Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 15, 2015

जादू के छौने


ashwini_kumar_vishnuडॉ•अश्विनी कुमार विष्णु

1

रूप ने छोड़े

सपनों के वन में

जादू के छौने

2

सूखे पेड़ की

खोखल में फुदका

कठफोड़वा

3

छिड़क दिए

शंख ने उजियारे

नहा ली हवा

4

मन में गड़ें

कुंकू से लड़ें, जुड़ें

खुली अलकें

5

भूले न प्रभु

उबटन के गीत

कोई भी घर

6

जोगन हवा

ले उड़ी मृगछाला

चकित वन

7

प्रीत में हारे

टूट रहे अँगारे

पोर पोर में

8

मिलें जो पंख

चाँद पर भी कंचे

खेलेंगे बच्चे

9

निशा उन्मन

विदा कह रहे हैं

तारों के पोत

10

पीली पत्तियाँ

लिख रही है ऋतु

छुट्टी की अर्ज़ी

11

लचें कि टूटें

ओलों से जूझ रहीं

फूलों की बेलें  ।

12

पुकार रहे

धुँधलकों के पार

उजले पंख  ।

13

चहके पेड़

सरोवर कुरजाँ

लौटी ख़ुशियाँ

14

गले में ढोल

तनी डोर पे बाला

साधती चाल

15

कूक  से नहीं

हूक  से अनजान

पेड़ों के कान

16

चमचम है

चनारों पर धूप

बर्फ़ ओझल

17

मिली छबीली

आँखों में रँग गईं

छह ऋतुएँ  ।

18

थोड़ी ही देर

थमी चिड़िया, फुर्र

डाल की पीर

19

लाख जतन

न छुपे खुले मन

प्रेम रतन  ।

20

उफ़ ये बर्फ़

जमीं सर्द परतें

मन पर भी

21

अंग अनंग

सरगम तरंग

मन विहंग

-0-

kumarashwini.vishnu@gmail.com

 

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Responses

  1. छिड़क दिए
    शंख ने उजियारे
    नहा ली हवा।
    पीली पत्तियाँ
    लिख रही है ऋतु
    छुट्टी की अर्ज़ी ।
    bahut hi khoobsurat haiku…badhai .hai aapko.

  2. अश्विन भाई …. बधाई हमेशा की तरह आपके सुंदर हाइकु पढ़ मन प्रसन्न हो गया … हाइकु समूह में आपका स्वागत ….शुभकामनाएँ।

  3. सभी हाइकु सुन्दर …
    ‘छिड़क दिए’ , ‘छुट्टी की अर्जी ‘ ,’डाल की पीर’ ….क्या कहिए ..बहुत सुन्दर !
    डॉ. अश्विनी कुमार विष्णु जी को बहुत बधाई !!

  4. सभी हाइकु सुंदर! विशेषकर

    छिड़क दिए
    शंख ने उजियारे
    नहा ली हवा

    पीली पत्तियाँ
    लिख रही है ऋतु
    छुट्टी की अर्ज़ी । — बहुत अच्छे लगे!

    हार्दिक बधाई डॉ अश्विनी कुमार विष्णु जी!

    ~सादर
    अनिता ललित

  5. Welcome Dr. Ashwini Kumar!
    Wonderful, offbeat haiku!
    Best wishes…

  6. lachen ki tuute\ olon se joojh rahin\ phoolon ki belen . bahut sunder . badhai ashwani ji.
    pushpa mehra.

  7. अश्विन जी, आपकी कल्पना के रंग, और सुन्दर शब्द संयोजन से रचे गए सभी हाइकु मनभावन हैं | स्वागत आपका |

    शशि पाधा

  8. ” मिलें जो पंख / चाँद पर भी कंचे/ खेलेंगे बच्चे।” सभी हाइकु बेहतरीन हैं / बहुत अच्छे लगे । डॉ•अश्विनी कुमार विष्णु जी को बधाई और शुभकामनाएं !

  9. अश्विनी जी नमस्कार
    आपका हाइकु परिवार में स्वागत है , सभी हाइकु बहुत सुन्दर , हार्दिक बधाई

  10. Bahut achhe haiku likhe hain badhai svikaren…

  11. प्रीत में हारे
    टूट रहे अँगारे
    पोर – पोर में।

    प्रत्येक हाइकू अनुपम, बधाई

  12. जोगन हवा
    ले उड़ी मृगछाला
    चकित वन ।
    सभी हाइकु बहुत सुन्दर, पर ये बहुत अच्छा लगा…| हार्दिक बधाई…|


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