव
    ज़िंदगी भरbahut sunder….naman ke saath -saath badhai .

  13. Thanks a lot, dear all.


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