Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 21, 2015

अकेलापन


डॉ•विद्याविन्दु सिंह

उजली रात1

दूर हो गये

रिश्ते निकट के

तुम न रहे।

2

कैसे ये नाते

सालते रहते हैं

मन मे हूक।

3

गाँठ मन की

खोलकर देखो तो

चाह सब की।

4

घाव न भरा

समय की कोशिश

चलती रही।

5

अकेलापन

जोड़े मुझे मुझसे

तोड़ता नहीं।

6

कैसे मिटेगा

दीप -तले अँधेरा

अहं रहते।

image7

कैसे छँटेगा

गहरा है कुहासा

धूप न रही।

8

चाँदनी रात

विष घोल जाता है

अकेलापन।

9

नदी के तट

मिल नहीं पाते हैं

उदास हुए।

10

नीम बसेरा

चिड़िया नहीं आती

नीड़ उदास।

11

भटक रहा

न मिली जलधार

प्यासा पंछी।

12

कैसे हैं वंश

हँसकर मन को

देते हैं दंश।

13

समुद्र खारा

उसकी आँखों बसा

हुआ बेचारा।

14

उग आए थे

सतरंगे धनुष

भंग हो गए।

15

चट्टान बनो

आँसू के युग बीते

सामना करो।

16

घोंसला बुना

तिनके चुन–चुन

कहाँ खो गया!

17

गिरता पंछी

पंखहीन उड़ान

लहूलुहान।

18

घबड़ा मत

थोड़ा विष और पी

ओ नीलकंठ!

19

चुप तालाब

गहराया कुहरा

आहों की भाप।

20

मधु, डंक भी

मधु मक्खी रखती

चाह मधु की।

21

मेरे नाविक

अनदेखे, अजाने,

पास तो आओ।

पंछी22

रेतीले रिश्ते

किरकते रहते

मन भीतर।

23

नफरत से

नहीं पाओगे मुझे

मैं तो ’प्रेम’ हूँ।

-0-

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Responses

  1. एक से बढ़कर एक हाइकु!
    रिश्तों को तो जैसे आजकल खोने की आदत हो गयी है। अकेलेपन में जितना दर्द है… रस भी उतना है…
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।
    हार्दिक बधाई स्वीकारें आ. डॉ. विद्याविन्दु सिंह जी!
    ~सादर
    अनिता ललित

  2. रेतीले रिश्ते , चुप तालाब , नीलकंठ ,चट्टान बनो ..क्या कहिए ..एक से बढ़कर एक सुन्दर हाइकु हैं …हार्दिक बधाई !

  3. Akelapan,mausi,udasi,intjaar bahut achhe ubharkar aaya hai rachnaon men bahut bahut badhi…

  4. रेतीले रिश्ते
    किरकते रहते
    मन भीतर।

    मेरे नाविक
    अनदेखे, अजाने,
    पास तो आओ।

    मधु, डंक भी
    मधु मक्खी रखती
    चाह मधु की।

    और भी सभी हाइकू सुन्दर………सारगर्भित,
    बधाई महोदय

  5. बहुत ही सुंदर हाइकु .डॉ विद्याविन्दु सिंह जी …बधाई व शुभकामनायें !

  6. sabhi haiku bahut hi bhavpuaN hain . dr. singh ji ko badhai .
    pushpa mehra.

  7. All are absolutely wonderful! Intense! Profound!
    Loved them all!!

  8. चट्टान बनो
    आँसू के युग बीते
    सामना करो।
    bahut khoob

    me prem hoon bahut sunder haiku hai
    sare hi bahut uttam hai
    badhai
    rachana

  9. रेतीले रिश्ते
    किरकते रहते
    मन भीतर।
    बहुत सच्ची बात…| सुन्दर हाइकु के लिए हार्दिक बधाई…|


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